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धार्मिक स्थलों में यथावत रहेंगी पारंपरिक व्यवस्थाएं

राज्य ब्यूरो, देहरादून: चारधाम समेत प्रदेश के अन्य स्थानों पर स्थित देवालयों व मंदिरों के तैयार किए गए उत्तराखंड लोक धार्मिक संस्थाएं (प्रबंधन एवं विकास) एक्ट-2019 का मसौदा शुकवार को मुख्यमंत्री को सौंप दिया गया। इसे चारधाम विकास परिषद के उपाध्यक्ष आचार्य शिवप्रसाद ममगाई ने सौंपा। प्रस्तावित एक्ट में चारधाम समेत अन्य मंदिरों में पूजा-अर्चना की पारंपरिक व्यवस्थाएं उनकी अपनी-अपनी परंपराओं के अनुसार यथावत बनाए रखने पर जोर दिया गया है। साथ ही वंशानुगत पुजारियों और हक-हकूकधारियों के परंपरागत अधिकार भी यथावत रखने का प्रस्ताव किया गया है।

चारधाम विकास परिषद की ओर तैयार किए गए मसौदे में चारधाम के साथ ही धार्मिक स्थलों से जुड़े पुजारियों और अन्य व्यक्तियों के वर्तमान अधिकारों के संरक्षण की पैरवी की गई है। ये भी प्रस्ताव किया गया है कि ऐसे मंदिरों, हिदू लोक धार्मिक संस्थाओं और विन्यासों पर भी एक्ट लागू हो सकता है, जो वर्तमान में आश्रमों, अखाड़ों, महंतों, न्यासों के नियंत्रण व प्रबंधन में हैं। परिषद के उपाध्यक्ष आचार्य ममगाई ने बताया कि एक्ट के अनुसार सभी धामों के संरक्षण-संव‌र्द्धन व विकास के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में परिषद का गठन होगा। यही परिषद, हर मामलों में निर्णय लेगी। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित एक्ट में लोक धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन की कार्ययोजना के साथ ही उनके अधिकार भी प्रस्तावित किए गए हैं।

प्रस्तावित एक्ट के प्रमुख बिंदु

-चारधाम और अन्य महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में पूजा-अर्चना की पारंपरिक व्यवस्था उनकी अपनी परंपरा के अनुसार यथावत रहेगी

-चारधाम के पवित्र स्थलों में पूजा संबंधी कार्याें में लगे लोगों के अधिकार प्रभावित नहीं होंगे। एक्ट के बाद यदि अपेक्षित हो तो उन्हें दी जा सकती है निश्चित राशि

-दुकानदार, विक्रेता और अन्य पट्टेदार या लाइसेंसधारक, जो इस एक्ट में निर्दिष्ट क्षेत्र में मंदिर समिति के किराएदार हैं, वे शेष अवधि के लिए परिषद के किराएदार हो जाएंगे।

-यदि कोई व्यक्ति, पुजारी व हक-हकूकधारी किसी अपनी वर्तमान नियुक्ति से असंबद्ध होने का इच्छुक है तो वह एक्ट के प्रारंभ से 90 दिन के भीतर आवेदन करेगा।

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