Happy Friendship Day 2021: देहरादून के इन टूरिस्ट स्पाट में आप दोस्तों संग कर सकते हैं क्वालिटी टाइम स्‍पेंड, जानिए इनके बारे में

Happy Friendship Day 2021 दोस्ती दो लोगों के बीच इक मजबूत डोरी है दोस्तों के बिना जिंदगी अधूरी है...ये लाइनें बिल्कुल सही हैं क्योंकि जिंदगी जीने के असल मायने दोस्त ही तो बताते हैं। देहरादून में कई टूरिस्ट स्पाट हैं जहां आप दोस्तों संग क्वालिटी टाइम स्पेंड कर सकते हैं।

Sunil NegiSat, 31 Jul 2021 03:50 PM (IST)
देहरादून के इन टूरिस्ट स्पाट में आप दोस्तों संग कर सकते हैं क्वालिटी टाइम स्‍पेंड, जानिए इनके बारे में।

जागरण संवाददाता, देहरादून। Happy Friendship Day 2021 दोस्ती दो लोगों के बीच इक मजबूत डोरी है, दोस्तों के बिना जिंदगी अधूरी है...ये लाइनें बिल्कुल सही हैं, क्योंकि जिंदगी जीने के असल मायने दोस्त ही तो बताते हैं। दिनभर की थकान हो या भागदौड़ भरी जिंदगी की टेंशन...दोस्तों के साथ बात करने और घूमने से वो उड़न छू हो जाती है। दोस्ती है ही एक खास रिश्ता, जो हर तकलीफ को भुला, जिंदगी जीने का असल मतलब समझाती है। देहरादून में आनंद वन, देहरादून जू आदि ऐसे टूरिस्ट स्पाट हैं जहां आप दोस्तों संग न सिर्फ क्वालिटी टाइम स्पेंड कर सकते हैं, बल्कि उस वक्त को बेहद खास भी बना सकते हैं। इस रविवार को फ्रेंडशिप- डे मनाया जाएगा, ऐसे में आप भी देहरादून के इन जगहों पर कोविड- गाइडलाइन का पालन कर इस दिन को मना सकते हैं।

आनंद वन

देहरादून से तकरीबन 15 किलोमीटर विकासनगर रोड पर आनंद वन स्थित है। आनंद वन में औषधीय पौधों की वाटिका, सीता वाटिका, नवगृह वाटिका, नक्षत्र वाटिका, वसुधारा, जल प्रपात, ट्री हट, वेट लैंड, साइक्लिंग ट्रेल, आनंदी बुग्याल आदि का लुत्फ लिया जा सकता है।

देहरादून जू

देहरादून से तकरीबन आठ किलोमीटर मसूरी रोड पर देहरादून-जू हर किसी को भाता है। यहां दो सींग वाले हिरण, मोर, गुलदार, उल्लू, मगरमच्छ, और विभिन्न प्रजातियों की चिड़ि‍या देखने को मिल सकती है। यहां आने वाले सभी प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग की तरह प्रतीत होता हैं। यहा की सुंदरता समय बिताने के लिए बहुत ही अनमोल है। वनस्पतियों और जीवों से समृद्ध यह स्थान शहर के व्यस्त जीवन से दूर रहने और आराम करने के लिए एक शानदार पर्यटक स्थल है। यह फोटोग्राफी, पिकनिक, शांत वातावरण और दर्शनीय स्थलों के लिए बहुत खास माना जाता है। यहां पर सुबह 10 बजे से शाम छह बजे तक प्रवेश मिल सकता है। 

