देहरादून में एंबुलेंस का किराया तय होने के बाद भी तीन गुना वसूली

दून अस्पताल के बाहर खड़ी एंबुलेंस। जागरण

कोरोनाकाल में मरीजों और उनके तीमारदारों को ‘लूट’ रहे एंबुलेंस संचालक मनमानी से बाज नहीं आ रहे। लंबी कसरत के बाद जिला प्रशासन ने शुक्रवार सुबह एंबुलेंस के किराये की निर्धारित दरें लागू कर दी थीं पर पहले ही दिन एंबुलेंस संचालकों ने प्रशासन के आदेश की धज्जियां उड़ा दीं।

Sunil NegiSat, 15 May 2021 01:27 PM (IST)

जागरण संवाददाता, देहरादून। कोरोना काल में मरीजों और उनके तीमारदारों को ‘लूट’ रहे एंबुलेंस संचालक अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रहे। लंबी कसरत के बाद जिला प्रशासन ने शुक्रवार सुबह एंबुलेंस के किराये की निर्धारित दरें लागू कर दी थीं पर पहले ही दिन एंबुलेंस संचालकों ने प्रशासन के आदेश की धज्जियां उड़ा दीं। उनकी इस नाफरमानी की पड़ताल के लिए प्रशासन की ओर से कोई व्यवस्था नहीं की गई। पुलिस, परिवहन विभाग व प्रशासन ने यह सुध तक लेना जरूरी नहीं समझा कि एंबुलेंस में तय किराया लिया जा रहा या नहीं। स्थिति ये है कि एंबुलेंस संचालकों ने तय किराये से तीन गुना अधिक वसूली की। जिला प्रशासन की ओर से 15 किलोमीटर के दायरे में सामान्य एंबुलेंस का किराया 800 रुपये निर्धारित है, मगर संचालकों ने इस दूरी के 2500 रुपये वसूले। मजबूर मरीज या तीमारदार आखिर करते भी क्या, सरकारी सिस्टम खामोश था और उनके पास दूसरा विकल्प नहीं था।

कोरोना काल में एंबुलेंस संचालकों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन ने गुरुवार रात एंबुलेंस का किराया निर्धारित कर दिया था। नया किराया शुक्रवार सुबह से लागू हो गया, लेकिन पहले ही दिन यह व्यवस्था हवा हो गई। एंबुलेंस संचालकों ने मनमाना किराया ही वसूला और प्रशासन ने इसकी जानकारी लेने की जहमत उठाना भी जरूरी नहीं समझा। दून अस्पताल में जिला प्रशासन ने बकायदा एंबुलेंस के नए किराये की दरें चस्पा की हुई थीं, लेकिन चालक ने तीमारदारों को साफ कर दिया कि संचालक जो किराया कहेंगे, उसी पर वह जाएंगे। इस दौरान मरीज के तीमारदार इसी उधेड़बुन का सामना करते रहे कि मुश्किल समय में वह किराये को लेकर बहस करें या संक्रमण के शिकार मरीज को मनमाने किराये पर दूसरे अस्पताल ले जाएं। इतना ही नहीं मरीज की मृत्यु के बाद उसके शव को रायपुर श्मशान घाट पहुंचाने के लिए भी एंबुलेंस संचालकों ने मनमानी रकम वसूली।

पीपीई किट का बहाना बना रहे

एंबुलेंस चालक अतिरिक्त पैसा वसूलने के लिए पीपीई किट खरीदने और सैनिटाइजेशन का हवाला दे रहे। चालक मोहित ने बताया कि प्रशासन द्वारा तय किराया उन्हें मंजूर हैं, मगर उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कोई नहीं लेता। एंबुलेंस के मालिक कहते हैं कि वह मृत व्यक्ति के स्वजन से ही पीपीई किट व सैनिटाइजेशन का पैसा लें। स्वास्थ्य विभाग व सरकार की तरफ से उन्हें इसके लिए भी कोई मदद नहीं दी जा रही। ऐसे में वह तय किराये के अलावा जो वसूलते हैं वह किट और सैनिटाइजेशन के लिए है।

