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गंगाद्वार में मिलेगी प्लास्टिक कचरे को मुक्ति, तैयार होगा रिसाइक्लिंग प्लांट

देहरादून, राज्य ब्यूरो। गंगाद्वार हरिद्वार में राज्यभर के गांवों से एकत्रित होने वाले प्लास्टिक कचरे के निस्तारण की राह अब आसान हो गई है। केंद्र सरकार के सहयोग से पंचायतीराज विभाग द्वारा हरिद्वार में तैयार किए जाने वाले कॉमन वेस्ट प्लास्टिक रिसाइक्लिंग फैसिलिटी प्लांट के लिए भूमि उपलब्ध हो गई है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से समय मिलते ही इस प्लांट के शिलान्यास की तिथि तय की जाएगी। रिसाइक्लिंग प्लांट में गांवों से एकत्रित होने वाले प्लास्टिक कचरे से दरवाजे, चौखट समेत अन्य उत्पाद तैयार होंगे।

पंचायतीराज विभाग ने प्रदेश के गांवों को प्लास्टिक कचरे से मुक्त करने की मुहिम शुरू की है। इस सिलसिले में पूर्व में केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया, जिसे मंजूरी मिल चुकी है।

प्रथम चरण में राज्य के सभी 95 ब्लाकों के एक-एक गांव को चयनित कर वहां प्लास्टिक कचरा एकत्रित करने को शेड बनाने के साथ ही कांपेक्टर लगाए जा रहे हैं। कांपेक्टर की राशि केंद्र सरकार ने दी है, जबकि शेड निर्माण का खर्च राज्य सरकार उठा रही है।

जिन गांवों में कांपेक्टर लग रहे हैं, वहां महिला समूहों को प्लास्टिक कचरा एकत्रित करने का कार्य सौंपा जाएगा। यह कचरा हरिद्वार में लगने वाले रिसाइक्लिंग प्लांट में चार रुपए प्रति किलो की दर से क्रय किया जाएगा। रिसाइक्लिंग प्लांट के लिए केंद्र ने 3.75 करोड़ की राशि अवमुक्त की है। अब इस प्लांट के लिए पंचायतीराज विभाग को भूमि उपलब्ध हो गई है।

अपर सचिव पंचायतीराज एचसी सेमवाल के अनुसार हरिद्वार में ग्राम ज्वालापुर में प्लास्टिक रिसाइक्लिंग प्लांट के लिए करीब तीन बीघा सरकारी भूमि अब विभाग के नाम हो गई है। जल्द ही प्लांट का शिलान्यास मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के हाथों होगा। मुख्यमंत्री से समय मिलते ही शिलान्यास की तिथि तय की जाएगी। कोशिश ये है कि सालभर के भीतर यह प्लांट कार्य करना प्रारंभ कर दे।

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प्लास्टिक कचरा बनेगा संसाधन

प्लास्टिक कचरे के निस्तारण की मुहिम को पंचायतीराज विभाग ने संसाधन के तौर पर लिया है। अपर सचिव सेमवाल के अनुसार हरिद्वार में रिसाइक्लिंग प्लांट चालू होने पर गांवों से एकत्रित प्लास्टिक कचरा वहां खरीदा जाएगा। इससे जहां गांव प्लास्टिक कचरे से मुक्त होंगे, वहीं लोगों को आय भी होगी। यही नहीं, रिसाइक्लिंग प्लांट में तैयार होने वाले प्लास्टिक उत्पादों से मिलने वाली आय से भी कुछ हिस्सा महिला समूहों को देने पर विचार चल रहा है।

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