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सीएसआर में राज्य के लिए फिक्रमंद कंपनियों की होगी पहचान

सीएसआर के दायरे में आने वाली कंपनियों की पहचान शुरू कर दी गई है।

भूगोल व जनसंख्या के लिहाज से उत्तराखंड छोटा प्रदेश है। सरकार यहां कारोबारी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कंपनियों को भूमि उपलब्ध कराने से लेकर करों व शुल्क में रियायत दे रही है। कोरोना के विकट दौर में यहां फल-फूल रही कंपनियों से मदद की दरकार है।

Sumit KumarSun, 16 May 2021 10:30 AM (IST)

सुमन सेमवाल, देहरादून: भूगोल व जनसंख्या के लिहाज से उत्तराखंड छोटा प्रदेश है। इसके बाद भी सरकार यहां कारोबारी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कंपनियों को भूमि उपलब्ध कराने से लेकर तमाम करों व शुल्क में रियायत दे रही है। इस समय कोरोना के विकट दौर में राज्य को यहां फल-फूल रही कंपनियों से मदद की दरकार है। मदद की मांग भी सीएसआर (कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी) में रुपये के रूप में नहीं, बल्कि चिकित्सा संसाधन के रूप में की जा रही है। हालांकि, इसके बाद भी तमाम कंपनियों से अभी तक अपेक्षित रुझान नहीं मिला है। लिहाजा, सीएसआर के दायरे में आने वाली कंपनियों की पहचान शुरू कर दी गई है।

राज्य माल एवं सेवा कर (स्टेट जीएसटी) के अपर आयुक्त विपिन चंद्रा के मुताबिक, राज्य में करीब 52 ऐसी कंपनियां हैं, जिनका लाभ पांच करोड़ रुपये या नेटवर्थ 500 करोड़ रुपये या न्यूनतम टर्नओवर 1000 करोड़ रुपये है। कॉरपोरेट मंत्रालय के नियमों के मुताबिक ऐसी कंपनियों को सीएसआर फंड में दो फीसद राशि खर्च करनी होती है। कुछ कंपनियां इस दिशा में आगे बढ़ी हैं, मगर अभी भी तमाम कंपनियों का रुख स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए कंपनियों का डेटा तैयार किया जा रहा है। ताकि कंपनी प्रतिनिधियों से बात कर उन्हें राज्य के प्रति उनकी जिम्मेदारी का एहसास कराया जा सके।

 

कंपनियों का मुख्यालय राज्य से बाहर

सीएसआर के दायरे वाली तमाम कंपनियों का मुख्यालय राज्य से बाहर है। ऐसे में संबंधित कंपनियां राज्य से बाहर सीएसआर का प्रयोग कर रही हैं। कोविड की विकट स्थिति में सीएसआर में राज्य को अपेक्षित लाभ देने से सरकारी मशीनरी अचरज में है।

भविष्य में हिस्सेदारी तय करने की कवायद होगी

कोरोना संक्रमण के दौर में जब उत्तराखंड को सीएसआर में मदद की आवश्यकता है, तब अपेक्षित सहयोग न मिल पाने के चलते राज्य सरकार को इस दिशा में भविष्य की रणनीति तैयार करने को विवश कर दिया है। राज्य सरकार के विभिन्न अधिकारियों के मुताबिक भविष्य में इस दिशा के नियम बनाए जाएंगे, जिसमें राज्य में कारोबार के हिसाब से सीएसआर फंड का हिस्सा तय किया जाएगा। 

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अपनी सुरक्षा की चिंता किए बिना दिन-रात जुटे जीएसटी अधिकारी

कोरोना संक्रमण की चपेट में स्टेट जीएसटी के तमाम कार्मिक भी आए हैं। इसके बाद भी जीएसटी के अधिकारी व कर्मचारी राज्य के लिए चिकित्सीय संसाधन जुटाने में लगे हैं। उद्योगों से संपर्क कर राज्य के लिए 20 हजार किट तैयार करने की कवायद की जा रही है। साथ अन्य दवाओं व चिकित्सीय संसाधन जुटाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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