उबड़खाबड़ मैदान पर देख रहे ओलंपिक का सपना, एस्ट्रोटर्फ मैदान में नहीं मिल रही अभ्यास की अनुमति; जानें- क्यों है जरूरी

सात समुंदर पार से अनुभवी प्रशिक्षकों को देहरादून लाकर विशेष प्रशिक्षण दिलवाने का सपना दिखाने वाली उत्तराखंड सरकार टोक्यो ओलंपिक क्वालीफाइंग राउंड के लिए तैयारी कर रहे दो एथलीट को महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज के एस्ट्रोटर्फ मैदान पर अभ्यास करने की अनुमति नहीं दे पा रही।

Raksha PanthriFri, 18 Jun 2021 01:17 PM (IST)
दून के लाडपुर स्थित एक उबडख़ाबड़ मैदान पर अभ्यास करती अंकिता ध्यानी।

जागरण संवाददाता, देहरादून। सात समुंदर पार से अनुभवी प्रशिक्षकों को देहरादून लाकर विशेष प्रशिक्षण दिलवाने का सपना दिखाने वाली उत्तराखंड सरकार टोक्यो ओलंपिक क्वालीफाइंग राउंड के लिए तैयारी कर रहे दो एथलीट को महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज के एस्ट्रोटर्फ मैदान पर अभ्यास करने की अनुमति नहीं दे पा रही है। मजबूरन इन खिलाड़ियों को उबड़-खाबड़ मैदानों में अभ्यास करना पड़ रहा है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या ऐसे में खिलाड़ियों से ओलंपिक में पदक जीतने की उम्मीद की जा सकती है। इन खिलाड़ियों को अभ्यास करने की अनुमति नहीं देकर कहीं न कहीं इनका मनोबल तोड़ने का कार्य किया जा रहा है।

एथलेटिक्स फेडरेशन आफ इंडिया की ओर से 25 से 29 जून तक एनआइएस पटियाला व पटियाला यूनिवर्सिटी में 60वीं नेशनल इंटर स्टेट एथलेटिक्स प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रतियोगिता अगस्त में होने वाले टोक्यो ओलंपिक गेम्स के लिए क्वालीफाइंग राउंड भी है। इसमें क्वालीफाई कर खिलाड़ी टोक्यो ओलंपिक का टिकट हासिल कर सकते हैं। इस प्रतियोगिता में उत्तराखंड की अंकिता ध्यानी व अनु कुमार हिस्सा ले रहे हैं, लेकिन सरकार व सरकारी तंत्र को इससे कोई सरोकार नहीं है। इसका जीता जागता उदाहरण यही है कि पिछले 12 दिनों से उत्तराखंड एथलेटिक्स संघ इन खिलाड़ियों को महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज के एस्ट्रोटर्फ मैदान पर अभ्यास करने की अनुमति मांग रहा है, लेकिन किसी ने इनकी गुहार नहीं सुनी।

उत्तराखंड एथलेटिक्स संघ के अध्यक्ष संदीप शर्मा ने खेल सचिव, खेल मंत्री अरविंद पांडे के निजी सचिव, खेल विभाग व जिलाधिकारी देहरादून को ईमेल भेजकर अनुमति मांगी, लेकिन किसी ने कोई जवाब नहीं दिया। जिलाधिकारी से जवाब मिला भी तो उन्होंने आपदा प्रबंधन सचिव को पत्र लिखने की बात कही।

खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर एक नजर

अंकिता ध्यानी

-फरवरी 2021 में गुवाहाटी में जूनियर नेशनल में पांच हजार मीटर दौड़ में न्यू मीट रिकार्ड के साथ स्वर्ण पदक व 1500 मीटर में स्वर्ण पदक

-जनवरी 2021 में भोपाल में जूनियर फेडरेशन कप में पांच हजार मीटर दौड़ में न्यू मीट रिकार्ड के साथ स्वर्ण पदक व 1500 मीटर में स्वर्ण पदक

-जनवरी 2020 गुवाहाटी में खेलो इंडिया यूथ गेम्स में पांच हजार मीटर दौड़ में मीट रिकार्ड के साथ स्वर्ण पदक व 1500 मीटर में स्वर्ण पदक

अनु कुमार

-2018 में जापान में जूनियर एशिया में 800 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक

-2018 में बैंकाक में यूथ एथलेटिक्स चैंपयिनशिप में 800 मीटर में रजत पदक

संघ ने अंकिता को गांव से दून बुलाया

पौड़ी के दूरस्थ गांव मेरूड़ा निवासी अंकिता ध्यानी ओलंपिक क्वालीफायर की तैयारी अपने गांव की सड़कों पर ही कर रही थी। बीते दिनों उत्तराखंड ओलंपिक संघ ने अंकिता ध्यानी को गांव से देहरादून बुला लिया। यहां आने के बाद भी वह एक उबड़-खाबड़ मैदान में ही अभ्यास कर रही हैं।

अभ्यास के लिए क्यों जरूरी है एस्ट्रोटर्फ मैदान

एथलीट के लिए एस्ट्रोटर्फ मैदान पर अभ्यास करना जरूरी होता है। ओलंपिक, राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएं एस्ट्रोटर्फ मैदान पर ही आयोजित होती हैं। ऐसे में एस्ट्रोटर्फ मैदान पर ही अभ्यास करने का लाभ प्रतियोगिता में मिलता है। एस्ट्रोटर्फ मैदान पर अभ्यास करने से चोटिल होने की संभावना भी कम रहती है। जबकि उबड़-खाबड़ मैदान में यह संभावना अधिक बढ़ जाती है।

उत्तराखंड एथलेटिक्स संघ के सचिव केजेएस कालसीने बताया कि हम पिछले 12 दिनों से अंकिता ध्यानी व अनु कुमार को स्पोर्ट्स कालेज में अभ्यास की अनुमति दिलाने के प्रयास में हैं। इसके लिए हमने खेल सचिव, खेल मंत्री के निजी सचिव, जिलाधिकारी देहरादून को पत्र भेजे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अब हम मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे।

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