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उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर में बनेगा औद्योगिक गलियारा, दी जाएगी तीन हजार एकड़ की जमीन

देहरादून, राज्य ब्यूरो। केंद्र सरकार के सहयोग से जल्द ही उत्तराखंड सरकार प्रदेश में विनिर्माण (मैन्यूफैक्चरिंग) के क्षेत्र में आगे कदम बढ़ाएगी। इसके लिए खुरपिया और पराग फार्म को औद्योगिक गलियारे से जोड़ने को केंद्र सरकार को तीन हजार एकड़ जमीन दी जाएगी। इस क्षेत्र को विकसित करने का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाएगी। केंद्र सरकार इस समय आत्मनिर्भर भारत की दिशा में काम कर रही है। इसके साथ ही यहां दूसरे देशों से निवेश को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। नजर विशेषकर उन देशों की कंपनियों पर है, जो अभी तक विनिर्मिाण का कार्य चीन में करा रही थीं। 

केंद्र सरकार का मानना है कि चीन को विनिर्माण में अगर मात देनी है तो इसके लिए देश के हर हिस्से में औद्योगिक विकास करने की जरूरत है। ऐसे में केंद्र की नजरें औद्योगिक रूप से पिछड़े राज्यों पर है। उत्तराखंड भी औद्योगिक रूप से पिछड़े निचले पायदान वाले छह राज्यों में शामिल है। उत्तराखंड में औद्योगिक विनिर्माण समूह विकसित करने की लंबे समय से काम चल रहा है। यह बात अलग है कि यह योजना अभी तक धरातल पर नहीं उतर पाई है। इसका मुख्य कारण यहां एक साथ जमीन का न मिलना है। 
ऊधमसिंह नगर में प्रदेश सरकार के पास खुरपिया और पराग फार्म में एक हजार हेक्टेयर जमीन है। ऐेसे में सरकार की मंशा पहले इस जमीन को औद्योगिक गलियारे के लिए देने की है। इसके साथ ही यहां एक स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) का गठन भी किया जाना है, जिसमें प्रदेश और केंद्र सरकार के प्रतिनिधि होंगे। यही एसपीवी केंद्र से मिलने वाली आर्थिक मदद के जरिये ढांचागत विकास का काम करेगी। जिस तरह से अभी केंद्र सरकार ने औद्योगिक निवेश के लिए देश भर में औद्योगिक विकास को तवज्जो दी है, ऐसे में यहां भी यह कार्य गति पकड़ेगा। 
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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बताया कि जमीन को केंद्र सरकार को हस्तांतरित करने समेत एसपीवी गठन का मसला जल्द ही कैबिनेट में लाए जाने की भी संभावना है। इसके तहत पहले चरण में एक हजार हेक्टेयर और फिर अगले चरण में शेष दो हजार हेक्टेयर जमीन देने की तैयारी है। 'इस संबंध में कुछ दिनों पहले केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल से बातचीत हुई है। उन्हें बताया गया है कि ऊधमसिंह नगर में पर्याप्त भूमि है। वहां उद्योग लग सकते हैं। इसके अलावा हरिद्वार में भी नया औद्योगिक क्षेत्र बनाया जा रहा है। निवेशकों की सहूलियतों का प्रविधान नीतियों में भी किया गया है।
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