नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार बोले, उत्तराखंड की परिस्थितियों के अनुरूप नहीं चीड़

नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार ने सीएम त्रिवेंद्र रावत से की मुलाकात।

नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार ने सीएम त्रिवेंद्र के साथ उत्तराखंड से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया। इस दौरान सीएम रावत ने कहा कि राज्य सरकार की परियोजनाओं के लिए केंद्र की परियोजनाओं की तरह ही डीग्रेडेड फोरेस्ट लैंड पर क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण की अनुमति दी जानी चाहिए।

Raksha PanthriSat, 27 Feb 2021 01:01 PM (IST)

राज्य ब्यूरो, देहरादून। नीति आयोग के उपाध्यक्ष डा.राजीव कुमार ने कहा कि चीड़ के पेड़ यहां की परिस्थितियों के अनुरूप नहीं हैं। इन्हें धीरे-धीरे किस प्रकार स्थानीय प्रजाति के वृक्षों से बदला जा सकता है, इसकी योजना बनाई जानी चाहिए। उन्होंने इस संबंध में एफआरआइ (वन अनुसंधान संस्थान) की अध्ययन रिपोर्ट आयोग को उपलब्ध कराने पर जोर दिया। उत्तराखंड दौरे पर आए डा.कुमार ने शनिवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मुलाकात के दौरान यह बात कही। बता दें कि उत्तराखंड के करीब 16 फीसद हिस्से में चीड़ के जंगल हैं। हर साल ही चीड़ के पेड़ों से गिरने वाली करीब 23 लाख मीट्रिक टन पत्तियां (पिरुल) जंगलों में आग के फैलाव का बड़ा कारण बनती हैं। साथ ही चीड़ वनों में पिरुल के कारण अन्य वनस्पतियां नहीं पनप पातीं और वर्षाजल भी भूमि में नहीं समा पाता।

मुख्यमंत्री आवास में हुई मुलाकात के दौरान नीति आयोग के उपाध्यक्ष डा.कुमार और मुख्यमंत्री रावत ने उत्तराखंड से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने केंद्र की भांति राज्य की परियोजनाओं के लिए डिग्रेडेड वन भूमि पर क्षतिपूरक पौधारोपण की अनुमति दिए जाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि राज्य की परियोजनाओं में क्षतिपूरक पौधारोपण के लिए दोगुनी भूमि देनी होती है, जबकि केंद्र की परियोजनाओं के लिए ऐसा नहीं है। मुख्यमंत्री ने फारेस्ट क्लीयरेंस के लिए जरूरी औपचारिकताओं के सरलीकरण पर भी जोर दिया।

नीति आयोग के उपाध्यक्ष डा.कुमार ने आश्वासन दिया कि इन मामलों को आयोग सर्वोच्च प्राथमिकता से लेते हुए संबंधित मंत्रालय से बात करेगा। उन्होंने राज्य में एसडीजी (सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स) के लिए मॉनिटरिंग सेल बनाने का सुझाव दिया। यह बताए जाने पर कि राज्य सरकार की कई बाह्य सहायतित परियोजनाओं के प्रस्ताव एआईआईबी व एनडीबी में लंबित हैं, इस पर डा.कुमार ने कहा कि इन मामलों को दिखवा लिया जाएगा। उन्होंने राज्य में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित किए जाने पर भी जोर दिया।

अर्ली वार्निंग सिस्टम को अंतरराष्ट्रीय तकनीकी से अध्ययन

बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने हाल में चमोली जिले में आई आपदा और वहां चल रहे राहत एवं बचाव कार्यों के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री लगातार इस पर नजर रखे हुए थे। नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने  कहा कि आपदा के मद्देनजर राज्य में अर्ली वार्निंग सिस्टम के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीक का उपयोग कर अध्ययन कराया जाएगा। 

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