बुजुर्गों का नहीं पहले युवाओं का होना चाहिए था टीकाकरण, जानें- और क्या कहते हैं वरिष्ठ फिजीशियन बिष्ट

बुजुर्गों का नहीं पहले युवाओं का होना चाहिए था टीकाकरण।

DR Sugestions on Coronavirus मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के चिकित्सक और जिला चिकित्सालय (कोरोनेशन अस्पताल) के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एनएस बिष्ट का मानना है कि कोरोना की थ्योरी समझने में कहीं न कहीं भूल हुई है। न्होंने कहा कि वैक्सीन पहले बुजुर्गों को नहीं बल्कि युवाओं को लगानी चाहिए थी।

Raksha PanthriThu, 06 May 2021 09:23 PM (IST)

जागरण संवाददाता, देहरादून। DR Sugestions on Coronavirus मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के चिकित्सक और जिला चिकित्सालय (कोरोनेशन अस्पताल) के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एनएस बिष्ट का मानना है कि कोरोना की थ्योरी समझने में कहीं न कहीं भूल हुई है। उन्होंने कहा कि वैक्सीन पहले बुजुर्गों को नहीं बल्कि युवाओं को लगानी चाहिए थी। वैक्सीन की मियाद पर भी उन्होंने सवाल उठाए हैं। डॉ. बिष्ट ने कहा कि तीसरी लहर आने से पहले बुजुर्गों को एक बूस्टर डोज की जरूरत है।

डॉ. बिष्ट ने एक वीडियो जारी कर कहा कि कोरोना की पहली लहर को लगभग एक वर्ष का समय लगा। यह छह माह में अपने पीक पर पहुंची और अगले छह माह ढलान पर रही। गत वर्ष नवंबर से लेकर इस साल शुरुआत तक मामलों में काफी गिरावट आ गई। पर दूसरी लहर बहुत तेजी के साथ पीक पर जाती दिख रही है और इस बार संक्रमितों की संख्या भी बहुत ज्यादा है। वहीं मरने वालों की संख्या भी उसी अनुपात में बढ़ रही है। सवाल ये है कि इतना ज्यादा संक्रमण फैला कैसे। इसका जबाव है कि पहली लहर के कम हो जाने के बाद हम काफी निश्चिंत हो गए थे। 

इसी निश्चिंतता के कारण संक्रमण काफी तेजी से फैला। पर जन सामान्य को दोष देने के बजाए हमें अपनी वैज्ञानिक धारणाओं में बदलाव लाना होगा। उन्होंने कहा कि कोरोना टीकाकरण में सबसे पहले बुजुर्गों को वैक्सीन लगाई गई। उन्हें संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा माना गया। बच्चों भी खतरे की जद में थे पर उनपर संक्रमण उस कदर घातक नहीं दिखा था और न उनके लिए वैक्सीन अभी बनी भी नहीं है। पर हमारी वैज्ञानिक धारणा में कहीं न कहीं कमी है, जिस कारण हम इस महामारी को समझने में भूल कर रहे हैं। 

उनका मानना है कि टीकाकरण आइसोलेशन के आधार पर किया जाना चाहिए था। बेहतर होता कि हम बच्चों और बुजुर्गों को पूरी तरह से आइसोलेट कर पहले युवाओं का टीकाकरण करते, क्योंकि युवा ही बाहर ज्यादा निकलते हैं। ये द्रव्य विज्ञान की तरह है। पानी का बहाव ज्यादा तेज होता है तो वह सबसे पहले बांध की कमजोर दीवार को तोड़ता है। ऐसे में होना ये चाहिए था कि युवाओं को वैक्सीन पहले लगती और बच्चों व बुजुर्गों को घर में रोका जाता। 

सुखद बात ये है कि स्कूल-कॉलेज बंद होने से बच्चे अभी भी काफी हद तक सुरक्षित हैं। डॉ. बिष्ट ने कहा कि कोई भी संक्रमण द्रव्य गति की तरह फैलता है, जहां रुकावट दिखती है, वहां वायरस ठहरता है, म्यूटेंट होता है और दूसरी दिशा की ओर बढ़ता है। अब तीसरी लहर का खतरा है। उनका मानना है कि टीकाकरण नीति में बदलाव लाना होगा। बुजुर्गों को वैक्सीन की बूस्टर डोज की जरूरत है, जबकि बच्चों का भी टीकाकरण जल्द शुरू होना चाहिए।

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