17 गढ़वाल राइफल के जवान विक्रम सिंह नेगी और योगंबर सिंह को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि, जम्मू में हुए थे शहीद

जम्मू के पूंछ जिले में मुठभेड़ में उत्तराखंड के दो जवान शहीद हो गए। इनमें राइफलमैन विक्रम सिंह नेगी टिहरी गढ़वाल जिले के निवासी जबकि राइफलमैन योगंबर सिंह चमोली जिले के निवासी थे। शनिवार को दोनों शहीदों का पार्थिव शरीर उनके गांव पहुंचेगा।

Sunil NegiSat, 16 Oct 2021 10:05 AM (IST)
जम्मू के पूंछ में आतंकवादियों से हुई मुठभेड़ में शहीद हुए दो जवानों का पार्थिव शरीर उनके गांव लाए जाएंगे।

जागरण टीम, नई टिहरी/ चमोली। जम्मू के पूंछ जिले के नाढ़खास में आतंकवादियों से हुई मुठभेड़ में शहीद हुए 17 गढ़वाल राइफल के दो जवान टिहरी गढ़वाल के राइफलमैन विक्रम सिंह नेगी और चमोली के राइफलमैन योगंबर सिंह के पार्थिव शरीर जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर लाए गए। यहां उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। शहीद विक्रम सिंह नेगी का पार्थिव शरीर जब विमाण गांव पहुंचा तो 'वीर विक्रम तुम अमर रहो' के नारों से आसमान गूंज उठा। उधर, शहीद राइफलमैन योगंबर सिंह का पार्थिव शरीर शनिवार को रुद्रप्रयाग सेना कैंप में रखा गया, जो रविवार को सांकरी पहुंचेगा।

'वीर विक्रम तुम अमर रहो' के नारे से गूंजा आसमान

जम्मू के पूंछ जिले के नाढ़खास में आतंकवादियों से हुई मुठभेड़ में शहीद विक्रम सिंह नेगी का पार्थिव शरीर जब विमाण गांव पहुंचा तो 'वीर विक्रम तुम अमर रहो' के नारों से आसमान गूंज उठा। शहीद के पार्थिव शरीर को तिरंगे में लिपटा देख घरवालों और ग्रामीणों के सब्र का बांध टूट गया। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में मौजूद ग्रामीणों ने गमगीन आंखों के साथ शहीद को शनिवार देर शाम उनके पैतृक कोटेश्वर घाट पर अंतिम विदाई दी। शहीद के शव को मुखाग्नि उनके पिता साहब सिंह नेगी ने दी। वहीं कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने कोटेश्वर-फलसारी रोड का नाम शहीद विक्रम सिंह के नाम पर रखने की घोषणा की।

शनिवार शाम लगभग पौने पांच बजे शहीद विक्रम सिंह नेगी का पार्थिव शरीर विमाण गांव पहुंचा। सबसे पहले सैन्य अधिकारियों ने घर के सदस्यों को पार्थिव शरीर के दर्शन कराए। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण शहीद के घर के बाहर जुटे थे। शहीद विक्रम सिंह अमर रहे के नारों के बीच सेना के जवान पार्थिव शरीर को कोटेश्वर घाट लेकर गए, जहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। इस अवसर पर पूर्व मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी, भाजपा नेता आदित्य कोठारी, पूर्व विधायक ओम गोपाल रावत, हिमांशु बिजल्वाण, एसडीएम देवेंद्र सिंह नेगी, टीएचडीसी कोटेश्वर के महाप्रबंधक अनिल कुमार घिल्डियाल, पूर्व जिला पंचायत सदस्य अनिल भंडारी आदि मौजूद रहे।

शेर था मेरा बेटा

शहीद विक्रम सिंह नेगी के पिता साहब सिंह नेगी ने कहा कि उनके बेटे का बचपन से ही सेना में जाने का सपना था। उनका बेटा शेर जैसा बहादुर था और दुश्मनों से लड़ते हुए शहीद हुआ है। उन्हें अपने बेटे पर गर्व है। उनकी मांग है कि देश के वीर सैनिकों के बलिदान का बदला दुश्मनों से लिया जाए। आतंकवाद की समस्या को दूर करने के लिए प्रयास होने चाहिए।

पाकिस्तान मुर्दाबाद के लगे नारे

शहीद को अंतिम विदाई देते वक्त विमाण गांव पहुंचे ग्रामीणों ने शहीद के अमर रहने के नारों के बीच पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे भी लगाए। इससे पहले जब पार्थिव शरीर को लेकर सेना के जवान पहुंचे तो रास्ते में जगह-जगह ग्रामीणों ने शहीद को श्रद्धांजलि दी।

रुद्रप्रयाग के सेना कैंप में रखा गया है शहीद योगंबर सिंह का पार्थिव शरीर

चमोली जिले के पोखरी विकासखंड के सांकरी गांव निवासी शहीद राइफलमैन योगंबर सिंह का पार्थिव शरीर शनिवार को रुद्रप्रयाग सेना कैंप में रखा गया, जो रविवार को सांकरी पहुंचेगा। यहां अंतिम दर्शन के बाद निगोल नदी तट के पैतृक घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। वहीं शनिवार को शहीद के घर क्षेत्रीय ग्रामीणों के अलावा प्रशासन और सेना के अधिकारियों ने पहुंचकर परिवार को सांत्वना दी।

जम्मू के पूंछ जिले के नाढ़खास में आतंकवादियों से हुई मुठभेड़ में पोखरी ब्लाक के सांकरी गांव निवासी राइफलमैन योगंबर सिंह शहीद हो गए थे। इसकी सूचना मिलने के बाद से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। शनिवार को पूरे दिन तहसील प्रशासन और क्षेत्रीय निवासी शहीद के पार्थिव शरीर का इंतजार करते रहे। बाद में प्रशासन ने सूचना दी कि शनिवार को शहीद का पार्थिव शरीर सेना के रुद्रप्रयाग स्थित ट्रांजिट कैंप में रहेगा।

फोन पर बहन को दी थी सगाई की बधाई

जिस दिन योगंबर सिंह भंडारी आतंकवादियों से मुठभेड़ करते हुए शहीद हुए थे, उसी दिन उनकी छोटी बहन की सगाई भी हुई थी। दिन में ही योगंबर सिंह ने मां, पत्नी, बहन और मामा से फोन पर बात भी की थी। साथ ही शादी में छुट्टी पर घर आने की बात कही थी। उन्होंने बहन की सगाई में न आ पाने को लेकर अफसोस भी जताया था। सेम सांकरी के ग्राम प्रधान आनंद सिंह बताते हैं कि योगंबर सिंह का व्यवहार काफी मिलनसार था।

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