सुनिये वित्त मंत्रीजी, उत्तराखंड के कर्मचारियों को बजट से कई सौगात की उम्मीद

सुनिये वित्त मंत्रीजी, उत्तराखंड के कर्मचारियों को बजट से कई सौगात की उम्मीद।

बजट से कर्मचारियों एवं पेंशनधारकों को बड़ी उम्मीदें हैं। वर्ष 2020 में केंद्रीय कर्मचारियों को मिलने वाले एरियर और पेंशनरों को महंगाई भत्ते की किस्त से महरूम रहना पड़ा था। राज्य सरकारों ने भी पेंशनधारकों को बढ़ोत्तरी नहीं दी।

Publish Date:Tue, 19 Jan 2021 10:02 AM (IST) Author: Raksha Panthri

जागरण संवाददाता, देहरादून। इस बार बजट से कर्मचारियों और पेंशनधारकों को बड़ी उम्मीदें हैं। वर्ष 2020 में केंद्रीय कर्मचारियों को मिलने वाले एरियर और पेंशनरों को महंगाई भत्ते की किस्त से महरूम रहना पड़ा था। राज्य सरकारों ने भी पेंशनधारकों को बढ़ोत्तरी नहीं दी, लेकिन इस बार राज्य कर्मचारियों को उम्मीद है कि केंद्रीय बजट में कर्मचारियों को कई सौगात मिल सकती हैं।

प्रदेश में दो लाख से अधिक राज्य सरकार के कर्मचारी हैं, जिन्हें वेतन देने के लिए करोड़ों रुपये की जरूरत पड़ती है। ऐसे में डीए और महंगाई भत्ते की एक ही किस्त देने पर सरकार पर करोड़ों रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। वर्ष 2020 में कोरोना संक्रमण के कारण लॉकडाउन लगाना पड़ा था। करीब तीन महीने संपूर्ण लॉकडाउन के कारण सभी गतिविधियां बंद रही। उसके बाद आधी ताकत के साथ कार्य शुरू किए, जिससे सरकार को राजस्व का घाटा भी उठाना पड़ा था। अब कोरोना वैक्सीन आ चुकी है। ऐसे में सभी राजकीय, अद्र्ध राजकीय और निजी संस्थान पूरी शक्ति के साथ कार्य में जुट गए हैं। जिससे सरकार के राजस्व में बढ़ोत्तरी होगी।  

राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा उत्तराखंड के प्रदेश महासचिव सीताराम पोखरियाल ने बताया कि हम आशा करते हैं कि 2021-22 का बजट कर्मचारियों के लिए नई सौगात लेकर आएगा। कर्मचारियों का फ्रीज महंगाई भत्ता मिलेगा। जनवरी 2020 से महंगाई भत्ते का एरियर भी उन्हें मिलेगा। कोरोना काल में बढ़ी महंगाई से आयकर में भी कर्मचारियों को राहत मिलेगी।

मोर्चा के प्रेस सचिव डॉ. कमलेश मिश्रा का कहना है कि वित्त मंत्री से हम उम्मीद करते हैं कि वे पुरानी पेंशन बहाल करेंगी। पुरानी पेंशन योजना से प्रदेश के हजारों वरिष्ठ नागरिकों को लाभ मिलेगा। वैसे भी वरिष्ठ नागरिकों के पास पेंशन के अलावा आय का कोई अन्य स्त्रोत नहीं होता है। कई बुजुर्गों की पेंशन परिवारों के गुजारे का एक मात्र साधन है।

वहीं, उत्तराखंड कलक्ट्रेट मिनिस्ट्रियल एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष जसपाल रावत ने बताया कि वर्तमान में कोरोना महामारी के कारण काफी संख्या में प्रवासी अपने पैतृक गांव पहाड़ आए हैं। उत्तराखंड सरकार से अपील है कि इनकी आजिविका एवं रोजगार के लिए कृषि, बागवानी, पशुपालन, पर्यटन, लघु उघोग को बजट में समुचित व्यवस्था की जाए, जिससे इन्हें रोजगार मिले और पहाड़ों से पलायन को भी रोका जा सके।

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