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उत्‍तराखंड में बिना लाइसेंस के नहीं चलेंगी फल नर्सरी

देहरादून, राज्य ब्यूरो। औद्यानिकी को आर्थिकी का मुख्य जरिया बनाने और यहां इसकी अपार संभावनाओं को देखते हुए प्रदेश सरकार अब उत्तराखंड फल पौधशाला (विनियम) विधेयक, 2019, (नर्सरी एक्ट) लाने जा रही है। इस विधेयक में किसानों को अच्छी पौध उपलब्ध कराने के लिए लिए मानकों को सख्त किया गया है। यदि किसी सरकारी अथवा निजी नर्सरी से किसानों को मुहैया कराई गई फल पौध खराब निकलती है तो नर्सरी स्वामी को जेल व 50 हजार रुपये का जुर्माना हो सकता है। कैबिनेट ने एक्ट के इस मसौदा को हरी झंडी दिखा दी है।

अभी तक राज्य में उत्तर प्रदेश के नर्सरी एक्ट से काम चलाया जा रहा है। इसे देखते हुए दिसंबर 2017 से राज्य का अपना नर्सरी एक्ट बनाने की कसरत शुरू हुई। अब इसका मसौदा कैबिनेट ने पारित कर दिया है। एक्ट में सरकारी व निजी क्षेत्र की सभी नर्सरियों को एक्ट प्रभावी होने के तीन माह के भीतर अनिवार्य रूप से लाइसेंस लेने का प्रावधान किया गया है। नर्सरी में तैयार होने वाली पौध की गुणवत्ता के लिए नर्सरी स्वामी के साथ ही जिला स्तर के उद्यान विभाग के कार्मिकों पर भी कार्रवाई होगी। खराब फल पौध के कारण किसान को होने वाले नुकसान की भरपाई की भी व्यवस्था होगी। इसका निर्णय जिला स्तर पर गठित होने वाली कमेटी करेगी। नर्सरी का हर दो साल में नवीनीकरण कराना अनिवार्य होगा।

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ये भी प्रावधान

-अब 0.2 हेक्टेयर से कम भूमि में पौधालय को माना जाएगा नर्सरी

-30 वर्ष के भूमि पट्टे वाली भूमि में भी नर्सरी की जा सकेगी तैयार

-प्रत्येक नर्सरी में मातृवृक्ष (मदर ब्लाक) तैयार करना जरूरी

-नर्सरी के लिए तीन वर्ष का कैलेंडर बनाना अनिवार्य

-नई प्रजाति की खोज करने पर इसे पेटेंट करा सकेंगी नर्सरी

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जैविक व पारंपरिक कृषि की खरीद को रिवाल्विंग फंड

प्रदेश में पारंपरिक फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य और मार्केटिंग के लिए कैबिनेट ने उत्तराखंड कृषि उत्पाद मंडी अधिनियम में संशोधन किया है। इसके तहत प्रदेश की हर मंडी से दस फीसद धनराशि को इस रिवाल्विंग फंड में डाला जाएगा। दस करोड़ की लागत के इस फंड से किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इससे किसानों को फसलों का उचित दाम मिलेगा, तो वहीं मार्केटिंग के लिए बिचौलियों से छुटकारा मिलेगा। 

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