पेयजल शुल्क बढ़ोत्तरी के प्रस्ताव पर गरमाया सदन

जागरण संवाददाता, देहरादून: छावनी परिषद देहरादून की बैठक में पेयजल शुल्क बढ़ोत्तरी को लेकर खूब हंगामा हुआ। घरेलू व कमर्शियल कनेक्शन पर जल कर तीन से चार गुणा बढ़ाने के प्रस्ताव पर सदन गरमा गया। सभासदों के भारी विरोध के कारण बोर्ड अध्यक्ष ने अब शुल्क निर्धारण के लिए समिति का गठन किया है। यह समिति अन्य निकायों में लिए जा रहे शुल्क पर पंद्रह दिन में अपनी रिपोर्ट देगी। इसी के आधार पर फिर निर्णय लिया जाएगा।

छावनी परिषद देहरादून की शुक्रवार को अध्यक्ष ब्रिगेडियर नीरज गुसाईं की अध्यक्षता में बोर्ड बैठक आयोजित की गई। कैंट बोर्ड की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है, इसलिए आय बढ़ाने के तमाम जरिये तलाशे जा रहे हैं। ऐसे में बोर्ड बैठक में भी टैक्स बढ़ोत्तरी पर खास फोकस रहा। इनमें एक था, पेयजल शुल्क में वृद्धि। मुख्य अधिशासी अधिकारी तनु जैन ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2018-19 में पेयजल शुल्क के रूप में कैंट बोर्ड को 70.21 लाख की आय हुई। जबकि खर्च 2.38 करोड़ पहुंच गया। आय-व्यय का यह अंतर बढ़ता जा रहा है। ऐसे में शुल्क बढ़ोत्तरी जरूरी है। उन्होंने नगर निगम के क्षेत्रों के समान शुल्क लिए जाने का प्रस्ताव रखा पर सभासदों ने इसका विरोध कर दिया। अध्यक्ष ने सभासदों ने यह कहकर मनाने का प्रयास किया कि बोर्ड की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए यह कदम आवश्यक है। लेकिन सभासद नहीं माने। काफी देर बहस के बाद अध्यक्ष ने इसे लेकर निर्वाचित सभासद व नामित सदस्यों की एक समिति गठित कर दी है। इसकी रिपोर्ट के आधार पर ही पेयजल शुल्क तय किया जाएगा। बैठक में बोर्ड की उपाध्यक्ष राजेंद्र कौर सौंधी, सभासद विनोद पंवार, जितेंद्र तनेजा, कमल राज, हितेश गुप्ता, मधु खत्री, मेघा भंट्ट, मीनू आदि उपस्थित रहे। हाउस टैक्स बढ़ोत्तरी स्थगित

बोर्ड बैठक में हाउस टैक्स में बढ़ोत्तरी का भी प्रस्ताव रखा गया। कहा गया कि टैक्स हर पांच साल में रिवाइज होने चाहिए। पर तीन दशक से इसमें बढ़ोत्तरी नहीं हुई है। जिससे बोर्ड को राजस्व की हानि हो रही है। पर सभासदों ने इसका जोरदार विरोध किया। जिस पर यह मसला स्थगित कर दिया गया। जल संयोजन से लेकर म्यूटेशन तक का शुल्क बढ़ा

कम्युनिटी सेंटर की बुकिंग के लिए भी अब देना होगा ज्यादा चार्ज

जागरण संवाददाता, देहरादून: पेयजल शुल्क वृद्धि को लेकर सभासदों ने भले ही तेवर दिखाए, पर इसी बैठक में आम जन से जुड़े कई चार्ज बढ़ा दिए गए हैं। इसमें जल संयोजन से लेकर शिफ्िटग तक का शुल्क शामिल है। म्यूटेशन फीस में सभासदों के विरोध के चलते कुछ राहत जरूर मिली है। नया शुल्क पांच हजार रुपये तय किया गया है। बता दें, म्यूटेशन शुल्क 3500 रुपये से दस हजार रुपये करने का प्रस्ताव था।

