मनोकामना पूर्ण होने पर नीलकंठ महादेव मंदिर में चढ़ाए 300 किलो लड्डू

जनपद पौड़ी के यमकेश्वर प्रखंड स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर ऋषिकेश में एक श्रद्धालु की मनोकामना पूरी होने पर उसने मंदिर के शिवलिंग पर 300 किलो बेसन के लड्डुओं का भोग लगाया है। मंदिर प्रशासन ने लड्डुओं से शिवलिंग का विशेष श्रृंगार किया।

Sunil NegiSat, 12 Jun 2021 01:20 PM (IST)
मनोकामना पूर्ण होने पर नीलकंठ महादेव मंदिर में चढ़ाए 300 किलो लड्डू।

जागरण संवाददाता, ऋषिकेश। जनपद पौड़ी के यमकेश्वर प्रखंड स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर ऋषिकेश में एक श्रद्धालु की मनोकामना पूरी होने पर उसने मंदिर के शिवलिंग पर 300 किलो बेसन के लड्डुओं का भोग लगाया है। मंदिर प्रशासन ने लड्डुओं से शिवलिंग का विशेष श्रृंगार किया।

समुंद्र मंथन के पश्चात हलाहल विष को ग्रहण करने के पश्चात भगवान शिव नीलकंठ कहलाए। विष की उष्णता को शांत करने के लिए भगवान शिव ने मणिकूट पर्वत की तलहटी पर हजारों वर्षों तक तप किया था। प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु यहां जलाभिषेक कर भगवान भोले से कामना करते हैं। मनोकामना पूर्ण होने पर श्रद्धालु यहां भगवान भोले का आभार जताने भी आते हैं। हालांकि, कोरोना काल के कारण नीलकंठ महादेव मंदिर श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए बंद है। सिर्फ श्रृंगार और भगवान भोले को पंडित जी को भोग लगाते हैं।

मान्यता है कि यहां पहुंचकर भगवान नीलकंठ से मांगी गई मुराद पूरी होती है। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु भगवान भोले का जलाभिषेक करते हैं और भोग लगाते हैं। मनोकामना पूर्ण करने के लिए कई श्रद्धालु सावन के महीने में यहां जमीन पर रेंग कर भी पहुंचते हैं। एक श्रद्धालु की नीलकंठ पौराणिक महादेव मंदिर में भगवान शिव से मांगी गई मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु ने 300 किलो बेसन के लड्डुओं का भगवान शिव के स्वयंभू शिवलिंग पर भोग लगाया। जिसके बाद मंदिर प्रशासन ने विधिवत पूजा-अर्चना और मंत्रोच्चारण के बाद 300 किलो लड्डुओं से भगवान शिव का श्रृंगार किया।

नीलकंठ महादेव मंदिर के महंत सुभाष पुरी महाराज ने बताया कि एक श्रद्धालु ने मनोकामना पूर्ण होने पर नीलकंठ मंदिर में 300 किलो लड्डू का भोग भगवान को लगाने का आग्रह किया। पंडित शिवानंद गिरि की उपस्थिति में भगवान शिव का लड्डू से श्रृंगार किया गया।

उन्होंने बताया कि नीलकंठ महादेव मंदिर प्राचीन है। यहां का शिवलिंग स्वयंभू है। नीलकंठ मंदिर में बहुत दूर-दूर से लोग पूजा अर्चना के लिए पहुंचते हैं। खास बात यह है कि सावन के माह में लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर जलाभिषेक करते हैं।

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