मानव-वन्यजीव संघर्ष थामने को चार बिंदुओं पर फोकस, सीएम धामी ने विभाग को दिए थे प्रभावी कार्ययोजना बनाने के निर्देश

उत्तराखंड में लगातार गहराते मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम के लिए सरकार अब गंभीरता से कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश के बाद वन विभाग ने वन सीमा से सटे आबादी वाले क्षेत्रों में कूड़ा प्रबंधनलैंटाना उन्मूलन पर खास फोकस करने का निश्चय किया है।

Sumit KumarMon, 02 Aug 2021 06:30 AM (IST)
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने विभाग को दिए थे प्रभावी कार्ययोजना बनाने के निर्देश।

राज्य ब्यूरो, देहरादून: उत्तराखंड में लगातार गहराते मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम के लिए सरकार अब गंभीरता से कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश के बाद वन विभाग ने वन सीमा से सटे आबादी वाले क्षेत्रों में कूड़ा प्रबंधन, सोलर लाइट, शौचालय और लैंटाना उन्मूलन पर खास फोकस करने का निश्चय किया है। इस क्रम में वन मुख्यालय ने सभी प्रभागों के डीएफओ और संरक्षित क्षेत्रों के निदेशकों को निर्देश जारी किए गए हैं।

प्रदेश में मानव-वन्यजीव संघर्ष किस कदर चिंताजनक स्थिति में पहुंच गया है, आंकड़े इसकी तस्दीक कर रहे हैं। इस साल जनवरी से अब तक की तस्वीर देखें तो वन्यजीवों के हमले में 29 व्यक्तियों की मौत हो चुकी है, जबकि 66 घायल हुए हैं। यही नहीं, इस वक्फे में विभिन्न कारणों से 62 गुलदार, 10 हाथी और पांच बाघों की मौत हो चुकी है। जाहिर है कि इस संघर्ष में मनुष्य और वन्यजीव दोनों को ही कीमत चुकानी पड़ रही है। इस सबको देखते हुए मुख्यमंत्री ने हाल में ही विभागीय अधिकारियों को मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार कर इसे धरातल पर उतारने के निर्देश दिए थे।

इस कड़ी में वन विभाग ने कदम बढ़ाने प्रारंभ कर दिए हैं। विभाग के मुखिया प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) राजीव भरतरी के मुताबिक मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम में कूड़ा प्रबंधन सबसे महत्वपूर्ण है। वन क्षेत्रों के नजदीक कूड़ा फेंके जाने के कारण इसमें कुत्ते समेत दूसरे जानवर मुंह मारते रहे हैं। ऐसे में आसान शिकार की तलाश में गुलदार जैसे हिंसक जीवों के वहां आने से इनके मनुष्य से टकराव की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में कूड़ा प्रबंधन पर खास ध्यान केंद्रित किया गया है।

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उन्होंने बताया कि जंगल से सटे गांवों व आबादी वाले क्षेत्रों में साफ-सफाई के साथ ही रात्रि में रोशनी के मद्देनजर ग्रामीणों को सोलर लाइट देने की मुहिम तेज की जा रही है। ग्रामीणों को अनिवार्य रूप से शौचालय बनाने को प्रेरित किया जा रहा है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि वन क्षेत्रों के साथ ही गांवों के नजदीक लैंटाना की झाडिय़ां भी वन्यजीवों की शरणस्थली बन रही हैं। इसके लिए लैंटाना उन्मूलन अभियान को बेहद गंभीरता के साथ शुरू किया गया है। उन्होंने बताया कि इसके अलावा अन्य कई उपायों को लेकर भी मंथन चल रहा है।

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