उत्तराखंड में एलएसी पर चीनी सेना की सक्रियता बढ़ी, बाड़ाहोती के पास देखे गए चीनी सैनिक

भारत और चीन के बीच लद्दाख में चल रहे तनाव के बीच उत्तराखंड में सीमा पर चीनी सेना की सक्रियता की बात सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि चमोली की मलारी घाटी में बाड़ाहोती के निकट वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीनी सेना की सक्रियता देखी गई है।

Sunil NegiThu, 22 Jul 2021 08:08 AM (IST)
चमोली जिले की मलारी घाटी में बाड़ाहोती के पास देखे गए चीनी सैनिक।

राज्य ब्यूरो, देहरादून। भारत और चीन के बीच लद्दाख में चल रहे तनाव के बीच उत्तराखंड में भी सीमा पर चीनी सेना की सक्रियता की बात सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि चमोली जिले की मलारी घाटी में बाड़ाहोती के निकट वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीनी सेना की सक्रियता देखी गई है। हालांकि शासन और स्थानीय प्रशासन ने ऐसी किसी जानकारी से इन्कार किया है।

उत्तराखंड की 345 लंबी सीमा चीन से सटी है। इसमें से 100 किलोमीटर लंबी सीमा चमोली जिले में है। जोशीमठ से 102 किलोमीटर दूर स्थित भारत की अंतिम पोस्ट रिमखिम से बाड़ाहोती तीन किलोमीटर दूर है। करीब 30 वर्ग किलोमीटर में फैले बाड़ाहोती चारागाह में स्थानीय लोग मवेशी लेकर आते हैं। इस संवेदनशील क्षेत्र में पहले कई बार चीनी सेना अतिक्रमण करती रही है। हालांकि सेना और भारत-तिब्बत सेना पुलिस बल (आइटीबीपी) के जाबांजों ने हर बार चीनी सैनिकों की हिमाकत का मुंह तोड़ जवाब दिया है।

बताया जा रहा है कि पिछले दिनों चीनी सेना की एक प्लाटून बाड़ाहोती इलाके के आसपास देखी गई। सेना चीनी सैनिकों की गतिविधियों पर पैनी निगाह रखे हुए है। पिछले वर्ष लद्दाख में तनाव के बाद उत्तराखंड से लगी सीमा पर भी सेना के जवानों की संख्या बढा दी है। दूसरी ओर अपर मुख्य सचिव (गृह) आनंद वर्द्धन ने बताया कि उन्हें ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली है। वहीं चमोली के पुलिस अधीक्षक यशवंत सिंह चौहान ने भी ऐसी किसी सूचना से इन्कार किया।

वायुसेना कर रही है चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी का परीक्षण

लंबे समय से वायुसेना उत्तरकाशी जिले में स्थित चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी पर परीक्षण उड़ान भरती रही है। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस हवाई पट्टी से चीन सीमा की हवाई दूरी महज 126 किलोमीटर की है। इस हवाई पट्टी को वायुसेना के लिए एडवांस लैंडिंग ग्राउंड (एएलजी) बनाने की कवायद चल रही है। इसके हवाई पट्टी के विस्तारीकरण की योजना शामिल हैं। विस्तारीकरण के तहत रनवे को 150 मीटर तक बढ़ावा जाना भी प्रस्तावित है। वर्ष 2013 में वायुसेना ने यहां सीजे-हरक्यूलिस विमान उतरा था। इसके बाद कई बार अप्रैल 2018 में वायु सेना ने इस हवाई पट्टी पर आपरेशन 'गगन शक्ति' के तहत अभ्यास किया था। फरवरी 2020 में एएन-32 विमान की सफल लैंडिंग की गई। इसके साथ ही अपाचे, एमआई-17, चिनूक हेलीकाप्टर यहां परीक्षण उड़ान कर चुके हैं।

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