कांग्रेस ने भाजपा की अधूरी घोषणाओं को बनाया ढाल

देहरादून, जेएनएन। प्रदेश कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में भाजपा को घेरने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से वर्ष 2013 में की गई घोषणाओं को ढाल बनाने की तैयारी की है। इसे लेकर प्रदेश कांग्रेस के तेवर तल्ख नजर आ रहे हैं।

विशेषकर केदारनाथ त्रासदी के बाद तत्कालीन केंद्र की मनमोहन सरकार की ओर से दी गई पुनर्निर्माण राशि और उसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए आश्वासन को चुनावी मुद्दा बनाया जाएगा। 

कांग्रेस के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन में प्रेस वार्ता कर केंद्र सरकार को कई मुद्दों पर घेरा। कहा कि नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने से पहले जनता से कई वादे किए थे। उत्तराखंड की सभी रैलियों में केदारनाथ आपदा का विशेष रूप से जिक्र किया था, साथ ही पुनर्निर्माण के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा दिए गए साढ़े 7000 करोड़ के पैकेज को नाकाफी बताया था। 

उन्होंने लोगों को आश्वस्त किया था कि यदि वह प्रधानमंत्री बनते हैं और एनडीए की सरकार केंद्र में बनती है तो न केवल इस पैकेज को दोगुना करेंगे। जितनी आवश्यकता होगी, उतना धन दिया जाएगा। 

उन्होंने कहा कि 2017 के विधानसभा चुनाव में राज्य में भी भाजपा सरकार आने के बाद भी प्रदेश के विकास कार्यो ने गति नहीं पकड़ी। केंद्र में मोदी सरकार के पांच साल व राज्य में त्रिवेंद्र सरकार के दो वर्ष हो चुके हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2014 में 2017 में उत्तराखंड की जनता से किए हुए किसी भी वादे पर अमल नहीं हुआ। 

जीएसटी व नोटबंदी पर मौन क्यों 

धस्माना ने कहा कि पीएम मोदी को देश की जनता को यह भी बताना चाहिए कि क्या वह लोगों से जीएसटी व नोटबंदी की उपलब्धि पर भी वोट मागेंगे। धस्माना ने कहा कि देश में पिछले पांच सालों में कितनी स्मार्ट सिटी बनीं और देश में किन-किन शहरों में बुलेट ट्रेन पहुंची इसका भी खुलासा करना चाहिए।

जनहित के मुद्दों पर राज्य सरकार को घेरा 

धस्माना ने त्रिवेंद्र सरकार पर राज्य की जनता के हितों के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य को 847 करोड़ रुपये केंद्र से वन भूमि ट्रासफर व 80 करोड़ रुपये टीएचडीसी से मिलने थे, लेकिन सीएम ने कैबिनेट की बैठक कर केंद्र की यह देनदारी माफ कर दी। 

उन्होंने कहा कि पीएम और सीएम दोनों को यह जवाब देना होगा कि एक तरफ जब राज्य लगातार कर्ज ले रहा है तब कैसे राज्य सरकार केंद्र की देनदारियों को माफ कर सकता है।

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