टपकेश्वर मंदिर

शहर के केंद्र से लगभग सात किलोमीटर की दूरी पर गढ़ी कैंट में स्थित ऐतिहासिक टपकेश्वर मंदिर है। भगवान शिव को समर्पित टपकेश्वर मंदिर एक गुफा मंदिर हैं और यह मंदिर पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता हैं। यह श्रद्धेय मंदिर तमसा नदी के किनारे स्थित है जो कि इसे एक अद्वितीय पवित्रता प्रदान करता है। मंदिर शिव लिंग मंदिर के मुख्य परिसर में निहित है और शिवलिंग पर लगातार छत से पानी टपकते रहता है जिसे देखने के लिए लोगो की लम्बी भीड़ लगी रहती हैं। माना जाता हैं की इस गुफा को गुरु द्रोणाचार्य ने बसाया था जो द्रोण गुफा के नाम से भी प्रसिद्ध है। यहां ब्रह्मुहूर्त से शाम साढ़े छह बजे होने वाली आरती तक जलाभिषेक और दर्शन किए जा सकते हैं।

इन जगहों पर जाना फिलहाल प्रतिबंधित

देहरादून में काफी पर्यटक स्थल हैं, जहां परिवार दोस्तों के साथ इन्जॉय किया जा सकता है। हालांकि कोरोनाकाल के चलते आम जनता के लिए यहां प्रवेश निषेध है। सहस्रधारा देहरादून में स्थित एक खूबसूरत पर्यटक स्थल है। जो देहरादून शहर से लगभग 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। इस स्थान पर झरने, गुफाएं, हैं। यह स्थान उन झरनों और गुफाओं के लिए भी जाना जाता हैं जिनमे पानी चूना पत्थर के स्टैलेक्टाइट्स से टपकता है। यह स्थान आकर्षित फोटोग्राफी, धार्मिक स्थल और पर्यटकों की पसंदीदा जगहों के लिए जाना जाता हैं। सहस्रधारा में कोई प्रवेश शुल्क नही लगता हैं और सूर्योदय से सूर्यास्त तक सभी दिन यह खुला रहता हैं।

प्राचीन रॉबर्स केव

शहर के लगभग 9 किलोमीटर की दूरी पर स्थित रॉबर्स गुफा एक प्राचीन अद्भुत गुफा है जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। 600 मीटर लंबी नदी की गुफा को यहां के स्थानीय लोग गुच्चुपानी के नाम से भी जानते हैं। रॉबर्स गुफा को दो मुख्य भागों में विभाजित किया गया है। जिसकी उच्चतम गिरावट 10 मीटर लंबी आंकी गयी है। रॉबर्स गुफा अपनी अनूठी प्राकृतिक घटनाओं के लिए जाना जाता है। माना जाता है कि इस स्थान का उपयोग ब्रिटिश राज्य के दौरान लुटेरे छुपने के लिए भी करते थे।

एफआरआइ

देहरादून-चकराता मोटर-योग्य मार्ग पर स्थित यह संस्थान भारत में सबसे बड़ा फॉरेस्ट-बेस प्रशिक्षण संस्थान है। अधिकांश वन अधिकारी इसी संस्थान से आते हैं। एफआरआई का भवन बहुत शानदार है तथा इसमें एक बॉटनिकल म्यूजियम भी है। इसकी स्थापना 1906 में इंपीरियल फोरेस्ट इंस्टीट्यूट के रूप में की गई थी। यह इंडियन काउंसिल ऑफ फोरेस्ट रिसर्च एंड एडूकेशन के अंतर्गत एक प्रमुख संस्थान है। इसकी शैली ग्रीक-रोमन वास्तुकला है। भवन का उद्घघाटन 1921 में किया गया था और यह वन शोध के क्षेत्र में प्रसिद्ध है। एशिया में अपनी तरह के इकलौते संस्थान के रूप में यह दुनिया भर में प्रख्यात है। 2000 एकड़ में फैला एफआरआई का डिजाइन विलियम लुटयंस द्वारा किया गया था। इसमें 7 संग्रहालय हैं और तिब्बत से लेकर सिंगापुर तक सभी तरह के पेड़-पौधे यहां पर हैं। हालांकि कोरोना के चलते फिलहाल यहां आम लोग के लिए प्रवेश प्रतिबंध है।

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