उत्‍तराखंड: 93 करोड़ की बकाया वसूली न होने पर जांच के आदेश, पढ़ि‍ए पूरी खबर

आबकारी विभाग में जंगलराज चल रहा है। विभिन्न जिलों में शराब की दुकानें आवंटित होने के बावजूद पिछले चार साल में 93 करोड़ के राजस्व की वसूली न हो पाना इसकी तस्दीक करता है। विभागीय मंत्री यशपाल आर्य के आदेश पर शासन ने इसकी जांच बैठा दी है।

Sunil NegiSat, 24 Jul 2021 06:45 AM (IST)
शराब की दुकानें आवंटित होने के बावजूद चार साल में 93 करोड़ के राजस्व की वसूली नहीं हो पाई हुई।

राज्य ब्यूरो, देहरादून। आबकारी विभाग में जंगलराज चल रहा है। विभिन्न जिलों में शराब की दुकानें आवंटित होने के बावजूद पिछले चार साल में 93 करोड़ के राजस्व की वसूली न हो पाना इसकी तस्दीक करता है। मामला संज्ञान में आने के बाद विभागीय मंत्री यशपाल आर्य के आदेश पर शासन ने इसकी जांच बैठा दी है। संयुक्त आबकारी आयुक्त रमेश चौहान को देहरादून क्षेत्र और संयुक्त आबकारी आयुक्त केके कांडपाल को कुमाऊं क्षेत्र की जांच का जिम्मा सौंपा गया है।

पिछले चार वर्षों में विभिन्न जिलों में शराब की दुकानें तो आवंटित हुईं, मगर शराब व्यवसायियों से अधिभार के रूप में होने वाली 93 करोड़ की राजस्व वसूली लंबित चल रही थी। पिछले दिनों आबकारी विभाग की समीक्षा बैठक में आबकारी मंत्री यशपाल आर्य ने यह वसूली न होने पर सख्त नाराजगी जताई थी। साथ ही वसूली न किए जाने के कारणों के संबंध में स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। उन्होंने यह भी पूछा कि इस मामले में अधिकारी केवल नोटिस ही क्यों भेजते रहे, कार्रवाई क्यों नहीं की गई। स्पष्ट जवाब न मिलने पर विभागीय मंत्री ने लापरवाही बरतने वाले जिला आबकारी अधिकारियों से स्पष्टीकरण लेने के साथ ही उनके खिलाफ कार्रवाई के आदेश सचिव को दिए थे।

अब कैबिनेट मंत्री आर्य ने इस प्रकरण की जांच कराने के आदेश विभागीय सचिव को दिए हैं। सचिव ने भी तत्काल कार्रवाई करते हुए देहरादून और कुमाऊं क्षेत्र के लिए जांच अधिकारी नियुक्त कर दिए हैं। दोनों जांच अधिकारियों को सभी पहलुओं से पड़ताल कर जल्द रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

संपर्क करने पर आबकारी मंत्री आर्य ने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है। इसमें किसी प्रकार की कोताही सहन नहीं की जाएगी। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर प्रकरण की विजिलेंस जांच कराने पर भी विचार किया जा सकता है।

बैंकों को भी किया गया गुमराह

ये बातें भी छन-छनकर आ रही हैं कि शराब की दुकानें हासिल करने के लिए बैंकों को भी गुमराह किया गया। शराब की दुकान के मद्देनजर फर्जी कागजात लगाकर बैंकों से ऋण लेने का प्रयास हुआ। आबकारी मंत्री आर्य के मुताबिक इसकी भी जांच कराई जा रही है।

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