राज्यमंत्री रेखा आर्य ने कहा- वात्सल्य योजना के लाभ से वंचित न रहे कोई पात्र बच्चा

मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के क्रियान्वयन के लिए सरकार ने गंभीरता से कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रेखा आर्य ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में कोई भी पात्र बच्चा योजना के लाभ से वंचित न रहने पाए।

Sunil NegiTue, 22 Jun 2021 05:05 AM (IST)
महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रेखा आर्य। फाइल फोटो

राज्य ब्यूरो, देहरादून। प्रदेश में मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के क्रियान्वयन के लिए सरकार ने गंभीरता से कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इस कड़ी में महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रेखा आर्य ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में कोई भी पात्र बच्चा योजना के लाभ से वंचित न रहने पाए। योजना में कोरोना संक्रमण अथवा अन्य बीमारियों के कारण माता-पिता अथवा संरक्षक को खोने वाले बच्चों को 21 वर्ष की आयु तक प्रतिमाह तीन हजार रुपये की आर्थिक सहायता समेत अन्य सुविधाओं का सुरक्षा कवच प्रदान किया गया है। योजना की अवधि एक मार्च 2020 से 31 मार्च 2022 तक है।

विभागीय राज्यमंत्री रेखा आर्य ने रविवार को वर्चुअल माध्यम से हुई बैठक में मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना की समीक्षा की। उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि इस महत्वाकांक्षी योजना के क्रियान्वयन में कहीं कोई कमी न रहे। उन्होंने प्रभावित बच्चों का घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन करने और संबंधित बच्चों का डाटा बाल स्वराज पोर्टल पर अपलोड करने को कहा। यह भी निर्देश दिए कि प्रभावित बच्चों को सप्ताहभर के भीतर मृत्यु प्रमाणपत्र प्राप्त कराने के साथ ही उनके आवेदन वांछित अभिलेखों के साथ 30 जून तक जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालयों में उपलब्ध कराए जाएं।

उन्होंने योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार को कदम उठाने और बच्चों के चिह्नीकरण में चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 का उपयोग करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जुलाई के प्रथम सप्ताह के पश्चात योजना के तहत बच्चों को आर्थिक सहायता देना प्रारंभ किया जाना है। इसलिए जरूरी औपचारिकताएं समय पर पूरी कर ली जाएं।

सचिव महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास हरि चंद्र सेमवाल ने जिलाधिकारियों से अपेक्षा की कि कोविड व अन्य बीमारियों से मृत्यु से संबंधित रिपोर्ट किए गए प्रकरणों और जारी मृत्यु प्रमाणपत्रों के आधार पर घर-घर जाकर प्रभावित बच्चों का सत्यापन कराया जाए। साथ ही उनकी जरूरतों का आकलन करते हुए निदेशालय को सप्ताहभर में रिपोर्ट भेजी जाए। उन्होंने कहा कि सत्यापन कार्य में विभिन्न विभागों के ब्लाक, न्याय पंचायत व ग्राम स्तरीय कार्मिकों और जनप्रतिनिधियों का सहयोग लिया जा सकता है।

बैठक में अपर सचिव प्रशांत आर्य, मुख्य परिवीक्षा अधिकारी मोहित चौधरी, अंजना गुप्ता, अखिलेश मिश्रा, डा एसके सिंह समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे। विभिन्न जिलों के डीएम, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी, आंगनबाड़ी कार्यकर्त्‍ता, सुपरवाइजर वर्चुअली बैठक से जुड़े।

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