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पहाड़ों में बारिश से बढ़ने लगा गंगा का जलस्तर

जागरण संवाददाता, ऋषिकेश :

मानसून शुरू होने के बाद अब नदियों के जलस्तर में भी वृद्धि होने लगी है। पहाड़ों में हुई बारिश के बाद गंगा के जलस्तर में भी लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। शनिवार को ऋषिकेश में गंगा का अधिकतम जलस्तर 338.27 मीटर पर रहा। हालांकि अभी गंगा का जलस्तर चेतावनी रेखा से एक मीटर से भी नीचे बना हुआ है।

पिछले कुछ दिनों से पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में लगातार बारिश हो रही है। पिछले तीन दिनों से तो सभी जगह बारिश हुई है। जिससे नदी-नालों में जलस्तर बढ़ने लगा है। ऋषिकेश में गंगा के जलस्तर में भी लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। गंगा के बढ़ते जलस्तर से यहां ऋषिकेश, मुनिकीरेती व स्वर्गाश्रम क्षेत्र में पक्के घाट पानी में डूबने लगे हैं। त्रिवेणी घाट पर गंगा का पानी सीढि़यों पर आ गया है। यहां गंगा के बीच में बनने वाला टापू अभी डूबा तो नहीं मगर, अब इसका कम हिस्सा ही अब पानी से बाहर रह गया है।

उधर, ऋषिकेश से आगे निचले हिस्सों में भी गंगा का पानी किनारों में विस्तार लेने लगा है। हालांकि आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले सप्ताह रविवार को ही गंगा का जलस्तर इस सत्र में सबसे उच्चतम स्तर 338.60 मीटर तक पहुंचा है। जबकि इसके बाद से जलस्तर 338.27 मीटर या कभी-कभी इससे पांच से दस सेंटीमीटर तक ऊपर-नीचे ही गया है। शनिवार को भी गंगा का अधिकतम जलस्तर 338.27 मीटर पर रहा। ऋषिकेश में गंगा का चेतावनी निशान 339.50 मीटर पर जबकि खतरे का निशान 340.50 मीटर पर है। यानी अभी यहां गंगा चेतावनी रेखा से एक मीटर से भी नीचे बह रही है। मगर, यदि पर्वतीय क्षेत्रों और गंगा घाटी में बारिश जारी रही तो आने वाले समय में गंगा का जलस्तर और भी बढ़ सकता है। लगातार हो रही बारिश से ऋषिकेश व आसपास क्षेत्र में बहने वाली छोटी नदियां और नालों में भी जलस्तर में वृद्धि होने लगी है। कई बरसाती नदी नालों में भी पानी आ गया है। चंद्रभागा नदी, खारा स्त्रोत, बीन नदी, बंगाला नाला, ग्वेला नाला, सुसवा व सौंग नदी में भी पानी का स्तर बढ़ गया है।

इस सप्ताह एक बार हुई फ्लेसिग

गंगा में बढ़ रहे जलस्तर के साथ सिल्ट की मात्रा भी बढ़ने लगी है। हालांकि अभी तक गंगा में सिल्ट (पीपीएम) का सामान्य औसत 960 से 980 के बीच बना हुआ है। जबकि गंगा का डिस्चार्ज भी शनिवार को 1372 क्यूमेक्स था। गंगा से जुड़ी चीला जल विद्युत परियोजना में इस सप्ताह में अभी तक सिर्फ एक बार ही सिल्ट निकालने के लिए फ्लेसिग की जरूरत पड़ी। बीते गुरुवार को बैराज में चार घंटे की फ्लेसिग के चलते कुछ समय के लिए चीला में विद्युत उत्पादन बंद रहा।

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