बहरहाल, कैंट के बाशिंदों को अन्य काम के लिए अब पहले से कई ज्यादा शुल्क चुकाना होगा। प्रॉपर्टी एसेसमेंट की कॉपी के लिए 50 रुपये के बजाय 150 रुपये, बिल्डिंग प्लान, साइट और लेआउट प्लान की कॉपी लेने के लिए पहली बार में 100 के बजाय 250 रुपये और दूसरी बार 200 के बजाय 500 रुपये चुकाने होंगे। लोगों को विभिन्न मद में बकाया पर जारी होने वाले नोटिस पर भी 50 रुपये के बजाय 100 रुपये प्रति नोटिस चार्ज लिया जाएगा। इसके अलावा जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र का पंजीकरण शुल्क भी 50 से बढ़ाकर 100 रुपये कर दिया गया है। जल संयोजन का फॉर्म व म्यूटेशन एप्लीकेशन फॉर्म भी 50 के बजाय अब 100 रुपये में मिलेगा। वहीं जल संयोजन शुल्क 500 से एक हजार, जल संयोजन शिफ्िटग शुल्क 300 से 500 व री-कनेक्शन चार्ज एक हजार से डेढ़ हजार कर दिया गया है। नए जल संयोजन के लिए दो हजार के बजाय अब साढ़े तीन हजार रुपये धरोहर राशि के रूप में देने होंगे। कम्युनिटी सेंटर का बुकिंग चार्ज भी पांच से छह हजार रुपये कर दिया गया है। कुत्ता पालने की फीस दो गुणा

छावनी क्षेत्र में कुत्ता पालने की लाइसेंस फीस 50 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये सालाना कर दी गई है। वहीं कुत्ते के गले में डाले जाने वाले टोकन के 50 रुपये अलग से चुकाने होंगे। ठेली, रेहड़ी की फीस भी 50 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये कर दी गई है। सीवर लाइन पर सभासद दो फाड़

गढ़ी-डाकरा व प्रेमनगर के सभासद सीवर लाइन को लेकर बोर्ड बैठक में ही उलझ पड़े। हुआ ये कि छावनी परिषद ने पहले फेस में प्रेमनगर क्षेत्र में सीवर लाइन की डीपीआर तैयार की है। जिसे मंजूरी के लिए मध्य कमान को भेजा जा रहा है। जबकि गढ़ी-डाकरा में सीवर लाइन को लेकर अभी भूमि हस्तांतरण का पेंच फंसा हुआ है। इस पर गढ़ी क्षेत्र के चारों सभासदों ने गढ़ी-डाकरा व प्रेमनगर का प्रस्ताव एकसाथ मध्य कमान को भेजने की बात कही। इसे लेकर हंगामा शुरू कर दिया। बोर्ड अध्यक्ष ने किसी तरह समझा बुझाकर मामला शांत कराया। उन्होंने इसे लेकर वोटिंग कराई तो फैसला प्रेमनगर में सीवर लाइन बिछाने के पक्ष में आया। कूड़ा उठान में लगी कंपनी को हटाने की मांग

कैंट बोर्ड के सभी सभासदों ने डोर टू डोर कूड़ा उठान में लगी कंपनी को हटाने की मांग की। उनका कहना था कि कंपनी सही ढंग से काम नहीं कर रही है। जबकि बोर्ड उसे चेतावनी भी जारी कर चुका है। जिस पर अब बोर्ड अध्यक्ष ने खुद स्थलीय निरीक्षण कंपनी के काम का जायजा लेने की बात कही है। बता दें, पिछली बैठक में भी सभासदों ने कंपनी के काम में कमी बताई थी। जिस पर अध्यक्ष ने एक समिति का गठन किया था। समिति की रिपोर्ट में भी कई खामियां इंगित की गई हैं। आर्थिक तंगी का असर काम पर

कैंट बोर्ड की खराब आर्थिक स्थिति का असर विकास कार्यो पर भी पड़ रहा है। शुक्रवार को हुई बैठक में भी सभासदों ने विकास कार्यो के 61 प्रस्ताव दिए। पर बजट कम होने के चलते अध्यक्ष ने वरियता के हिसाब से काम कराने को कहा गया। प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप का गठन होगा

कैंट बोर्ड क्षेत्र में होने वाले तमाम कार्यो की अब सघन रूप से निगरानी होगी। इसके लिए प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप का गठन किया जाएगा। छावनी परिषद देहरादून के अंतर्गत आठ वार्ड हैं। हरेक वार्ड में ऐसा एक ग्रुप बनाया जाएगा। जिसमें न केवल सभासद बल्कि आम लोगों को भी जोड़ा जाएगा। बोर्ड अध्यक्ष ने इस ओर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कैंट हॉस्पिटल व स्कूलों की व्यवस्थाएं सुदृढ़ करने के लिए भी रोडमैप तैयार करने को कहा है। सभासदों से कहा कि वह तमाम सरकारी योजनाओं और विधायक व सांसद निधि के तहत अधिकाधिक कार्य कराने का प्रयास करें।

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