कोरोनाकाल में अनाथ हुए बच्चों का सहारा बन रही जॉय संस्था, 100 बच्चों को गोद लेकर देगी शिक्षा

कोरोनाकाल ने आम जन के जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। आर्थिक और मानसिक तौर पर आमजन को हुए नुकसान की शायद आने वाले समय में भरपाई हो जाए लेकिन जीवन की क्षति कभी नहीं भरी जा सकती।

Raksha PanthriTue, 20 Jul 2021 10:11 AM (IST)
कोरोनाकाल में अनाथ हुए बच्चों का सहारा बन रही जॉय संस्था।

जागरण संवाददाता, देहरादून। कोरोनाकाल ने आम जन के जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। आर्थिक और मानसिक तौर पर आमजन को हुए नुकसान की शायद आने वाले समय में भरपाई हो जाए, लेकिन जीवन की क्षति कभी नहीं भरी जा सकती। महामारी ने कई बच्चों के सिर से माता-पिता का साया तक छीन लिया। ऐसे बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए दून की एक संस्था जस्ट ओपन योरसेल्फ (जॉय) ने पहल की है। यह संस्था उत्तराखंड के 100 बच्चों को गोद लेगी और इन्हें शिक्षा देगी।

जॉय के संस्थापक जय शर्मा ने बताया कि उन्हें पढ़ाना बहुत अच्छा लगता है। कोरोनाकाल में अपनी संस्था की टीम के साथ बातचीत की तो उन्होंने सुझाव दिया कि कोरोनाकाल में लोग की केवल भोजन-पानी की सहायता करना काफी नहीं। टीम ने मिलकर बच्चों को गोद लेने और उन्हें शिक्षा मुहैया करवाने का फैसला किया।

कोरोना की दूसरी लहर शुरू हुई तो हमें शुरुआती दो हफ्तों में पांच ऐसे परिवारों का पता चला, जहां माता और पिता दोनों की मृत्यु हो गई थी और बच्चे घर पर अकेले रह गए थे। इनमें से कुछ बच्चे चौथी-पांचवीं कक्षा के थे, एक बच्चा 12वीं कक्षा में था और बाकी बच्चे छोटी उम्र के थे। ऐसे ही एक के बाद एक परिवार मिलते गए जहां बच्चे अनाथ हो गए हैं। अब इनकी सहायता के लिए संस्था हर संभव कार्य कर रही है।

अब तक बीस बच्चों को लिया गोद

जय ने बताया कि उनकी संस्था ने 100 बच्चों को गोद लेने का लक्ष्य बनाया है। अब तक उनकी संस्था 20 बच्चों को गोद ले भी चुकी है। संस्था उनके भोजन, दवा, पढाई, खर्चा और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं की देखभाल कर रही है। हर बच्चे को आत्मनिर्भर बनाने के तक संस्था बच्चों को पढ़ाई करवाएगी और इनका मार्गदर्शन करेगी।

कोरोना काल में की जरूरतमंदों की मदद

जय ने बताते हैं कि कोरोना संक्रमण शुरू होने के बाद से ही उनकी संस्था सक्रिय तौर पर जरूरमंद लोग की मदद कर रही है। संस्था ने राशन, मास्क, सैनिटाइजर, आक्सीजन सिलिंडर समेत अन्य जरूरत की चीजें आम लोग तक पहुंचाई। आगे भी संस्था यह प्रयास जारी रखेगी।

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