उत्तराखंड में बीएमसी को मिलने लगा है उनका हक, पढ़िए पूरी खबर

उत्तराखंड में जैव संसाधनों के संरक्षण में जुटी जैव विविधता प्रबंधन समितियों (बीएमसी) को उनका हक मिलना शुरू हो गया है। राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने पिथौरागढ़ जिले की दो बीएमसी के साथ ही पंतनगर विश्वविद्यालय और उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड को 63.17 लाख रुपये की राशि भेजी है।

Sunil NegiSat, 31 Jul 2021 06:30 AM (IST)
जैव संसाधनों के संरक्षण में जुटी जैव विविधता प्रबंधन समितियों (बीएमसी) को उनका हक मिलना शुरू हो गया है।

राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड में जैव संसाधनों के संरक्षण में जुटी जैव विविधता प्रबंधन समितियों (बीएमसी) को उनका हक मिलना शुरू हो गया है। राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने पिथौरागढ़ जिले की दो बीएमसी के साथ ही पंतनगर विश्वविद्यालय और उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड को 63.17 लाख रुपये की राशि भेजी है। यही नहीं, अब उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड भी विभिन्न कंपनियों, संस्थाओं व व्यक्तियों से जैव संसाधनों के वाणिज्यिक उपयोग के एवज में मिली लाभांश की राशि बीएमसी को वितरित करने की तैयारियों में जुट गया है।

जैव विविधिता अधिनियम में प्रविधान है कि किसी भी क्षेत्र के जैव संसाधनों का वाणिज्यिक उपयोग करने वाली कंपनियां, संस्थाएं और व्यक्ति अपने सालाना लाभांश में से 0.5 से तीन फीसद तक की हिस्सेदारी बीएमसी को देंगी। उत्तराखंड में भी करीब 1200 कंपनियां, संस्थाएं व व्यक्ति चिह़्नित हैं, जो यहां के जैव संसाधनों का वाणिज्यिक उपयोग कर रहे हैं। इनमें से करीब नौ सौ ने अपने सालाना लाभांश में से बीएमसी के लिए तय हिस्सेदारी बोर्ड के पास जमा करानी शुरू किया है। बोर्ड के पास अभी तक छह करोड़ की राशि जमा हो चुकी है, जिसका वितरण बीएमसी को किया जाना है।

इस बीच राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने उत्तराखंड से संबंधित बीएमसी व दावेदारों को धनराशि देना प्रारंभ किया है। उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड के अध्यक्ष विनोद कुमार सिंघल ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि अब राज्य जैव विविधता बोर्ड भी उसके पास जमा लाभांश की राशि बीएमसी को वितरित करने जा रहा है। इसका मैकेनिज्म बनाने के लिए बोर्ड के सदस्य सचिव को निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही प्रदेश के सभी नगर व ग्रामीण निकायों में गठित बीएमसी को यह राशि वितरित की जाएगी, ताकि वे जैव संसाधनों के संरक्षण में तेजी ला सकें।

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