उत्‍तराखंड में अगले सत्र की शुरुआत में मिलेंगी मुफ्त पुस्तकें, पुस्तकों की छपाई को निविदा आमंत्रित करने को दी मंजूरी

अगले सत्र की शुरुआत में कक्षा एक से 12वीं तक छात्र-छात्राओं को मुफ्त पुस्‍तकें मिलेंगी। पुस्तकों की छपाई के लिए निविदा आमंत्रित करने को शिक्षा सचिव ने मंजूरी दी। बता दें कि सरकार ने अगले सत्र में मुफ्त पुस्तकें मुहैया कराने का निर्णय किया है।

Sunil NegiFri, 24 Sep 2021 11:15 AM (IST)
अगले शैक्षिक सत्र की शुरुआत में ही राज्य में कक्षा एक से 12वीं तक छात्र-छात्राओं को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध होंगी।

राज्य ब्यूरो, देहरादून। अगले शैक्षिक सत्र 2022-23 की शुरुआत में ही राज्य में कक्षा एक से 12वीं तक छात्र-छात्राओं को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध होंगी। शिक्षा सचिव राधिका झा ने निविदा आमंत्रित कर पुस्तकों की छपाई कराने को मंजूरी दे दी है। राज्य में बीते तीन वर्षों से सरकारी, सहायताप्राप्त शिक्षण संस्थाओं में कक्षा एक से 12वीं तक अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को पाठ्यपुस्तकें नहीं मिली हैं। मुफ्त पुस्तकें देने के स्थान पर छात्र-छात्राओं के खातों में पुस्तकों की धनराशि जारी की गई है। चालू शैक्षिक सत्र में ही भी यही प्रक्रिया दोहराई गई है। हालांकि पुस्तकें उपलब्ध नहीं होने से कोरोना काल में स्कूल बंदी के दौरान छात्र-छात्राओं को मुश्किलों से जूझना पड़ा है।

निविदा में बरती जाएगी पारदर्शिता

सरकार ने अगले सत्र में मुफ्त पुस्तकें मुहैया कराने का निर्णय किया है। कक्षा एक से आठवीं तक सभी छात्र-छात्राओं और नौवीं से 12वीं तक सभी छात्राओं के साथ ही अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के छात्रों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें दी जाती हैं। शिक्षा सचिव ने बताया कि निविदा प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरतने और इसमें अधिक व्यक्तियों की भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। निविदा में उत्तराखंड अधिप्राप्ति नियमावली-2017 व संशोधित प्रविधानों को ध्यान में रखने को कहा गया है।

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खराब गुणवत्ता पर एक साल से पहले निरस्त होगी निविदा

निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित फर्म सभी निर्धारित शर्तें व गुणवत्ता संबंधी मानक पूर्ण करेंगी। गुणवत्ता में कमी दिखने पर परीक्षण कर एक वर्ष के पहले ही निविदा निरस्त की जाएगी। मुफ्त पुस्तकें समय पर उपलब्ध हों, इसके लिए सभी खंड शिक्षा अधिकारियों, जिला शिक्षा अधिकारियों व मुख्य शिक्षा अधिकारियों को समय सारिणी बनाकर कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। देरी होने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

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