उत्‍तराखंड: पुलिस कर्मियों को 4600 ग्रेड पे की सौगात, सीएम धामी ने पुलिस स्मृति दिवस पर की घोषणा

पुलिस स्मृति दिवस पर गुरुवार को पुलिस लाइन में परेड का आयोजन किया गया। इस दौरान मुख्य तौर पर पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शहीद हुए पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद शहीद के स्वजनों को सम्मानित किया।

Sumit KumarThu, 21 Oct 2021 06:05 PM (IST)
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2001 बैच के सिपाहियों की सेवा के 20 साल अक्टूबर में पूरे हो गए हैैं।

जागरण संवाददाता, देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 20 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके उत्तराखंड पुलिस के सिपाहियों को 4600 ग्रेड पे की सौगात दी है। गुरुवार को पुलिस स्मृति दिवस पर दून में रेसकोर्स स्थित रिजर्व पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने इसका एलान किया। इसका लाभ वर्ष 2001 बैच के 1500 सिपाहियों को मिलेगा। ग्रेड पे में बढ़ोत्तरी से सरकार के खजाने पर इस साल 4.6 करोड़ रुपये और अगले साल से 15 करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ पड़ेगा। ग्रेड पे की मांग को लेकर 2001 बैच के सिपाहियों के स्वजन दो बार सड़क पर उतर चुके हैैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2001 बैच के सिपाहियों की सेवा के 20 साल अक्टूबर में पूरे हो गए हैैं। ऐसे में इन पुलिसकर्मियों का ग्रेड पे अक्टूबर से ही 4600 कर दिया जाएगा। वहीं, 2001 के बाद के बैच के सिपाहियों के ग्रेड पे पर निर्णय के लिए अलग से समिति बनाई गई है। मुख्यमंत्री ने शहीद पुलिसकर्मियों के नाम पर स्कूल व सड़कों का नामकरण करने की भी घोषणा की। साथ ही कहा कि, अपराधियों पर घोषित की जाने वाली इनामी राशि को बढ़ाया जाएगा।

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यह है ग्रेड पे का गणित

उत्तराखंड पुलिस में सिपाहियों को भर्ती के वक्त 2000 रुपये ग्रेड पे मिलता है। पूरे सेवाकाल में उन्हें तीन एसीपी (एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन) मिलती हैैं। पूर्व में एसीपी का लाभ 10, 16 व 26 वर्ष में मिलता था। इसके तहत 10 वर्ष बाद सिपाहियों को हेड कांस्टेबल का 2400 ग्रेड पे और 16 साल बाद दारोगा का 4600 ग्रेड पे मिलता था। चाहे उनकी पदोन्नति हो या न हो। तीसरा ग्रेड पे 4800 रुपये था, जो निरीक्षक का है। सातवां वेतनमान लगने के बाद यह व्यवस्था बदल दी गई। एसीपी का लाभ देने की अवधि 10, 20 व 30 वर्ष कर दी गई। इसके साथ ही दूसरे ग्रेड पे (जो 20 वर्ष की सेवा के बाद दिया जाना है) की राशि 4600 की बजाय 2800 कर दी गई। इसी का विरोध हो रहा था।

शहीद पुलिकर्मियों को मुख्यमंत्री धामी ने दी श्रद्धांजलि

पुलिस शहीद स्मृति दिवस पर रिजर्व पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने का उत्तरदायित्व राज्यों के पुलिस बल व अर्धसैनिक बलों का है। अपने इसी उत्तरदायित्व को पूर्ण निष्ठा से निभाते हुए पुलिसकर्मियों को अपने जीवन की आहुति भी देनी पड़ जाती है। मुख्यमंत्री ने पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों में तैनात अतिथि प्रशिक्षकों को भी उत्तराखंड प्रशासनिक अकादमी नैनीताल के अनुरूप मानदेय देने की घोषणा की। साथ ही कहा कि देहरादून में राज्य पुलिस संग्रहालय मेमोरियल की स्थापना की जाएगी।

एक साल में पूरे देश में कुल 377 अर्धसैनिक बलों व विभिन्न राज्यों के पुलिसकर्मी शहीद हुए। इसमें उत्तराखंड पुलिस के तीन वीर जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने कहा कि ड्यूटी के दौरान प्राणों की आहुति देने वाले यह पुलिसकर्मी हम सबके प्रेरणास्रोत हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड राज्य की अंतरराष्ट्रीय सीमाएं नेपाल, चीन एवं अंतरराष्ट्रीय सीमाएं हिमाचल प्रदेश व उत्तर प्रदेश से मिलती हैं। उत्तराखंड पुलिस के समक्ष कई चुनौतियां हैं, जिनमें बड़े त्योहार, चारधाम यात्रा, आपदा, भूस्खलन, कांवड़ यात्रा शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना संक्रमण के नियंत्रण में पुलिस कार्मिक जान की परवाह न करते हुए सराहनीय कार्य कर रहे हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में अधिकारी व कर्मचारी कोरोना संक्रमित हुए, जबकि 13 पुलिसकर्मियों की मृत्यु हुई। पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने कहा कि 21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख के 16 हजार फीट ऊंचे बर्फीले एवं दुर्गम क्षेत्र हाटस्प्रिंग में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की एक गश्ती टुकड़ी के 10 जवानों ने एसआइ करन सिंह के नेतृत्व में चीनी अतिक्रमणकारियों से लोहा लिया और बहादुरी से लड़ते हुए अपनी मातृभूमि की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति दी थी। इन्हीं वीर सपूतों के बलिदान की स्मृति में प्रत्येक वर्ष 21 अक्टूबर के दिन को पुलिस स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस साल तीन आरक्षी मनोज कुमार जिला चमोली, बलवीर गड़िया चमोली और जितेंद्र सिंह जिला पौड़ी गढ़वाल ने ड्यूटी के दौरान अपने प्राणों की आहुति दी है।

इस मौके पर कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत, गणोश जोशी, महापौर सुनील उनियाल गामा, राज्यसभा सदस्य नरेश बंसल, विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन, खजानदास, विनोद चमोली, मुख्य सचिव डा. एसएस संधु, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, रिटायर्ड डीजीपी सुभाष जोशी, अनिल के रतूड़ी और एसएसपी जन्मेजय खंडूडी भी मौजूद रहे।

हिमवीरों ने भी अर्पित की श्रद्धाजलि

आइटीबीपी अकादमी मसूरी में गुरुवार को पुलिस शहीदी दिवस मनाया गया। इस दौरान हिमवीरों ने देश की रक्षा में अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले पुलिस कर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। 21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख क्षेत्र में चीनी की सेना के साथ झड़प में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के दस जवान शहीद हुए थे। जवानों की याद में हर साल 21 अक्टूबर को पुलिस शहीदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। उपमहानिरीक्षक अजयपाल सिंह ने हिमवीरों को संबोधित करते हुए कहा कि जो जवान अपनी ड़्यूटी निभाते हुए शहीद हुए हैं, उनके योगदान को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता है। उनका बलिदान हमें देश के प्रति कर्तव्यों की याद दिलाता है। हम सभी को प्रतिज्ञा लेनी है कि हम देश सेवा के प्रति हमेशा तत्पर रहेंगे, यही शहीदों को हमारी श्रद्धांजलि होगी। इस दौरान सेनानी प्रशिक्षण संतोष कुमार आदि शामिल रहे।

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