उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में कुलपति और कुलसचिव में ठनी

उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय का विवादों से नाता नहीं छूट रहा है।

उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय का विवादों से नाता नहीं छूट रहा है। यहां आए दिन कोई नया गड़बड़झाला सामने आ जाता है। कभी भर्तियां कभी खरीद और कभी अन्य किसी कारण विश्वविद्यालय चर्चा में आ जाता है। अब विश्वविद्यालय में एक नया विवाद खड़ा हो गया है।

Sunil NegiSat, 27 Feb 2021 01:05 PM (IST)

जागरण संवाददाता, देहरादून। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय का विवादों से नाता नहीं छूट रहा है। यहां आए दिन कोई नया गड़बड़झाला सामने आ जाता है। कभी भर्तियां, कभी खरीद और कभी अन्य किसी कारण विश्वविद्यालय चर्चा में आ जाता है। अब विश्वविद्यालय में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। यहां कुलपति और कुलसचिव आमने-सामने हो गए हैं।

शुक्रवार को कुलपति डॉ. सुनील जोशी ने ऋषिकुल के द्रव्यगुण विभाग के प्रोफेसर डॉ. सुरेश चौबे से कुलसचिव का अतिरिक्त प्रभार लेने के आदेश किए। इसी आदेश में उन्होंने गुरुकुल परिसर के पंचकर्म विभाग के प्रोफेसर डॉ. उत्तम कुमार शर्मा को कुलसचिव का प्रभार सौंपने को कहा। डॉ. उत्तम कुमार शर्मा अभी परीक्षा नियंत्रक हैं, जिनके बदले अब यह जिम्मेदारी उप कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार गुप्ता को दी गई है।

कुलसचिव ने कुलपति के इस आदेश को मानने व पद छोड़ने से साफ इन्कार कर दिया। बजाए इसके उन्होंने अपने कार्यालय पर ताला लगवा दिया और चाबी भी साथ लेकर चले गए। जिस कारण विवि परिसर में अफरातफरी मची रही। इस पूरे प्रकरण को हाल ही में भर्तियों एवं पदोन्नति में उपजे विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है।

-डॉ. सुनील जोशी (कुलपति, आयुर्वेद विवि) ने कहा कि किसी तरह का कोई विवाद नहीं है। कुलपति को विशेष परिस्थितियों में फेरबदल का पूरा अधिकार है। व्यवस्थाएं बनाने के लिए ही फेरबदल किए गए हैं। शासन को इस विषय से अवगत करा दिया गया है।

-डॉ. सुरेश चौबे, कुलसचिव (आयुर्वेद विवि) ने कहा कि मेरी नियुक्ति शासन से हुई और मुझे हटाने का अधिकार भी शासन को ही है। कुलपति ने एकतरफा आदेश किया है। मेरी ओर से शासन को अवगत करा दिया है। शासन से कार्यभार न छोड़ने के मौखिक निर्देश मिले हैं।

निजी स्कूलों की फीस में कटौती के लिए प्रदर्शन

निजी स्कूलों की मनमानी और फीस बढ़ोत्तरी के खिलाफ आम आदमी सेना के महिला मोर्चा ने शुक्रवार को प्रदर्शन किया। मोर्चा ने राज्य सरकार से निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने और फीस में 50 फीसद की कटौती करने की मांग की। शुक्रवार को अध्यक्ष गुलिस्ता खानम के नेतृत्व में महिला मोर्चा की दर्जनों सदस्य लैंसडौन चौक पर एकत्र हुईं और सरकार व निजी स्कूलों के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान गुलिस्ता ने कहा कि कोरोना के चलते कई लोग अपनी नौकरी खो चुके हैं। कई के व्यापार बंद हो गए। इनकी समस्याओं को समझते हुए सरकार को निजी स्कूलों पर शिकंजा कसकर फीस में कटौती करानी चाहिए। 

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