ऋषिकेश: एनसीसी और एनएसएस से जुड़े छात्रों ने जरूरतमंदों की मदद को किया स्वैच्छिक रक्तदान

एनसीसी और एनएसएस से जुड़े छात्रों ने जरूरतमंदों की मदद को किया स्वैच्छिक रक्तदान। जागरण

राजकीय महाविद्यालय ऋषिकेश में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में एनसीसी और एनएसएस से जुड़े छात्रों ने जरूरतमंदों के लिए स्वैच्छिक रक्तदान किया। हिमालयन हॉस्पिटल जौलीग्रांट के सहयोग से आयोजित रक्तदान शिविर का शुभारंभ रूसा के परियोजना निदेशक आनंद उनियाल ने किया।

Raksha PanthriTue, 19 Jan 2021 12:24 PM (IST)

जागरण संवाददाता, ऋषिकेश: राजकीय महाविद्यालय ऋषिकेश में स्वामी राम हिमालयन हॉस्पिटल जौलीग्रांट के सहयोग से आयोजित स्वैच्छिक रक्त दान शिविर में 60 यूनिट रक्त एकत्र किया गया। रक्तदान शिविर का उद्घाटन करते हुए  रूसा के परियोजना निदेशक व अब तक 112 बार रक्तदान कर चुके आनंद उनियाल कहा कि रक्तदान से खुद की सुरक्षा के साथ दूसरों को भी जीवनदान दिया जाता है। रक्तदान के बाद शरीर में नए रक्त से निर्माण से कई बीमारियां भी दूर हो जाती हैं। रक्तदान में सिफलिस, मलेरिया, हिपेटासिटस बी, एड्स आदि बीमारियों की निश्‍शुल्क जांच हो जाती है। इस दौरान महाविद्यालय के स्काउट एंड गाइड (रोवर एंड रेंजर्स), एनसीसी, एनएसएस, योग विभाग व मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी विभाग के 60 छात्र-छात्राओं ने रक्त दान किया। इस अवसर पर महाविद्यालय प्राचार्य प्रो. पंकज पंत, एनसीसी विभाग के प्रभारी डॉ. सतेंद्र कुमार, डॉ. सतेंद्र कुमार, डॉ. गुलशन ढींगरा, डॉ. जय प्रकाश कंसवाल, डॉ. सकुंज, डॉ. ऋतु कश्यप, बीना रयाल, हिमानी नौटियाल, डॉ. दयाधर दीक्षित, डॉ. किरन जोशी, शालिनी कोटियाल, देवेंद्र भट्ट, मयंक रैवानी, अंजलि सेमवाल, सानिया, पंकज आदि मौजूद थे।

हिमालयन हॉस्पिटल सुरक्षित रक्त संचरण को लेकर प्रशिक्षण शुरू 

हिमालयन हॉस्पिटल जौलीग्रांट के ब्लड बैंक की ओर से उत्तराखण्ड राज्य एड्स नियंत्रण समिति युसैक के तत्वावधान में गढ़वाल मंडल के मेडिकल आफिसर के लिए प्रशिक्षण का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें उन्हें सुरक्षित रक्त संचरण से लेकर ब्लड कंपोनेट के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया जायेगा।

मंगलवार को हिमालयन हॉस्पिटल ब्लड बैंक की ओर से गढ़वाल मंडल के मेडिकल आफिसर को ब्लड कंपोनेंट व सुरक्षित रक्त संचरण को लेकर चार दिवसीय राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन नाको के तहत दिये जा रहे प्रशिक्षण का शुभारंभ हो गया। मुख्य अतिथि डॉ. सरोज नैथानी अपर परियोजना निदेशक युसैक्स ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरूआत की। उन्होंने उपस्थित प्रतिभागियों को बताया कि सुरक्षित रक्त आम जनता को उपलब्ध कराना प्रशिक्षण का उद्देश्य है। प्रतिभागी यहां ज्यादा से ज्यादा सीखे और उसे व्यवहार में लाये, तभी कार्यशाला की उपयोगिता साबित होगी। हिमालयन हॉस्पिटल के मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. एसएल जेठानी ने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा सीखने की बात कही। जिससे इसका लाभ आम लोगों को मिल सके। 

डीन मेडिकल कॉलेज डॉ. मुश्ताक अहमद ने कहा कि रक्त संचरण के क्षेत्र में कई तरह के शोध हो रहे है। प्रतिभागी उन्हें व्यवहार में लाये तभी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम की सार्थकता है। इससे पूर्व पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अनुराधा कुसुम ने उपस्थित मुख्य अतिथि को स्मृति चिन्ह देकर उनका स्वागत किया। प्रशिक्षण के पहले दिन ब्लड बैंक के डॉ. मनीष रतूड़ी ने प्रतिभागियों को बताया कि खून में मुख्यत: चार कंपोनेंट होते है, जिन्हें आवश्यकता के अनुसार मरीज को चढ़ाया जा सकता है। कंपोनेंट में आरबीसी, प्लेटलेट्स, प्लाजमा और क्रायोप्रेसिपिटेट शामिल हैं। 

हीमोग्लोबिन कम होने पर मरीज को आरबीसी एवं डेंगू होने पर मरीज को प्लेटलेट्स, लीवर के मरीज को प्लाजमा और बिल्डिंग नहीं रुक रही हो तो क्रायोप्रेसिपिटेट चढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि रक्त लेने से पहले रक्तदाता की पूर्ण जांच करना अति आवश्यक है। इस अवसर पर सहायक निदेशक प्रदीप हटवाल, टेक्निकल एक्सपर्ट जितेंद्र पांडेय, दीपक तिवारी उपस्थित थे।

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