केस 1: रायपुर स्थित कोविड श्मशान पहुंची नेहरू कालोनी निवासी रचना ने बताया कि उनकी ननद की कोरोना संक्रमण से मृत्यु हो गई। बताया कि वह तीन दिन अरिहंत अस्पताल में भर्ती रहीं। शुक्रवार की सुबह अस्पताल प्रबंधन ने उनकी मौत की सूचना फोन पर दी तो स्वजन उनका शव लेने पहुंचे। यहां उनसे श्मशान घाट तक एंबुलेंस का किराया 2500 रुपये वसूला गया, जबकि अस्पताल से श्मशान की दूरी 11 से 12 किलोमीटर ही होगी। केस 2: कोविड श्मशान पहुंचे करनपुर निवासी अमन ने बताया कि वह अपने रिश्तेदार के अंतिम संस्कार में यहां पहुंचे हैं। मरीज दून अस्पताल में भर्ती थे। सुबह 11 बजे उन्हें उनकी मृत्यु की जानकारी मिली। करीब 12 बजे वह अस्पताल से निकले व बीस मिनट में ही श्मशान पहुंच गए। उन्हें शवदाह के लिए इंतजार भी नहीं करना पड़ा, लेकिन तब भी एंबुलेंस संचालक ने उनसे 2500 रुपये वसूले। केस 3 दून अस्पताल में अपने स्वजन के साथ पहुंचे शिमला बाईपास निवासी संदीप असवाल ने बताया कि उनके करीब 21 दिनों से भर्ती थे। शुक्रवार सुबह उनकी मृत्यु हुई तो रायपुर स्थित कोविड श्मशान ले जाने के लिए एंबुलेंस का किराया पता किया। एंबुलेंस संचालक ने 2500 रुपये बताए। इसकी शिकायत पास खड़े पुलिस कर्मियों से की तो, उन्होंने फटकार लगाई। तब जाकर चालक 1200 रुपये किराये पर शव लेकर चलने को राजी हुआ। केस 4:  हरिद्वार रोड स्थित कैलाश अस्पताल में बेहोशी की हालत में पिता को लाए आशीष नौटियाल ने बताया कि वे सेलाकुई रहते हैं। सुबह अचानक पिता को सीने में तेज दर्द उठा और वे बेहोश हो गए। आनन-फानन एक निजी एंबुलेंस की व्यवस्था की और देहरादून ले आए। परिचित के कहने पर पिता को यहां लाए। यहां तक के एंबुलेंस के चालक ने 2500 रुपये लिए। हालांकि, एंबुलेंस में मरीज को ऑक्सीजन भी दिया गया। केस 5: मेहूंवाला निवासी शाहिद की पत्नी की तबीयत अचानक खराब होने पर वह उन्हें पटेलनगर स्थित श्री महंत इंदिरेश अस्पताल लेकर आए। उन्होंने बताया कि क्षेत्र के ही एक परिचित एंबुलेंस चालक को फोन कर उन्होंने घर बुलाया था। एंबुलेंस में वे पत्नी को अस्पताल लाए। चालक ने उनसे 1000 रुपये लिए। चालक ने कहा कि सरकार के आदेश के मुताबिक यह न्यूनतम शुल्क है। वही लिया जा रहा है।

पुलिस बोली जब कोई शिकायत नहीं करता तो हम क्या करें

शिमला बाइपास निवासी हरि दर्शन बिष्ट ने शुक्रवार दोपहर दून अस्पताल के बाहर खड़ी एक एंबुलेंस के दाम ज्यादा होने की शिकायत अस्पताल के ही बाहर खड़े एक पुलिसकर्मी से की। पुलिसकर्मी ने एंबुलेंस चालक को फटकार लगाते हुए प्रशासन की ओर से तय किराया वसूलने की हिदायत दे इतिश्री कर डाली। इसके बाद स्थिति ये हुई कि चालक ने जाने से ही इन्कार कर दिया। दूसरी तरफ, पुलिसकर्मी का कहना था कि उनसे कोई शिकायत ही नहीं करता। स्थिति ये है कि शिकायत की तो कार्रवाई नहीं हुई और ऊपर से जो एंबुलेंस मिल रही थी वह गई ही नहीं।

जिलाधिकारी डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि एंबुलेंस का किराया तय कर दिया गया है। अगर कोई ज्यादा किराया वसूल रहा है तो इसकी पड़ताल कराई जाएगी। शनिवार से पुलिस और परिवहन विभाग की प्रवर्तन टीमों इसकी जांच में लगाया जाएगा। अगर कहीं भी मनमानी या ज्यादा किराया वसूले जाने की शिकायत मिली तो एंबुलेंस सीज कर चालक व संचालक के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

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