उत्पादन घटने से मिल रहा सेब का अच्छा भाव

चंदराम राजगुरु चकराता (देहरादून) बागवानी के लिए मशहूर जौनसार-बावर (देहरादून) के ऊंचे इलाकों में सेब उत्पादन घटने पर बेहतर दाम मिल रहा है।

JagranFri, 06 Aug 2021 01:41 AM (IST)
उत्पादन घटने से मिल रहा सेब का अच्छा भाव

चंदराम राजगुरु, चकराता (देहरादून)

बागवानी के लिए मशहूर जौनसार-बावर (देहरादून) के ऊंचे इलाकों में सेब बगीचों से फल तोड़ने का कार्य तेजी से चल रहा है। साथ ही सीजन के शुरुआती चरण में ही सेब की स्पर व रायल डिलीशियस फसल मंडी पहुंचनी शुरू हो गई। इस बार मंडी में सेब के अच्छे दाम मिलने से बागवानों की एक पेटी दो से चार हजार रुपये में बिक जा रही है।

जनजातीय क्षेत्र जौनसार-बावर की सीमांत त्यूणी व चकराता तहसील के ऊंचाई वाले इलाकों में सेब के सैकड़ों बगीचे हैं। सरकार ने भी बागवानी को बढ़ावा देने के लिए प्रखंड से जुड़े चौसाल, त्यूणी, कोटी-कनासर व चकराता में चार राजकीय उद्यान सचल केंद्र खोले हैं। इनसे जुड़े क्षेत्र के 11947 बागवान विभाग में पंजीकृत है। प्रगतिशील बागवान सीताराम नौटियाल, पूरणचंद राणा, पूरण सिंह चौहान, महेंद्र चौहान व नरेंद्र राणा ने कहा इस बार सेब बागवानी के लिए मौसम अनुकूल नहीं रहने से उत्पादन में लगभग 50 फीसद की गिरावट आई। अप्रैल-मई में तूफान व ओलावृष्टि से सेब उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। मौसम की मार से सबसे अधिक प्रभावित शिलगांव, बावर व देवघार क्षेत्र में सेब की पैदावार कम हुई। क्षेत्र में इन दिनों सेब तोड़ने का कार्य चल रहा है।

सेब लेकर साहिबाबाद मंडी गए त्यूना निवासी प्रगतिशील बागवान सीताराम नौटियाल ने बताया कि उनके बगीचे से निकली स्पर प्रजाति के सेब की पेटी मंडी में चार से साढ़े चार हजार रुपये में बिकी। जबकि, पिछली बार देहरादून-दिल्ली और अन्य मंडियों में सेब पेटी का भाव डेढ़ से ढाई हजार रुपये के बीच था। मंडी में सेब की अच्छी क्वालिटी के उचित रेट मिलने से ग्रामीण बागवानों को अच्छा मुनाफा हो रहा है। सीताराम के त्यूना गांव में लगे सेब बगीचे में स्पर के 400 और रायल डिलीशियस के करीब 1200 पेड़ हैं। इनसे इस बार एक हजार से अधिक सेब बाक्स निकलने का अनुमान है। बगीचे से 200 पेटी सेब की छंटाई कर मंडी में अच्छे भाव बिकी।

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ग्रामीण बागवानों को बंट रहे 40 हजार बाक्स

मुख्य उद्यान अधिकारी डा. मीनाक्षी जोशी ने कहा कि जौनसार-बावर के ऊंचे इलाकों में सेब तुड़ान शुरू होने से विभाग ने बागवानों की सुविधा के लिए अच्छी क्वालिटी की 40 हजार पेटियां व ट्रेन उपलब्ध कराई है। बागवानों को बजार से आधी कीमत पर सेब बाक्स बाटने का कार्य चकराता, कोटी-कनासर, त्यूणी व चौसाल स्थित सचल केंद्र कर रहे हैं। विभाग की ओर से सेब की छंटाई को तीन नई ग्रेडिग मशीन उपलब्ध कराई जा रही हैं। बीते वर्ष पांच ग्रेडिग मशीन उपलब्ध कराई गई थी।

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स्पर व रायल डिलीशियस की पैदावार अधिक

उद्यान सचल केंद्र चकराता के एडीओ चंदराम नौटियाल, कोटी-कनासर के एडीओ धीरेंद्र चौधरी व त्यूणी-चौसाल केंद्र के प्रभारी एडीओ पप्पन यादव ने बताया कि क्षेत्र में अधिकांश बागवान स्पर, रायल डिलीशियस व रेड डिलीशियस सेब का उत्पादन कर रहे हैं। सेब की अच्छी पैदावार को बागवान विभाग की मदद से पहले बीजू पौधा तैयार करते हैं। फिर ग्राफ्टिंग (सील्डिंग) की जाती है। सील्डिंग से तैयार पेड़ चार से पांच साल में फल देना शुरू कर देता है। रायल डिलीशियस पांच से छह साल में फल देने लगता है।

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