थोड़ी सी सावधानी और डायबिटीज से बच सकते हैं आप, जानें- लक्षण और बचाव के तरीके; इनका जांच कराना जरूरी

आज डायबिटीज बड़ी समस्या बन गई है। आज एक बड़ी आबादी इस समस्या से जूझ रही है। ये एक ऐसी बीमारी है जिसे नियंत्रित ना किया जाए तो उच्च रक्तचाप हार्ट और गुर्दा रोग आंखों की समस्याएं पैरों में अल्सर आदि होने का भी खतरा बढ़ जाता है।

Raksha PanthriTue, 30 Nov 2021 01:48 PM (IST)
थोड़ी सी सावधानी और डायबिटीज से बच सकते हैं आप।

जागरण संवाददाता, देहरादून। खराब लाइफस्टाइल, व्यायाम की कमी और खानपान की गलत आदतों के कारण आज डायबिटीज बड़ी समस्या बन गई है। आज एक बड़ी आबादी इस समस्या से जूझ रही है। ये एक ऐसी बीमारी है जिसे नियंत्रित ना किया जाए तो उच्च रक्तचाप, हार्ट और गुर्दा रोग, आंखों की समस्याएं, पैरों में अल्सर आदि होने का भी खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में दैनिक जागरण ने फेसबुक लाइव के जरिए आमजन को इस ओर जागरूक किया। एमडी मेडिसिन व गुर्दा रोग विशेषज्ञ डा. विवेक रूहेला ने इस संबंध में कई अहम जानकारी दी।

टाइप-2 के बढ़ रहे मामले

डायबिटीज दो प्रकार की होती है। टाइप-1 और टाइप-2। टाइप-1 डायबिटीज में शरीर में इंसुलिन बनना बंद हो जाती है। आनुवांशिक कारणों से ऐसा होता है। टाइप-2 डायबिटीज होने के पीछे खराब लाइफस्टाइल, स्ट्रेस, नींद की कमी, मोटापा और ब्लड-प्रेशर मुख्य वजह हैं। टाइप-1 डायबिटीज में इंजेक्शन या पंप के जरिए इंसुलिन को शरीर में पहुंचाया जाता है। वहीं, टाइप-2 डायबिटीज दवाओं के साथ ही लाइफस्टाइल में सुधार से ठीक हो जाती है।

ज्यादा मीठा खाने से नहीं होता डायबिटीज

डा. रूहेला ने बताया कि मीठे खाद्य पदार्थ, सोडा और प्रोसेस्ड फूड सीधे तौर पर डायबिटीज का जोखिम नहीं बढ़ाते। इन सभी चीजों से आपके मोटापे का खतरा बढ़ जाता है, जिससे डायबिटीज हो सकती है। मीठे और डायबिटीज का संबंध सीधा नहीं है।

चालीस की उम्र के बाद जरूर कराएं जांच

डा. रूहेला के अनुसार, चालीस की उम्र के बाद व्यक्ति को अपना नियमित स्वास्थ्य परीक्षण करवाना चाहिए। इनमें शुगर की जांच, लिपिड प्रोफाइल, किडनी फंक्शन टेस्ट, लिवर फंक्शन टेस्ट, टीएमटी जांच, रेटिना की जांच जरूर कराएं।

इन्हें जांच कराना जरूरी

- 40 की उम्र के बाद कराएं।

- परिवार में हिस्ट्री तो 30 की उम्र वाले।

- मोटापा है तो 20 की उम्र वाले।

- हाई बीपी, कोलेस्ट्राल, थायराइड व अनियमित मासिक धर्म की समस्या।

लक्षण

थकान, घाव का न भरना, पेशाब में बार-बार इंफेक्शन, कमजोरी, बार-बार पेशाब व ज्यादा प्यास लगना।

मधुमेह से बचाव के उपाय

- अपने ग्लूकोज स्तर को जांचें और भोजन से पहले यह 100 और भोजन के बाद 125 से ज्यादा है तो सतर्क हो जाएं। अपनी जीवनशैली में बदलाव करें और शारीरिक श्रम करना शुरू करें।

- कम कैलोरी वाला भोजन खाएं। सब्जियां, ताजे फल, साबुत अनाज, डेयरी उत्पाद और ओमेगा-3 वसा के स्रोतों को अपने भोजन में शामिल कीजिए।

- धूमपान और शराब से परहेज करें।

- तनाव कम और रात को पर्याप्त नींद लें।

- नियमित रूप से स्वास्थ्य की जांच करवाते रहें।

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