राज्यमंत्री डा धन सिंह रावत ने कहा- 205 ग्राम पंचायतों में बनेंगे सार्वजनिक पुस्तकालय

श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र की सभी 205 ग्राम पंचायतों में सार्वजनिक पुस्तकालय की स्थापना की जाएगी। यह कार्य तीन माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। उच्च शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डा धन सिंह रावत ने अपने विधानसभा क्षेत्र में यह पहल की है।

Sunil NegiTue, 22 Jun 2021 07:05 AM (IST)
उच्च शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डा धन सिंह रावत। फाइल फोटो

राज्य ब्यूरो, देहरादून। श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र की सभी 205 ग्राम पंचायतों में सार्वजनिक पुस्तकालय की स्थापना की जाएगी। यह कार्य तीन माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। उच्च शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डा धन सिंह रावत ने अपने विधानसभा क्षेत्र में यह पहल की है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक पुस्तकालयों में युवाओं के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं में उपयोगी, कृषि-बागवानी, महिलाओं और आम जनमानस के लिए लाभकारी पुस्तकों की व्यवस्था की जाएगी।

विधानसभा स्थित कार्यालय में मीडिया से मुखातिब उच्च शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डा धन सिंह रावत ने कहा कि स्कूलों में चटाई मुक्त अभियान के संचालन के बाद पुस्तकालय का अभियान प्रारंभ किया गया है। पुस्तकालयों के लिए उन्होंने विधायक निधि से एक करोड़ रुपये की राशि दी है। ग्राम पंचायत में पुस्तकालय की स्थापना को मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया है। समिति में जिला पंचायतीराज अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी बतौर सदस्य शामिल किए गए हैं।

ग्राम सभा स्तर पर पुस्तकालयों के लिए स्कूल, पंचायत भवन एवं आंगनबाड़ी केंद्रों में से किसी एक का चयन किया जाएगा। पुस्तकालय संचालन के लिए पंचायत स्तर पर ही एक समिति बनाई जाएगी। इसमें ग्राम प्रधान, उप प्रधान, महिला मंगल दल एवं युवक मंगल दल के अध्यक्ष तथा स्कूल से एक अध्यापक को शामिल किया जाएगा। पुस्तकालयों में ग्राम पंचायत की जनसंख्या के अनुसार विभिन्न विषयों से संबंधित एक हजार से लेकर चार हजार तक पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी।

डा रावत ने बताया कि प्रत्येक पुस्तकालय में एक कंप्यूटर भी उपलब्ध कराया जाएगा। इसका उपयोग ग्राम पंचायत के निवासी अन्य जरूरी कार्यों के लिए भी कर सकेंगे। डा रावत ने कहा कि यह अभिनव प्रयोग सफल रहा तो देश के लिए नजीर साबित होगा। उन्होंने बताया कि विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत करीब 98 फीसद विद्यालयों फर्नीचर उपलब्ध कराए गए हैं। प्राथमिक विद्यालय से लेकर इंटर कॉलेजों में पंजीकृत 25,200 छात्र-छात्राओं में से 24 हजार को फर्नीचर मिल चुका है। कोरोना के बढ़ते संक्रमण के चलते 1200 बच्चों को फर्नीचर उपलब्ध नहीं हो पाया। उन्हें शीघ्र फर्नीचर उपलब्ध कराया जाएगा।

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