उत्तराखंड में 30 अप्रैल तक बढ़ सकता है पांचवें राज्य वित्त आयोग का कार्यकाल

उत्तराखंड में 30 अप्रैल तक बढ़ सकता है पांचवें राज्य वित्त आयोग का कार्यकाल।

राज्य के संसाधनों में शहरी निकायों और त्रिस्तरीय पंचायतों की हिस्सेदारी तय करने में जुटा पांचवां राज्य वित्त आयोग का कार्यकाल 30 अप्रैल तक बढ़ाया जा सकता है। इस संक्षिप्त अवधि में आयोग के सामने रिपोर्ट तैयार करने की बड़ी चुनौती होगी।

Raksha PanthriTue, 13 Apr 2021 02:37 PM (IST)

राज्य ब्यूरो, देहरादून। राज्य के संसाधनों में शहरी निकायों और त्रिस्तरीय पंचायतों की हिस्सेदारी तय करने में जुटा पांचवां राज्य वित्त आयोग का कार्यकाल 30 अप्रैल तक बढ़ाया जा सकता है। इस संक्षिप्त अवधि में आयोग के सामने रिपोर्ट तैयार करने की बड़ी चुनौती होगी। पांचवें राज्य वित्त आयोग को बीते एक अप्रैल, से प्रारंभ हो चुके वित्तीय वर्ष समेत पांच वित्तीय वर्ष की अवधि के लिए रिपोर्ट सरकार को सौंपनी है। इस रिपोर्ट के आधार पर राज्य के संसाधनों में शहरी निकायों और त्रिस्तरीय पंचायतों की हिस्सेदारी तय की जाएगी। कोरोना महामारी के चलते पिछले वित्तीय वर्ष 2020-21 में आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार नहीं कर सका। आयोग की ओर से अभी तक जन सुनवाई के लिए सिर्फ चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों में ही बैठक हुई हैं।

सिर्फ दो जिलों में हुई जन सुनवाई

कोविड-19 प्रोटोकाल का पालन करते हुए बीते नवंबर माह से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिलेवार सुनवाई का कार्यक्रम तय किया गया था। आयोग अध्यक्ष व पूर्व मुख्य सचिव इंदु कुमार पांडे के कोरोना संक्रमित होने की वजह से सुनवाई कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा था। जिलों के शहरी निकायों और त्रिस्तरीय पंचायतों के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ बैठकों में उनसे फीडबैक लिया जाना है। 

शहरी निकायों के मामले में अधिशासी अधिकारी, जिला पंचायतों में अपर मुख्य अधिकारी और क्षेत्र-ग्राम पंचायतों में जिला पंचायतीराज अधिकारी को अपने-अपने निकायों के प्रतिनिधियों और अधिकारियों की बैठक में भागीदारी होती है। 

जून तक कार्यकाल बढ़ाने की पैरवी

प्रदेश सरकार अब तक दो बार आयोग का कार्यकाल बढ़ा चुकी है। फिलवक्त आयोग का कार्यकाल बीती 15 मार्च तक बढ़ाया गया था। हालांकि जिलेवार होने वाली बैठकों के मद्देनजर आयोग का कार्यकाल आगामी जून माह तक बढ़ाने की पैरवी की जा रही है। फिलहाल इस प्रस्ताव को सरकार से मंजूरी नहीं मिली है। अलबत्ता आयोग का कार्यकाल 30 अप्रैल तक बढ़ाने के प्रस्ताव पर मंथन चल रहा है। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक जल्द इस पर फैसला हो सकता है। 

निकायों-पंचायतों को रिपोर्ट का इंतजार

आयोग को कार्यकाल 30 अप्रैल से आगे नहीं बढ़ने की स्थिति में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी। हालांकि कम अवधि में शेष 11 जिलों से फीडबैक लेने की चुनौती आयोग के सामने होगी। प्रदेश में 13 जिलों में 90 शहरी निकायों में आठ नगर निगम, 41 नगर पालिका परिषद और 41 नगर पंचायतें हैं। इन निकायों और पंचायतों को अपनी माली हालत सुधारने और राज्य के राजस्व में उनकी हिस्सेदारी तय करने के लिए आयोग की रिपोर्ट का इंतजार है। आयोग की रिपोर्ट में जितनी देरी होगी, निकायों और पंचायतों की बेचैनी बढ़ना तय है। 

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