बगैर संबद्धता कॉलेजों को अनुदान नहीं : डॉ धन सिंह

उच्च शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ धन सिंह रावत ने कहा कि बगैर संबद्धता कॉलेजों को अनुदान नहीं मि‍लेगा।

प्रदेश सरकार से अनुदान और संबद्धता केंद्रीय विश्वविद्यालय से इस व्यवस्था को आगे जारी नहीं रहने दिया जाएगा। उच्च शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ धन सिंह रावत ने कहा कि जिन कॉलेजों पर सरकार का नियंत्रण नहीं है उन्हें अनुदान जारी रखने पर विचार नहीं किया जाएगा।

Publish Date:Mon, 30 Nov 2020 10:15 PM (IST) Author: Sunil Negi

राज्य ब्यूरो, देहरादून। प्रदेश सरकार से अनुदान और संबद्धता केंद्रीय विश्वविद्यालय से, इस व्यवस्था को आगे जारी नहीं रहने दिया जाएगा। उच्च शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ धन सिंह रावत ने कहा कि जिन कॉलेजों पर सरकार का नियंत्रण नहीं है, उन्हें अनुदान जारी रखने पर विचार नहीं किया जाएगा। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों को अनुदान देने के संबंध में केंद्र सरकार से अनुरोध किया गया है।

सहायताप्राप्त डिग्री कॉलेजों और सरकार के बीच अनुदान को लेकर खींचतान चल रही है। अंब्रेला एक्ट लागू करने को लाए गए राज्य विश्वविद्यालय विधेयक में सरकार ने उक्त कॉलेजों को अनुदान देने के संबंध में प्रविधान नहीं किया है। कॉलेजों के शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारी इसका विरोध करते हुए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं। वहीं विभागीय मंत्री डॉ रावत ने भी संकेत दे दिए हैं कि उक्त कॉलेजों के रुख में बदलाव के बगैर विश्वविद्यालय विधेयक में संशोधन के आसार नहीं हैं।

प्रदेश में 18 सहायताप्राप्त कॉलेज हैं। इनमें सात को उत्तराखंड राज्य बनने के बाद अनुदान दिया गया है। कुमाऊं मंडल में सात में सिर्फ एक ही चंद्रावती तिवारी डिग्री कॉलेज काशीपुर में है। शेष 11 कॉलेज गढ़वाल मंडल के हैं। हालांकि राज्य बनने से ठीक पहले अविभाजित उत्तर प्रदेश सरकार ने आदेश जारी कर भविष्य में किसी भी डिग्री कॉलेज को अनुदान सूची में शामिल करने और नए विषय स्वीकृत करने पर रोक लगा दी थी। बताया जा रहा है कि उक्त सात कॉलेज राज्य विश्वविद्यालयों के साथ जुडऩे पर सहमति दे चुके हैं।

डॉ धन सिंह रावत ने कहा कि 2009 में अस्तित्व में आए केंद्रीय विश्वविद्यालय के एक्ट में कॉलेजों को अनुदान देने का प्रविधान नहीं है। श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय के एक्ट में भी अनुदान संबंधी प्रविधान नहीं हुए। कुमाऊं विश्वविद्यालय एक्ट में अशासकीय कॉलेजों को वेतन देने की व्यवस्था मौजूदा है। उन्होंने कहा कि जब अनुदान प्राप्त कॉलेज राज्य विश्वविद्यालय से जुडऩे को तैयार नहीं हैं तो उनके लिए अपने प्रस्तावित एक्ट में संशोधन का औचित्य नहीं है। सरकार अनुदान प्राप्त कॉलेजों में नियुक्तियां राज्य लोक सेवा आयोग के माध्यम से कराने के पक्ष में है, ताकि इसमें पारदर्शिता रहे।

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