उत्तराखंड के इस गांव में है देश सेवा का अनूठा जज्बा, यहां के हर घर से कोई न कोई सरहद पर है तैनात

भारत- -तिब्बत-चीन सीमा से लगे चमोली जिले (उत्तराखंड) के सवाड़ गांव के ग्रामीणों में देश सेवा का जज्बा अनूठा है। इस गांव के हर घर से कोई न कोई देश की रक्षा को सरहद पर पूरी तरह से मुस्तैद है।

Raksha PanthriTue, 23 Nov 2021 10:56 AM (IST)
उत्तराखंड के इस गांव में है देश सेवा का अनूठा जज्बा।

संवाद सहयोगी, गोपेश्वर(चमोली)। वैसे तो उत्तराखंड के हर गांव से देश की सरहद की सुरक्षा को जवान तैनात है, लेकिन भारत- -तिब्बत-चीन सीमा से लगे चमोली जिले के सवाड़ गांव के ग्रामीणों में देश सेवा का जज्बा अनूठा है। इस गांव के हर घर से कोई न कोई देश की रक्षा को सरहद पर मुस्तैद है। प्रथम विश्व युद्ध, द्वितीय विश्व युद्ध से लेकर देश की आजादी के लिए हुए आंदोलनों में इस गांव के सैनिकों की भूमिका इतिहास के पन्नों में आज भी दर्ज है। तो चलिए आपको इस गांव के बारे में बताते हैं...

चमोली जिले के सुदूरवर्ती देवाल विकासखंड में बसे सवाड़ गांव के ग्रामीणों में देश सेवा का जज्बा कूट-कूटकर भरा हुआ है। ये गांव सैनिक बाहुल्य गांवों में सुमार है। देश की आजादी से पहले की बात करें तो प्रथम विश्व युद्ध में इस गांव के 22 सैनिकों ने युद्ध में हिस्सा ले दुश्मन सेना को पछाड़ने का काम किया। इस दौरान गांव के दो सैनिक वीरगति को भी प्राप्त हुए।

द्वितीय विश्व युद्ध में 30 ने लिया था हिस्सा

देश सेवा के प्रति यहां के ग्रामीणों का जज्बा ही है कि जब द्वितीय विश्व युद्ध छिड़ा तो उस युद्ध में भी ब्रिटिश सेना की ओर से इस गांव के 38 व्यक्तियों ने हिस्सा लेकर अपनी वीरता का लोहा मनवाया। भारत की आजादी के दौरान ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ हुई लड़ाइयों में भी इस गांव के वीर सैनिकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।

देश की आजादी के लिए चले पेशावर कांड में सवाड़ गांव के 17 सैनिकों ने भाग लिया। आज भी इस गांव के 106 व्यक्ति सेना में तैनात होकर देश की सरहदों और आंतरिक सुरक्षा में जुटे हुए हैं। यहां से प्रथम विश्व युद्ध में भाग लेने वाले वीरों की याद में शिलापट्ट भी लगाया गया है, जो अमर शहीद स्मारक के रूप में जाना जाता है।

पूर्वजों की प्रेरणा से हर व्यक्ति में देश सेवा का जुनून

जिला मुख्यालय गोपेश्वर से 112 किमी और ब्लाक मुख्यालय देवाल से 14 किमी की दूरी पर स्थित सवाड़ गांव 317.95 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ गांव है। वर्तमान में इस गांव की आबादी 1400 के करीब है। सवाड़ गांव की प्रधान कंचना बिष्ट कहती हैं कि उनके गांव के हर घर के व्यक्ति में देश सेवा का जज्बा है। वह कहती हैं कि उनके पूर्वजों ने देश की सेवा कर इतिहास में अपना नाम दर्ज किया। पूर्वजों की प्रेरणा से ही आज गांव के हर व्यक्ति में देश की सेवा का जुनून है।

यह भी पढ़ें- जानें- शहीद मेजर विभूति के बारे में, जिन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र से किया गया सम्मानित; पांच आतंकवादियों को मार गिराया था

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

Tags
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.