शक्तिमान प्रकरण में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी सहित पांच बरी, सीजेएम कोर्ट ने सुनाया फैसला

शक्तिमान प्रकरण में सीजेएम लक्ष्मण सिंह की कोर्ट ने कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को बरी कर दिया है। 2016 बजट सत्र के दौरान भाजपा विधायक व कार्यकर्ताओं ने कांग्रेसी सरकार के खिलाफ विधानसभा तक रैली निकाली थी।इस दौरान पुलिसकर्मियों व भाजपा समर्थकों के बीच झड़प भी हुई थी।

Sumit KumarThu, 23 Sep 2021 03:32 PM (IST)
शक्तिमान प्रकरण में सीजेएम लक्ष्मण सिंह की अदालत ने कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को बरी कर दिया है।

जागरण संवाददाता, देहरादून: देहरादून :  शक्तिमान प्रकरण में मुख्य मजिस्ट्रेट लक्ष्मण सिंह की अदालत ने कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी सहित पांच अन्य आरोपितों को दोषमुक्त करार दिया है।  शिकायतकर्त्‍ता रविंदर सिंह (पुलिस के घुड़सवार) ने 15 मार्च, 2016 को तहरीर दी थी कि 14 मार्च को वह विधानसभा सत्र के दौरान विधानसभा चौराहे पर ड्यूटी पर थे। इसी बीच भाजपा कार्यकत्र्ताओं का एक जलूस पहुंचा। जुलूस का नेतृत्व भाजपा के तत्कालीन विधायक गणेश जोशी कर रहे थे।

इस दौरान गणेश जोशी, प्रमोद बोरा, जोगेंद्र सिंह पुंडीर, अभिषेक और राहुल रावत डंडे लेकर मौके पर पहुंचे। उन्होंने धारा 144 का उल्लंघन करते हुए सरकारी ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। आरोप था कि इस दौरान शक्तिमान घोड़े के पांव पर डंडे से प्रहार किया गया, जिससे वह दिव्यांग हो गया। इलाज के दौरान घोड़े की मौत हो गई। इस मामले में नेहरू कालोनी थाने की पुलिस की ओर से पांचों लोग के खिलाफ बलवा, मारपीट और पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया था। इस मामले में गणेेश जोशी और प्रमोद बोरा को 19 मार्च को गिरफ्तार भी कर लिया गया था। हालांकि 22 मार्च को उन्हें जमानत भी मिल गई थी।

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इस मामले में पुलिस की ओर से 16 मई, 2016 को कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल किया गया। अदालती कार्रवाई के बीच अक्टूबर महीने में गृह विभाग की ओर से जोशी के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने का आदेश जारी किया। पांच साल कोर्ट में केस चलने के दौरान बचाव पक्ष से चार गवाह, वहीं अभियोजन पक्ष से 18 गवाह पेश किए गए। गवाहों के बयानों के आधार पर स्पष्ट हुआ कि गणेश जोशी ने डंडे से घोड़े के मुंह की ओर प्रहार किया। भीड़ के दौरान घोड़ा अनियंत्रित होकर पीछे की ओर हुआ और वहीं सड़क पर लगे लोहे के एंगल से टकराने से उसकी पिछली टांग टूट गई।

बचाव पक्ष के अधिवक्ता मनमोहन कंडवाल व सुनील राघव ने बताया कि शिकायतकर्त्‍ता पक्ष की ओर से कोर्ट में दिए बयान विरोधाभासी थे, जिसके कारण कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया।

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