IIT Roorkee: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की को मिलेगा टेक्नोलॉजी हब, जानिए कैसे करेगा काम

आइआइटी रुड़की को एनएम-आइसीपीएस के तहत जल्द एक टेक्नोलॉजी हब मिलने जा रहा है। प्रतीकात्‍मक फोटो।
Publish Date:Tue, 22 Sep 2020 09:15 AM (IST) Author: Sunil Negi

रुड़की, रीना डंडरियाल। IIT Roorkee भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) रुड़की को नेशनल मिशन ऑफ इंटर डिसिप्लिनरी साइबर-फिजिकल सिस्टम (एनएम-आइसीपीएस) के तहत जल्द एक टेक्नोलॉजी हब मिलने जा रहा है। यह विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से स्थापित किए जा रहे 25 केंद्रों में से एक है। आइहब नाम का यह केंद्र 356 मूलभूत प्रौद्योगिकियों के लिए वन-स्टॉप सॉल्यूशन का काम करेगा। इसके लिए स्वीकृत 135 करोड़ के अनुदान में से 7.25 करोड़ की धनराशि पहले प्राप्त हो चुकी है।

आइहब सात एप्लिकेशन डोमेन-हेल्थ रिसर्च, डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट, इलेक्ट्रॉनिक्स और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स, न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी, टेलीकम्युनिकेशन और एटॉमिक एनर्जी में ‘डिवाइस टेक्नोलॉजी एंड मटीरियल’ प्रोजेक्ट्स पर फोकस करेगा। आइआइटी रुड़की के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख प्रो. सुदेब दासगुप्ता ने बताया कि साइबर-फिजिकल सिस्टम उन्नत तकनीकों का समावेशन है। यह नवाचार और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने वाले पारिस्थितिकी तंत्र का भी निर्माण करेगा। 

आइआइटी रुड़की के एसआरआइसी डीन प्रो. मनीष श्रीखंडे ने बताया कि हब की परिकल्पना साइबर-फिजिकल सिस्टम्स और संबद्ध तकनीकों के लिए वन-स्टॉप प्लेटफॉर्म के रूप में की गई है। इस कदम से ज्ञान साझा एवं सहयोग करने, कार्यबल के कौशल विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद मिलेगी। हब के तहत आइआइटी रुड़की विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक और औद्योगिक भागीदारों के साथ सीपीएस से संबंधित कई उत्पादों को विकसित करने का काम करेगा। इनमें आइआइटी कानपुर और मैकगिल विश्वविद्यालय कनाडा के साथ एक एआइ-संचालित बहुउद्देशीय इंटेलीजेंट सिक्योरिटी और निगरानी प्रणाली, प्रोफिसिएंट डिजाइन एलएलसी यूएसए के साथ एक सुरक्षित एआइ प्रोसेसर, आइआइटी गुवाहाटी, रित्सुमिकन विवि जापान, राष्ट्रीय चेंग कुंग विवि ताइवान और जोहान्स केप्लर विवि ऑस्टिया के सहयोग से प्रोटोटाइपिंग माइक्रोफ्लूडिक लैब-ऑन-चिप्स के लिए साइबर-फिजिकल प्लेटफॉर्म का विकास शामिल है।

साइबर-फिजिकल सिस्टम्स (सीपीएस) उस इंजिनीयर्ड सिस्टम का एक नया समूह है, जो एक डायनामिक वातावरण में संगणना और भौतिक प्रक्रियाओं को एकीकृत करता है। सीपीएस में साइबरनेटिक्स, मेकाट्रॉनिक्स, डिजाइन और एंबेडेड सिस्टम, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आइओटी), बिग डेटा, ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) और कई अन्य प्रौद्योगिकी क्षेत्र शामिल हैं।

भारत में सीपीएस प्रौद्योगिकी के प्रसार में तेजी लाने को विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने एनएम आइसीपीएस की स्थापना की है। मिशन सीपीएस और संबंधित प्रौद्योगिकियों के कार्यान्वयन, सीपीएस में कुशल कार्यबल तैयार करने, ट्रांसलेशनल अनुसंधान को प्रोत्साहित करने और सीपीएस में उद्यमशीलता व स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्र के विकास में तेजी लाने पर केंद्रित है। मिशन के तहत 18 टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब (टीआइएच), छह सेक्टोरल एप्लिकेशन हब (एसएएच) और चार टेक्नोलॉजी ट्रांसलेशन रिसर्च पार्क (टीटीआरपी) के नेटवर्क की कल्पना की गई है।

मिलेगी प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की सुविधा

हब स्टार्ट-अप के ग्रोथ में सहयोग के साथ ही उत्पाद, प्रकाशन, बौद्धिक संपदा, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण जैसी सुविधाएं भी प्रदान करेगा। यह रोजगार के कई प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष अवसर पैदा करेगा। अपना उद्देश्य पूरा करने के लिए यह देश-विदेश के कई प्रमुख संस्थानों के साथ ही राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग और औद्योगिक भागीदारी की संभावनाओं का पता लगाने का काम भी करेगा।

विदेशी विवि के साथ मिलकर कई प्रोजेक्ट पर होगा काम

आइआइटी रुड़की ने कैंब्रिज विवि, यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन और यूनिवर्सिटी ऑफ बाथ ब्रिटेन के सहयोग से क्लिनिकल और पर्यावरण नमूनों में एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध का पता लगाने के लिए एक उन्नत मल्टीस्टेज डायग्नोस्टिक टूल के विकास का प्रस्ताव भी रखा है। इसके अलावा सीडीएसी त्रिवेंद्रम, टीएचडीसी इंडिया, भेल और विक्टोरिया विवि कनाडा के साथ एक हैक-फ्री हाइड्रो प्लांट कंट्रोल सिस्टम विकसित किया जाना भी प्रस्तावित है। पहाड़ी इलाकों में सीमा सुरक्षा के लिए मल्टी-एजेंट-बेस्ड निगरानी व परिवहन नेविगेशन प्रणाली और स्वास्थ्य की देखभाल के लिए एक बॉडी मूवमेंट-बेस्ड एनर्जी हारवेस्टर भी प्रस्तावित विकास लक्ष्यों में शामिल है।

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प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी (निदेशक, आइआइटी रुड़की) का कहना है कि आइहब साइबर-फिजिकल सिस्टम और संबंधित प्रौद्योगिकियों को अपनाने की प्रक्रिया में तेजी लाएगा। यह प्रौद्योगिकी पर आधारित अनुसंधान के पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की हमारी प्रतिबद्धता के अनुरूप है।

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