उत्तराखंड: शिक्षक संघ की मांग, फर्जी शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे विभाग

फर्जी शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे विभाग।

शिक्षक संघ ने शिक्षा विभाग से एसआइटी जांच में दोषी पाए जा रहे फर्जी शिक्षकों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है। शिक्षक संघ ने शुक्रवार को इसके लिए शिक्षा निदेशक और शिक्षा सचिव को पत्र लिखा है।

Publish Date:Fri, 23 Oct 2020 03:22 PM (IST) Author: Raksha Panthari

देहरादून, जेएनएन। प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने शिक्षा विभाग से एसआइटी जांच में दोषी पाए जा रहे फर्जी शिक्षकों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है। शिक्षक संघ ने शुक्रवार को इसके लिए शिक्षा निदेशक और शिक्षा सचिव को पत्र लिखा है। संघ ने केवल प्राथमिक या जूनियर हाई स्कूलों के शिक्षक और कर्मचारियों की जांच पर भी आपत्ति जताई है।

जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रांतीय महामंत्री राजेंद्र बहुगुणा ने अपने लिखे पत्र में कहा कि केवल प्राथमिक नहीं बल्कि माध्यमिक शिक्षा और दूसरे विभागों में तैनात कार्मिकों की भी पूरी जांच होनी चाहिए। शिक्षक संघ ने वर्तमान में प्राथमिक शिक्षक और जूनियर शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की सत्यापन कार्रवाई पूरी होने के बाद आख्या के साथ ही सत्यापन पत्र शिक्षकों की सेवा पंजिका पर चस्पा करने और शिक्षकों को उपलब्ध करवाए जाने की मांग भी की है। 

शिक्षक संघ ने शिक्षा विभाग से वर्तमान में मांगे गए प्रमाण पत्रों के बाद दोबारा प्रमाण पत्र न मांगे जाने और इन प्रमाणपत्रों का रखरखाव सुनिश्चित करने की भी अपील की है। प्रांतीय महामंत्री ने वर्ष 2021 तक नियुक्त सभी शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की जांच के बाद विभागीय अभिलेखों में उनकी सेवानिवृत्त तक सत्यापन का स्पष्ट उल्लेख करने की मांग भी विभाग से की है।

शिक्षकों ने पुरानी पेंशन बहाली की मांग की

पुरानी पेंशन योजना की बहाली की मांग पर अनुसूचित जाति जनजाति शिक्षक एसोसिएशन ने उप जिलाधिकारी कार्यालय विकास नगर का घेराव किया। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने उप जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित करते हुए जल्द से जल्द पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग की।

शुक्रवार को शिक्षक एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय भाटिया के नेतृत्व में एसोसिएशन के पदाधिकारी उप जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। प्रदेश अध्यक्ष संजय भाटिया ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है। जब एक सरकारी मुलाजिम ही सेवानिवृत्त के बाद खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करेगा तो सरकार अपनी जिम्मेदारी पूरा करने का दावा कैसे कर सकती है।

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उन्होंने कहा कि नई पेंशन योजना में सरकार 14 फीसद अनुदान देती है। इसके चार फीसद हिस्से पर शिक्षकों से आयकर लिया जा रहा है। जबकि केंद्रीय कार्मिकों से इस चार फीसद अंशदान पर कटौती नहीं की जाती। उन्होंने इस व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से रोकने और पुरानी पेंशन बहाली करते हुए सभी सरकारी कार्मिकों के लिए एक समान व्यवस्थाएं लागू करने की मांग की है।

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