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अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना से जोड़े गए 237 नए पैकेज, बढ़ी इलाज की दरें

देहरादून, जेएनएन। आयुष्मान भारत में इलाज की दरें बढ़ गई हैं। योजना के तहत चल रहे उपचार पैकेज की कीमतों में भी 10 से 60 फीसदी तक की बढ़ोतरी की गई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण ने 270 तरह के पैकेज की कीमतों में बढ़ोतरी के अलावा 237 तरह के नए पैकेज भी इसमें जोड़े हैं। वहीं, 554 पैकेज की पुनरावृत्ति होने के चलते इस योजना से उन्हें हटा दिया गया है। अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के अध्यक्ष डीके कोटिया ने यह जानकारी दी। 

राजपुर रोड स्थित मंथन सभागार में आयोजित कार्यशाला में दूसरे दिन योजना पर एक साल का फीडबैक लिया। कार्यशाला में सम्मलित हुए करीब 40 अस्पताल प्रतिनिधियों ने विभिन्न पैकेजों के रेट कम होने पर आपत्ति जताई। इस पर कोटिया ने कहा कि बाईपास सर्जरी, घुटना-कूल्हा प्रत्यारोपण, अपेंडिक्स, गाल ब्लैडर में पथरी, ब्रेस्ट कैंसर की सर्जरी, पेसमेकर-स्टेंट लगवाने आदि की दरें बढ़ा दी गई हैं। इन बदलावों पर एनएचए का गवर्निंग बोर्ड की मुहर भी लग चुकी है। इसके बाद अस्पतालों की दिक्कत दूर हो जाएगी। 

वहीं, उन्होंने मरीजों को बेहतर उपचार देने एवं रेफर के नाम पर परेशान नहीं करने की हिदायत दी। पहाड़ पर अस्पतालों की शाखाएं खोलने एवं क्लेम रिजेक्ट होने पर रिव्यू को आवेदन करने के लिए कहा। इस दौरान सीईओ अरुणेंद्र सिंह चौहान, डॉ. अभिषेक त्रिपाठी, डॉ. अर्चना श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।

फजीवाड़े पर 'नेम एंड शेम' की श्रेणी में जाएगा नाम 

कोटिया ने बताया कि अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना में फर्जीवाड़ा करने वाले अस्पतालों के नाम 'नेम एंड शेम' की श्रेणी में डालकर सार्वजनिक किए जाएंगे। इसके अलावा अच्छा काम करने वाले अस्पताल 'नेम एंड फेम' की श्रेणी में डाले जाएंगे। उन्होंने कहा कि पूरा जोर योजना को 100 प्रतिशत 'लीक प्रूफ' बनाने पर है। 

आइसीएचआई सिस्टम से जुड़ी योजना

पहली बार स्वास्थ्य बीमा योजना में हर बीमारी को एक खास कोड देने के लिए इंटरनेटशनल क्लासिफिकेशन ऑफ हेल्थ इन्टर्वेन्शन (आइसीएचआई) सिस्टम को जोड़ा गया है। इस सिस्टम को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने चिकित्सीय प्रक्रिया को एक खास कोड देने के लिए बनाया था।

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हर मिनट नौ लोग भर्ती

आयुष्मान योजना एक साल पूरा कर चुकी है। पिछले एक साल के विश्लेषण के तहत देशभर में हर मिनट नौ लोग इस योजना के तहत अस्पताल में भर्ती हुए हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के आंकड़ों के मुताबिक 60 प्रतिशत से अधिक राशि तृतीय श्रेणी के इलाज पर खर्च की गई। इनमें कार्डियोलॉजी, आर्थोपैडिक, रेडिएशन, ओंकोलॉजी, कार्डियो-थोरैसिक, वैस्कुलर सर्जरी और यूरोलॉजी आदि शामिल है।

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