Mining In Uttarakhand: सौंग और जाखन नदियों में जल्द खुलेगी खनन की राह, फॉरेस्ट क्लीयरेंस को सैद्धांतिक मंजूरी

Mining In Uttarakhand न की सौंग और जाखन नदियों में भी जल्द ही खनन कार्य शुरू हो सकेगा। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की फॉरेस्ट एडवाइजरी कमेटी ने इनके लिए फॉरेस्ट क्लीयरेंस (एफसी) को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।

By Raksha PanthriEdited By: Publish:Sun, 10 Jan 2021 12:29 PM (IST) Updated:Sun, 10 Jan 2021 12:29 PM (IST)
Mining In Uttarakhand: सौंग और जाखन नदियों में जल्द खुलेगी खनन की राह, फॉरेस्ट क्लीयरेंस को सैद्धांतिक मंजूरी
Mining In Uttarakhand: सौंग और जाखन नदियों में जल्द खुलेगी खनन की राह। फाइल फोटो

राज्य ब्यूरो, देहरादून। दून की सौंग और जाखन नदियों में भी जल्द ही खनन कार्य शुरू हो सकेगा। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की फॉरेस्ट एडवाइजरी कमेटी ने इनके लिए फॉरेस्ट क्लीयरेंस (एफसी) को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इसे देखते हुए उत्तराखंड वन विकास निगम ने अब दोनों नदियों में खनन के मद्देनजर एनवायरनमेंट क्लीयरेंस (ईसी) के लिए कवायद शुरू कर दी है। निगम के महाप्रबंधक निशांत वर्मा के मुताबिक प्रयास ये है कि इसी वित्तीय वर्ष से इन नदियों में वैज्ञानिक ढंग से उपखनिज चुगान (खनन) शुरू हो जाए।

दून में सौंग की तीन और जाखन नदी की दो लॉट में खनन के लिए उत्तराखंड वन विकास निगम को पूर्व में 10 साल की अनुमति मिली थी। यह अवधि वर्ष 2019 में समाप्त हो गई। इसके चलते पिछले वर्ष से इन नदियों में खनन कार्य बंद है। परिणामस्वरूप दूनवासियों को निर्माण कार्यों के लिए रेत-बजरी महंगी दरों पर हिमाचल प्रदेश समेत अन्य स्थानों से मंगानी पड़ रही थी। लंबे इंतजार के बाद पिछले साल दिसंबर में निगम को दून में स्वारना नदी में खनन का कार्य शुरू कराने में कामयाबी मिली।

इसके साथ ही निगम ने सौंग व जाखन नदियों की पांच लॉट (खनन क्षेत्र) के लिए फिर से अनुमति लेने की कवायद शुरू की। इसके तहत फॉरेस्ट क्लीयरेंस के लिए प्रस्ताव तैयार कर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजा गया। निगम के महाप्रबंधक निशांत वर्मा ने बताया कि हाल में हुई मंत्रालय की फॉरेस्ट एडवाइजरी कमेटी की बैठक में इस पर चर्चा हुई। कमेटी ने फॉरेस्ट क्लीयरेंस को सैद्धांतिक सहमति दे दी है।

महाप्रबंधक वर्मा के अनुसार अब इन नदियों में खनन के मद्देनजर एनवायरनमेंट मैनेजमेंट प्लान बनाया जा रहा है, जिसे राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण को भेजा जाएगा। प्राधिकरण से एनवायरनमेंट क्लीयरेंस ली जानी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इसी वित्तीय वर्ष में इन नदियों में खनन कार्य शुरू हो जाएगा। इससे दूनवासियों को निर्माण कार्यों के लिए उपखनिज आसानी से उपलब्ध हो सकेगा।

चंद्रभागा के लिए भी कसरत

निगम के महाप्रबंधक वर्मा ने बताया कि ऋषिकेश के नजदीक चंद्रभागा नदी में भी उपखनिज चुगान के मद्देनजर 190 हेक्टेयर क्षेत्र चिह्नित किया गया है। इस संबंध में जल्द ही प्रस्ताव केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजा जाएगा।

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