सभी 13 जिलों में गो-संरक्षण समितियां गठित

प्रदेश सरकार ने गोवंश संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने सभी 13 जिलों में गो-संरक्षण समिति का गठन कर लिया है।

Fri, 11 Jan 2019 07:04 PM (IST)
सभी 13 जिलों में गो-संरक्षण समितियां गठित

जागरण संवाददाता, देहरादून : प्रदेश सरकार ने गोवंश संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने सभी 13 जिलों में गोवंश संरक्षण समिति का गठन कर दिया है। इस समिति को जिले में गो अपराध रोकने व आवारा गोवंश के रहने का प्रबंध करने के लिए विशेषाधिकार प्राप्त होंगे। खास बात यह कि ये समितियां कांजी हाउस, गो-सदनों पर भी निगरानी रखेंगीं और समय-समय पर औचक निरीक्षण कर कार्रवाई भी करेंगीं। समिति के अध्यक्ष संबंधित जिले के जिलाधिकारी होंगे। उत्तराखंड गो-सेवा आयोग के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह रावत ने बताया कि 13 जिलों में समितियों के गठन के संबंध में शासनादेश जारी हो गया है। जिलों में समितियां गठित हो चुकी हैं। अब समितियां अपने-अपने जिलों में गोवंश अपराध रोकने व संरक्षण की दिशा में कार्य करने के लिए प्रभावी होंगीं। समिति में अध्यक्ष, सचिव, दो उपाध्यक्ष, दो गो-सेवक (आयोग द्वारा मनोनीत) सदस्य के रूप में होंगे। कहा कि यह प्रस्ताव आयोग की ओर से सरकार को भेजा गया था, जिसे सरकार ने मंजूरी दे दी है। यह गो-संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय है। -- समितियों का स्वरूप: अध्यक्ष-जिलाधिकारी दो उपाध्यक्ष-एसएसपी, मुख्य विकास अधिकारी सचिव-मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी दो सदस्य-गो-सेवा आयोग द्वारा मनोनीत -- सहायता के लिए समिति से करें संपर्क आयोग के अध्यक्ष रावत ने बताया कि कि यदि किसी भी जिले में गोवंश अपराध की शिकायत मिलती है तो इसकी सूचना सीधे समिति के सदस्यों को दें। इस पर समिति पुलिस के साथ संयुक्त अभियान चलाकर कार्रवाई करेगी। कहीं गोवंश जख्मी या लावारिस हालत में पड़ा हो तो इसकी सूचना मिलने पर भी समिति द्वारा उस गोवंश के निकटतम कांजी हाउस या गो-सदन में रहने के इंतजाम किए जाएंगे। -- ठंडे बस्ते में था मामला: आयोग की ओर से यह प्रस्ताव करीब डेढ़ वर्ष पहले शासन को भेजा गया था, लेकिन इस पर निर्णय नहीं लिया गया। अक्टूबर में तो यह प्रस्ताव वापस भेजने की चर्चाएं भी आम थीं। लेकिन, आयोग के अध्यक्ष रावत द्वारा इस प्रस्ताव की मजबूत पैरवी की गई थी।

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