मुकाबला दिलचस्प: भाजपा के छह बनाम कांग्रेस का एक पूर्व मुख्यमंत्री

पूर्व मुख्यमंत्रियों में से सात अब भी सियासत में सक्रिय हैं। चंद महीने बाद होने जा रहे विधानसभा चुनाव के परिप्रेक्ष्य में देखें तो कांग्रेस के पाले में जहां केवल एक ही पूर्व मुख्यमंत्री खड़े नजर आ रहे हैं वहीं भाजपा को छह-छह पूर्व मुख्यमंत्रियों के तजुर्बे का लाभ मिलेगा।

Sumit KumarSun, 26 Sep 2021 04:01 PM (IST)
मुख्यमंत्रियों के आंकड़े के मामले में भाजपा अपनी प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस से कहीं आगे है।

राज्य ब्यूरो, देहरादून: उत्तराखंड को अलग राज्य बने यूं तो अभी 21 साल भी पूरे नहीं हुए, मगर इस दौरान यहां 11 मुख्यमंत्री सरकार की कमान थाम चुके हैं। दिलचस्प यह कि भाजपा और कांग्रेस, दोनों दो-दो बार सत्ता में रहे, मगर मुख्यमंत्रियों के आंकड़े के मामले में भाजपा अपनी प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस से कहीं आगे है। अब तक के 11 मुख्यमंत्रियों में से कांग्रेस के केवल तीन मुख्यमंत्री रहे, जबकि भाजपा के आठ।

हालांकि इनमें भुवन चंद्र खंडूड़ी को दो बार मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला। पूर्व मुख्यमंत्रियों में से सात अब भी सियासत में सक्रिय हैं। चंद महीने बाद होने जा रहे विधानसभा चुनाव के परिप्रेक्ष्य में देखें तो कांग्रेस के पाले में जहां केवल एक ही पूर्व मुख्यमंत्री खड़े नजर आ रहे हैं, वहीं भाजपा को छह-छह पूर्व मुख्यमंत्रियों के तजुर्बे का लाभ मिलेगा।

धामी को मिलेगा कोश्यारी का आशीर्वाद

उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद चार विधानसभा चुनाव में दो बार भाजपा और दो बार कांग्रेस सत्ता में रही। हालांकि भाजपा को पहली अंतरिम सरकार का लगभग सवा साल का कार्यकाल भी अतिरिक्त मिला। इस अंतरिम सरकार में भाजपा ने दो पूर्व मुख्यमंत्री दिए, नित्यानंद स्वामी और भगत सिंह कोश्यारी। स्वामी का निधन हो चुका है और कोश्यारी वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं। कोश्यारी हालांकि संवैधानिक पद का दायित्व संभाल रहे हैं मगर उनकी सक्रियता अभी भी कायम कही जा सकती है। वर्तमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कोश्यारी राजनीतिक गुरु रहे हैं। इस लिहाज से आगामी विधानसभा चुनाव में उनका अशीर्वाद निश्चित रूप से धामी को हासिल होगा।

यह भी पढ़ें- एक दिन हरिद्वार या ऋषिकेश में रहेंगे अमित शाह, 16-17 अक्टूबर को रहेंगे उत्तराखंड के दौरे पर

 

खंडूड़ी और निशंक का अनुभव आएगा काम

दूसरी निर्वाचित विधानसभा के दौरान भाजपा ने तीन मुख्यमंत्री दिए। भुवन चंद्र खंडूड़ी वर्ष 2007 में लगभग सवा दो साल इस पद पर रहे। इसके बाद लगभग इतनी ही अवधि का कार्यकाल रमेश पोखरियाल निशंक को मिला। निशंक पिछले सात सालों से भाजपा सांसद के रूप में केंद्र की सियासत में जमे हुए हैं। उन्हें इस दौरान केंद्र सरकार में मानव संसाधन मंत्री के रूप में भी काम करने का अवसर मिला। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने निशंक के स्थान पर खंडूड़ी को दोबारा मुख्यमंत्री बनाया। तब लगभग छह महीने खंडूड़ी इस पद पर रहे लेकिन विधानसभा चुनाव में पराजय के बाद उन्हें फिर से मौका नहीं मिल पाया। इन दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों के सियासी तजुर्बे का लाभ भाजपा को चुनाव में मिलना तय है।

त्रिवेंद्र-तीरथ की भी रहेगी अहम भूमिका

वर्ष 2017 में भारी भरकम बहुमत के साथ सत्ता में आई भाजपा ने अब तक राज्य को तीन मुख्यमंत्री दिए। त्रिवेंद्र सिंह रावत का कार्यकाल लगभग चार साल का रहा, जबकि उनके उत्तराधिकारी बनाए गए तीरथ सिंह रावत को चार महीने पूरे होने से पहले ही विदा हो जाना पड़ा। गत जुलाई से पुष्कर सिंह धामी के रूप में एक युवा चेहरा सरकार की बागडोर थामे हुए है और उन्हीं के नेतृत्व में भाजपा विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी है। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र व तीरथ पूरी तरह सक्रिय हैं और इनकी मौजूदगी भाजपा के लिए चुनाव में बड़ा संबल बनेगी। हालांकि इनमें से तीरथ मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद अब फिर अपनी सांसद की भूमिका में पूरी तरह रम गए हैं।

यह भी पढ़ें-भाजपा महिला मोर्चा की दो दिवसीय बैठक कुछ ही देर में होगी शुरू, चुनावी रणनीति समेत इन मुद्दों पर होगा मंथन

हरीश रावत के जिम्मे कांग्रेस का मिशन 2022

बात करें कांग्रेस की, तो 10 साल सत्ता में रहने के बाद भी मौजूदा परिदृश्य में केवल एक पूर्व मुख्यमंत्री अकेले पूरे चुनाव अभियान की कमान थामे हुए दिख रहे हैं। दरअसल, उत्तराखंड की पहली निर्वाचित सरकार के मुख्यमंत्री और कांग्रेसी दिग्गज नारायण दत्त तिवारी का निधन हो चुका है। वर्ष 2012 में सत्ता में आने पर कांग्रेस ने टिहरी के तत्कालीन सांसद विजय बहुगुणा को मुख्यमंत्री बनाया, लेकिन केदारनाथ आपदा के बाद उन्हें पद छोडऩा पड़ा। कांग्रेस हाईकमान ने बहुगुणा की जगह हरीश रावत को मुख्यमंत्री बनाया तो बहुगुणा ने मार्च 2016 में भाजपा की राह पकड़ ली। यानी, कांग्रेस से मुख्यमंत्री रहे विजय बहुगुणा भी अब भाजपा के खेमे में हैं। मतलब, कांग्रेस के पास पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में केवल हरीश रावत का ही चेहरा है। महत्वपूर्ण बात यह कि इस बार भी विधानसभा चुनाव नजदीक आते-आते हरीश रावत ही कांग्रेस की धुरी बने नजर आ रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी विधानसभा चुनाव में छह पूर्व मुख्यमंत्रियों के साथ भाजपा मैदान मारती है या फिर कांग्रेस अपने एकमात्र पूर्व मुख्यमंत्री के सहारे चुनावी वैतरणी पार करती है।

यह भी पढ़ें- उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गोदियाल बोले, टैबलेट और स्मार्ट फोन खरीद में गड़बड़ी का अंदेशा

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.