Happy Mothers Day 2021: हर मन कर रहा मां को नमन, जानिए दून की इन बेटियों की कहानी

शुक्रिया मां जो तुम हमें दुनिया में लाईं। हे मां तुमने हमें जन्म दिया, उंगली पकड़कर चलना सिखाया।

शुक्रिया मां जो तुम हमें दुनिया में लाईं। हे मां तुमने हमें जन्म दिया उंगली पकड़कर चलना सिखाया अब हमारी बारी है कि हम आपके लिए कुछ करें। परिवार को चलाने और संस्कारवान बनाने में मां का अहम योगदान रहता है।

Sumit KumarSun, 09 May 2021 10:30 AM (IST)

जागरण संवाददाता, देहरादून Happy Mother's Day 2021: शुक्रिया मां जो तुम हमें दुनिया में लाईं। हे मां तुमने हमें जन्म दिया, उंगली पकड़कर चलना सिखाया, अब हमारी बारी है कि हम आपके लिए कुछ करें। परिवार को चलाने और संस्कारवान बनाने में मां का अहम योगदान रहता है। मां अपने बच्चे को सफल बनाने के लिए तमाम संघर्ष करती है और जब बच्चे सफलता की ओर बढऩे लगते हैं तो मां के लिए यह खुशी शब्दों मेनहीं की जा सकती। 

देहरादून की कई ऐसी महिलाएं हैं, जो अपनी मां से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ीं, अपने पैरों पर खड़ी हुईं और अब मां की सेवा कर रही हैं। जानते हैं ऐसी ही कुछ बेटियों की कहानी...

मेरे जीवन की छाया थी मां

मनबीर कौर चेरिटेबल ट्रस्ट की संस्‍थापक रमनप्रीत कौर का कहना है कि दुनियां में मां से बड़ी सहेली और कोई भी नहीं हो सकती। जब भी मातृ दिवस आता है, मैं उन्हें बहुत याद करती हूं।

मां के बिना जीवन सूना है। मां एक वृक्ष की तरह होती हैं जो खुद धूप में रहकर संतान के लिए छाया देती है। मैंने अपने जीवन में अपनी मां मनबीर कौर को अपनी प्रेरणास्रोत माना है। वर्ष 2002 में उनके चले जाने के बाद मुझे ऐसा लगा कि सब कुछ खत्म हो गया। अब जब भी परेशान होती हूं, मुझे उनकी याद आती है, लेकिन उनकी बातें हिम्मत देती हैं। आज मैं जो कुछ भी हूं, उनकी ही बदौलत हूं। हैंडीकैप होने के बाद भी वह मुझे आगे बढ़ाने के लिए ओएनजीसी में सेवा देती रहीं। उन्होंने मुझे संघर्ष के साथ आगे बढऩे और जरूरतमंदों को मदद करने की प्रेरणा दी। इसलिए तीन महीने पहले मैंने मनबीर कौर चेरिटेबल ट्रस्ट बनाया और दिव्यांग व जरूरतमंदों की मदद शुरू की। जब मैं किसी की मदद करती हूं तो लगता है कि मां की सेवा कर रही हूं। 

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हिम्मत वाली मां ने सिखाई निडरता

डीएल रोड निवासी आरती शर्मा बताती हैं कि हर मां अपने विवेक के अनुसार अपनी संतान में ईमानदारी, साहस, निडरता, परोपकार, न्यायप्रियता व परिश्रम इत्यादि के बीज बचपन में ही बो देती है। बड़ा होने पर यही आदर्श उस बच्चे के व्यक्तित्व की पहचान बनते हैं। उसका जीवन भर साथ देते हैं।

उस समय मेरी उम्र तकरीबन आठ वर्ष की रही होगी, मेरी मां रानी शर्मा पढ़ाई के लिए सख्त थीं। मैं गलती करती थी, लेकिन मां ने उस दिन मुझे किसी का उदाहरण देते हुए परिणाम के बारे में बताया। इसके बाद मैंने पढ़ाई में मन लगाकर आगे बढऩा शुरू किया। विपरीत परिस्थिति में संघर्ष करते हुए आगे बढ़कर हमें भी इस काबिल बनाया कि आज मैं डांस एकेडमी, योगा सेंटर और प्ले ग्रुप स्कूल चला रही हूं। यहां जरूरतमंद बच्चों को कम फीस पर प्रवेश दिया जाता है। आज जब किसी काम में अटक जाती हूं तो मां को याद करती हूं और काम बन जाता है। मां ने मुझे निडरता व हिम्मत से काम लेने का पाठ पढ़ाया। यह मेरे जीवन में बहुत काम आया है।

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