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अब शुल्क वापसी को भी करना होगा आंदोलन, सड़क पर उतरेंगे छात्र

देहरादून, जेएनएन। फीस बढ़ोत्तरी को लेकर छात्रों का आंदोलन तो आपने सुना होगा, लेकिन माफ की गई फीस की रकम वसूलने के लिए भी सड़कों पर उतर विरोध की तैयारी पहली बार सुनने को मिल रही है। जी हां, यह सच भी है। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय ने चालू शिक्षा सत्र के दौरान स्नातक और स्नातकोत्तर प्रथम सेमेस्टर में 1250 रुपये फीस में बढ़ोत्तरी कर दी थी।

फीस बढ़ोत्तरी को लेकर दून के चारों बड़े कॉलेजों के छात्रों ने करीब एक पखवाड़े तक जबदस्त विरोध किया था। समय रहते मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ.रमेश पोखरियाल निशंक ने छात्रों की मांगों पर गौर करते हुए फीस बढ़ोत्तरी को निरस्त कर दिया था। अब गढ़वाल केंद्रीय विवि ने अभी तक छात्रों की अधिक वसूली गई फीस वापस नहीं की है। इससे छात्रों में नाराजगी है। कॉलेज छात्रों के संगठनों ने अल्टीमेटम देकर विवि के खिलाफ सड़कों पर उतरकर आंदोलन की चेतावनी दे डाली है। अब देखना होगा कि सिर्फ चेतावनी से काम चल जाएगा या फिर छात्रों को अपने पैसे के लिए ही आंदोलन करना पड़ेगा। 

घर में विवाद और ढाई सौ किमी दूर 'आशा' 

उत्तराखंड तकनीकी विवि के अपने परिसर में तो सब कुछ ठीकठाक चलता नहीं हैं और ढाई सौ किलोमीटर दूर गोपेश्वर और पिथौरागढ स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज को संबद्धता देकर विवि बेहतर इंजीनियर तैयार करने के सपने पाले हुए है। यूटीयू अपनी स्थापना से ही विवादों में घिरा रहा है। कभी विवि के कुलपति सुर्खियों में रहे तो कभी पीएचडी धांधली से विवि बदनाम हुआ।

टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ की भर्ती में भी खूब उंगली उठी। सेमेस्टर परीक्षा के प्रश्नपत्रों में अशुद्धियों की भरमार ने भी विवि को खूब बुराई दिलाई। लेकिन विवि इन विवादों को भूलकर बेहतर इंजीनियर 'मानव शक्ति' तैयार करने का सपना संजोए है। इंजीनियर भी अपने परिसर में नहीं, बल्कि विवि से सैकड़ों किलोमीटर दूर पिथौरागढ़ व गोपेश्वर जैसे पहाड़ी इंजीनियङ्क्षरग कॉलेजों में। यूटीयू प्रशासन जिन कॉलेजों से बेहतरीन इंजीनियर निकलने की आस पाले हुए है, देखना होगा कि क्या उन कॉलेजों को भी बेहतर बनाने की कोशिश कर रहा है।   

अब मंत्री जी की मोबाइल 'संसद'

सूबे की उच्च शिक्षा में फिलहाल प्रयोगों का दौर जारी है। अब मंत्री जी का ताजा 'इरादा' कॉलेजों में क्लास के दौरान मोबाइल बैन करने का है। इसको लेकर वह छात्र 'संसद' में जाएंगे। प्रथम चरण में 'मंत्री जी' की कॉलेज परिसर में मोबाइल बैन की मंशा जैसे ही जगजाहिर हुई, वैसे ही चौतरफा छात्रों ने विरोध शुरू कर दिया। वक्त की नजाकत को भांपते हुए मंत्री जी ने पूर्व की तरह तुरंत यू-टर्न लिया और कहा कि 'कैंपस नहीं भाई, मैं तो क्लास रूम की बात कर रहा था'। क्लास रूम में भी केवल उस समय जब लेक्चर चल रहा हो। अब बात छात्र संसद की हो रही है। फरवरी में होने वाली छात्र संसद में 'मंत्री जी' के मंसूबे परवान चढ़ते हैं या नहीं। वैसे मोबाइल आज की युवा पीढ़ी का 'अभिन्न अंग' बन गया है। जिसे उनसे 'दूर' करना आसान नहीं होगा। 

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विवि की राह में कांटे ही कांटे 

प्रदेश के सबसे बड़े राजकीय श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विवि के राह में कांटे ही कांटे हैं। अब देखना है कि विवि के नये कुलपति कैसे इस पथरीली राह से गुजरते हैं। एक सरकारी आदेश के बाद श्रीदेव सुमन विवि से संबद्ध 52 राजकीय महाविद्यालयों के बीए, बीएससी व बीकॉम प्रथम सेमेस्टर के छात्र राह देख रहे हैं कि उनका सिलेबस कब बदलेगा। इन छात्रों की परेशानी यह है कि उन्होंने अगस्त से दिसंबर तक तो सेमेस्टर पाठ्यक्रम की पढ़ाई की और अब बाकी बचे हुए छह महीने में वार्षिक परीक्षा सिस्टम से तैयारी करनी होगी।

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यानि छात्रों के समक्ष यह चुनौती होगी कि उन्हें सालभर का सिलेबस छह महीने में पूरा करना होगा। छात्र ही क्यों, विवि प्रशासन को भी जल्द से जल्द वार्षिक परीक्षा पाठ्यक्रम जारी करना होगा। यह पाठ्यक्रम बीए, बीएससी और बीकॉम तीनों के लिए अलग-अलग बनेगा। फिलहाल विवि प्रशासन प्रोफेशनल सिलेबस की सेमेस्टर परीक्षा करवाने में 'उलझा' हुआ है।   

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