तीन घंटे भी नहीं चली सिटी बसों की हड़ताल, अधिकारियों ने मांगें परिवहन आयुक्त के सामने रखने का दिया भरोसा

विक्रम का संचालन शहर से बाहर करने ई-रिक्शा का संचालन मुख्य मार्गों से हटाने व स्मार्ट सिटी इलेक्ट्रिक बसों का किराया बढ़ाने की मांग पर बेमियादी हड़ताल पर जा रहे सिटी बस सेवा महासंघ की हड़ताल सोमवार को तीन घंटे भी नहीं चली।

Raksha PanthriTue, 03 Aug 2021 08:16 AM (IST)
तीन घंटे भी नहीं चली सिटी बसों की हड़ताल।

जागरण संवाददाता, देहरादून। विक्रम का संचालन शहर से बाहर करने, ई-रिक्शा का संचालन मुख्य मार्गों से हटाने व स्मार्ट सिटी इलेक्ट्रिक बसों का किराया बढ़ाने की मांग पर बेमियादी हड़ताल पर जा रहे सिटी बस सेवा महासंघ की हड़ताल सोमवार को तीन घंटे भी नहीं चली। हड़ताल के अंतर्गत सोमवार सुबह 11 बजे महासंघ के अध्यक्ष के साथ महज 25 फीसद बस संचालक ही आरटीओ कार्यालय पहुंचे और बसें परिसर में खड़ी कर दीं। करीब आधे घंटे नारेबाजी व प्रदर्शन का दौर चला और फिर डेढ़ घंटे तक ऋषिकेश-डोईवाला क्षेत्र से आने वाले साथियों का इंतजार किया गया। इसके बाद दोपहर डेढ़ बजे आरटीओ (प्रशासन) और आरटीओ (प्रवर्तन) से हड़ताली ट्रांसपोर्टरों की वार्ता हुई। अधिकारियों ने उनकी मांगों को परिवहन आयुक्त के समक्ष ले जाने का भरोसा दिया और हड़ताल खत्म हो गई।

देहरादून स्टेज कैरिज वेलफेयर एसो. के हड़ताल से किनारा करने के बाद हड़ताल के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा था। इस एसो. में सबसे बड़ी देहरादून-विकासनगर-डाकपत्थर बस यूनियन व जिले की समस्त निजी बसों व सिटी बसों के कुछ मार्गों की यूनियन शामिल हैं। इनके मालिकों का यह कहना था कि कोरोना काल की वजह से लंबे समय बसें खड़ी रहीं व अब मुश्किल से संचालन शुरू हुआ है। इसलिए हड़ताल नहीं की जा सकती। वहीं, सिटी बस सेवा महासंघ हड़ताल पर कायम रहा। महासंघ ने दावा किया था कि शहर के 13 मार्गों में से 10 मार्ग की घटक यूनियन उनके साथ हैं।

बाद में महासंघ ने आटो यूनियन, टाटा मैजिक यूनियन व जीएमओ, टीजीएमओ व ट्रक यूनियन के समर्थन का दावा भी किया और इसी दावे के साथ सोमवार की सुबह आरटीओ दफ्तर पहुंचकर सिटी बसें खड़ी कर दीं। महासंघ के अध्यक्ष विजय वर्धन डंडरियाल के नेतृत्व में ट्रांसपोर्टरों ने प्रदर्शन व नारेबाजी की। आरटीओ प्रशासन दिनेश चंद्र पठोई व आरटीओ प्रवर्तन संदीप सैनी के साथ वार्ता के बाद हड़ताल स्थगित कर दी गई। वार्ता में सिटी बस सेवा महासंघ के साथ बिष्ट गांव टाटा मैजिक एसो., दून आटो रिक्शा यूनियन, देहरादून ट्रक आपरेटर एसो., दून वैली कांट्रेक्ट कैरिज, गढ़वाल ट्रक आनर्स एसो. ऋषिकेश, उत्तराखंड बस आपरेटर्स महासंघ टीजीएमओ, जीएमओ, सहकारी संघ लिमि. व रूपकुंड सेवा के प्रतिनिधि शामिल रहे।

नहीं पड़ा शहर में कोई असर

सिटी बस सेवा महासंघ की हड़ताल का शहर में परिवहन सेवा पर कोई असर नहीं दिखा। दरअसल, हड़ताल में सिटी बस के ही कईं मार्गों की यूनियन शामिल नहीं थीं। राजपुर-क्लेमेनटाउन, रायपुर, डीएल रोड व डोईवाला जैसे बड़े मार्गों की बसें बेधड़क संचालित होती रहीं। इसके अलावा विक्रम और स्मार्ट इलेक्ट्रिक बसें संचालित होने से यात्रियों को कोई परेशानी नहीं हुई। हड़ताल में दावा आटो यूनियन के साथ होने का भी किया गया था, लेकिन यूनियन ने आटो का संचालन बेरोकटोक जारी रखा।

जिन मांगों पर हड़ताल, उन पर नहीं हुआ कोई समाधान

सिटी बस सेवा महासंघ ने जिन तीन प्रमुख मांग को लेकर हड़ताल का आह्वान किया था, उस पर आरटीओ के साथ चर्चा ही नहीं हुई। विक्रम को शहर से बाहर और ई-रिक्शा को शहर की गलियों में संचालित करने का मुद्दा बातचीत में उठाया ही नहीं गया।

सिटी बस सेवा महासंघ की मांग

-व्यावसायिक वाहनों की सरेंडर नीति में परिर्वतन कर पहले की तरह किया जाए।

-कोरोना के चलते एक साल का यात्री कर माफ किया जाए।

-सरकारी और निजी बैंकों की किश्त में ब्याज रहित दो साल की छूट दिलाई जाए।

-परमिट नवीनीकरण में 2021 से 2022 तक दो वर्ष की छूट दी जाए।

-इलेक्ट्रिक स्मार्ट बस योजना की समीक्षा की जाए, ताकि सिटी बस वाहन मालिकों को नुकसान न हो।

-सिटी बसों के लिए एक टॢमनल की व्यवस्था की जाए।

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