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बर्फबारी से संपर्क मार्ग हुए बंद, ग्रामीण की बढ़ी मुसीबतें Dehradun News

त्यूणी(देहरादून), जेएनएन। जनजाति क्षेत्र के ऊंचे इलाकों के ग्रामीणों की दुश्वारियां कम नहीं हुई हैं। पूरा क्षेत्र कड़ाके की सर्दी की चपेट में है। जौनसार-बावर की लाइफ लाइन कहे जाने वाले मसूरी-चकराता-त्यूणी हाईवे भले ही खुल गया हो, लेकिन संपर्क मार्गों के बंद होने से ग्रामीणों को चारापत्ती लाने में दिक्कतें आ रही हैं। 

जौनसार-बावर के कई ग्रामीण इलाकों में बर्फबारी भले ही पर्यटकों के लिए मौज मस्ती का साधन हो, लेकिन बर्फबारी प्रभावित गांवों में रहने वाले ग्रामीण कड़ाके की सर्दी झेल रहे हैं। हाईवे समेत क्षेत्र के दर्जनों गांवों को जोड़ने वाले लोखंडी-लोहारी, कोटी-बिनसोन-बुल्हाड़, सावड़ा-डूंगरी, चिल्हाड़-बाणाधार, रडू-मुधोंल, दारागाड़-नायली-कथियान, चकराता-क्वांसी-लाखामंडल, गोराघाटी-रंगेऊ-बरौंथा, ग्वासापुल-मोहना, त्यूणी-ओवरासेर-कथियान, कथियान-फनार, हरटाड़-छजाड़, डांगूठा-पटियूड़, अमराड़-जबराड़-कुनैन समेत डेढ़ दर्जन संपर्क मार्ग बर्फबारी के कारण बंद हो गए थे, जिनमें से एक दर्जन संपर्क मार्ग ही खुल पाए हैं। बर्फबारी के कारण बंद पड़े मार्गों के कारण ग्रामीण चकराता और त्यूणी बाजार से जरूरी सामान और राशन नहीं ला पा रहे हैं। 

रिचार्ज हुए जलस्रोत 

बारिश और हिमपात से जौनसार-बावर में सूखे पड़े जलस्रोतों को नया जीवन मिला है। पहले जलस्रोत सूखने की वजह से कांडा, चातरा, हनोल, ब्यूलाड़ा, पुरटाड़, चातरीगाड़, नया बाजार त्यूणी गूट बाजार त्यूणी, गुंडागांव बस्ती, गुतियाखाटल, मैंद्रथ, रायगी, कुल्हा, अटाल बाजार, निनूस, जाक्टा, मुंधोल, अनतेऊ बस्ती, हेडसू, कूणा, मेघाटू, कोटी-बावर, सावड़ा, भंद्रौली, चिल्हाड़, भूठ, लाखामंडल, क्वांसी समेत आसपास के कई गांवों में सैकड़ों ग्रामीण परेशानी झेल रहे थे, लेकिन इस बार बारिश व हिमपात से जलस्रोत रिचार्ज हो गए हैं। किसान दिनेश चौहान, चातरा प्रधान हरीशचंद्र राजगुरु, पूर्व प्रधान अटाल सुमन शर्मा आदि का कहना है कि इस बार रिकार्ड बर्फबारी से सूखे पड़े जलस्रोतों को संजीवनी मिली है। 

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पर्यटक ले रहे बर्फबारी का मजा 

चकराता क्षेत्र के प्रमुख पर्यटन स्थल मोइला टॉप, बुधेर, व्यास शिखर, देववन, मुंडाली, खडंबा, लोखंडी में पर्यटक बर्फबारी का आनंद ले रहे हैं। साथ ही अपने पैतृक गांव आए नौकरीपेशा भी बर्फबारी का आनंद लेकर माघ मरोज पर्व मना रहे हैं। ओवरासेर में नौकरीपेशा लोगों ने बर्फ के बीच पारंपरिक गानों पर नाचकर माघ मरोज का जश्न मनाया। 

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