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Earthquake: दिल्ली में छोटे भूकंप स्वाभाविक, पर दो माह के अंतराल में 10 बार भूकंप सामान्य नहीं

देहरादून, सुमन सेमवाल। दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में छोटे-छोटे भूकंप आना स्वाभाविक है, लेकिन दो माह के अंतराल में ही 10 भूकंप (4.6 मैग्नीट्यूट तक के) रिकॉर्ड किया जाना सामान्य बात नहीं। यही वजह है कि वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान ने दिल्ली के उन फॉल्ट के अध्ययन का निर्णय लिया है, जहां से भूकंपीय ऊर्जा बाहर निकल रही है। इसके लिए संस्थान के निदेशक डॉ. कालाचांद साई ने एक अध्ययन दल गठित किया है। इसे जल्द दिल्ली भेजा जाएगा। 

वाडिया संस्थान के वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. सुशील कुमार का कहना है कि दिल्ली में आ रहे छोटे भूकंप स्थानीय फॉल्ट से संबंधित हैं। यहां हिमालय की ऐतिहासिक फॉल्ट लाइन हिमालयन फ्रंटल थ्रस्ट, मेन बाउंड्री थ्रस्ट, मेन सेंट्रल थ्रस्ट जैसा खतरा नहीं है, क्योंकि यहां स्थानीय फॉल्ट पर आधारित छोटे भूकंप आते रहते हैं। मगर, थोड़ा असमान्य बात यह जरूर है कि कम अंतराल में अधिक भूकंप रिकॉर्ड किए जा रहे हैं। डॉ. सुशील कुमार ने बताया कि दिल्ली के भूकंप यमुना के पूरब में आ रहे हैं। इनका संबंध ग्रेट बाउंड्री फॉल्ट, दिल्ली-हरिद्वार, सोहाना फॉल्ट, महेंद्रगढ़-देहरादून फॉल्ट आदि से है। इनसे छोटे भूकंप के रूप में ऊर्जा बाहर निकलती रहती है। 

इतिहास की भी बात करें तो दिल्ली में वर्ष 1956 में सर्वाधिक 6.7 मैग्नीट्यूट का ही भूकंप अब तक आया है। इसके अलावा पांच रिक्टर स्केल से कम तीव्रता के भूकंप दिल्ली क्षेत्र में आते रहते हैं। यहां के फॉल्ट में उच्च तीव्रता के भूकंप की क्षमता नहीं है, लिहाजा यह माना जा सकता है कि छोटे भूकंप के रूप में भूगर्भ में जमा ऊर्जा बाहर निकलती रहती है। फिर भी इसकी पुष्टि के लिए संस्थान के निदेशक के निर्देश पर विस्तृत अध्ययन कराया जाएगा। इसके तहत विभिन्न फॉल्ट की स्थिति का आकलन किया जाएगा। इस काम में दो से तीन महीने लग सकते हैं। 

दिल्ली में आए सर्वाधिक तीव्रता के भूकंप

वर्ष 1720, 6.5 मैग्नीट्यूड

वर्ष 1956, 6.7 मैग्नीट्यूड

वर्ष 1960, 06 मैग्नीट्यूड

वर्ष 1966, 5.8 मैग्नीट्यूड

आज की स्थिति में 6.7 तीव्रता का भूकंप खतरनाक

वाडिया संस्थान के निदेशक डॉ. कालाचांद साई ने बताया कि अगर आज वर्ष 1956 की तरह सर्वाधिक 6.7 मैग्नीट्यूट क्षमता का भूकंप आया तो स्थिति खतरनाक हो सकती है, क्योंकि सबसे पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि यहां के भवन इस क्षमता के हिसाब से बने हैं या नहीं। इस समय सर्वाधिक तीव्रता का भूकंप 4.6 मैग्नीट्यूट का था। यदि यह एक मैग्नीट्यूड बढ़कर 5.6 पर आएगा तो 4.6 की तुलना में 32 गुना ऊर्जा बाहर निकलेगी। इसी तरह इसमें एक मैग्नीट्यूड का और इजाफा हुआ तो निकलने वाली ऊर्जा 5.6 की तुलना में करीब एक हजार गुना हो जाएगी।

उत्तराखंड के बाद सबसे अधिक डोलती है दिल्ली की धरती

वाडिया संस्थान के वरिष्ठ विज्ञान डॉ. सुशील कुमार ने बताया कि वर्ष 2007 से 2017 के बीच कराए गए एक अध्ययन में यह पता चला था कि दिल्ली में उत्तराखंड के बाद सबसे अधिक भूकंप आते हैं। मगर, यह भूकंप उत्तराखंड जितनी तीव्रता के नहीं होते हैं। इस अध्ययन में उत्तराखंड, दिल्ली, हिमाचल व जम्मू कश्मीर को ए, बी, सी व डी ब्लॉक (हर ब्लॉक में चार क्षेत्र) में बांटा गया था।

ए में जम्मू एंड कश्मीर व हिमाचल प्रदेश (उत्तर-पूरब), बी में हिमाचल प्रदेश के शिमला क्षेत्र, सी में उत्तराखंड के गढ़वाल व कुमाऊं मंडल के अधिकांश भाग व डी में दिल्ली (एनसीआर) क्षेत्र को रखा गया। पता चला था कि पूरे क्षेत्र में सर्वाधिक 28.8 बार भूकंप सी कैटेगरी में गढ़वाल व कुमाऊं क्षेत्र में आए हैं। इसके बाद डी कैटेगरी वाले दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में 26.7 बार भूकंप के झटके आए। 

क्षेत्रवार रिकॉर्ड किए गए भूकंप (2007 से 2017 के बीच)

    सी,       डी,       ए,         बी

सी 1, 36, डी 1, 08, ए 1, 33, बी 1,17

सी 2, 19, डी 2, 11, ए 2, 14, बी 2,07

सी 3, 22, डी 3, 20, ए 3, 40, बी 3,26

सी 4, 05, डी 4, 37, ए 4, 06, बी 4,04

कुल   82,       76,      73,      57

उच्च तीव्रता के भूकंप दिल्ली में नहीं

कैटेगरी सी में 12 बार, ए में 06 बार व बी बैटेगरी में 04 बार उच्च तीव्रता (4.2 से 5.8 मैग्नीट्यूट) के भूकंप रिकॉर्ड किए गए।

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वाडिया समेत इन एजेंसियों के डाटा से अध्ययन

वाडिया संस्थान ने अपने 54 ब्रॉडबैंड सिस्मिक स्टेशन के अलावा इंटरनेशनल सिस्मोलॉजिकल सेंटर (आइएससी), इंडियन मीट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट (आइएमडी) से डाटा जुटाकर यह अध्ययन किया। भूकंप के अध्ययन में आफ्टर शॉक की संख्या को रिकॉर्ड नहीं किया गया है।

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