एक साल से लोहाघाट वर्कशॉप में नहीं टपकी पानी की बूंद, कर्मचारियों को करना पड़ रहा पेयजल संकट का सामना

एक साल से लोहाघाट वर्कशॉप में नहीं टपकी पानी की बूंद, कर्मचारियों को करना पड़ रहा पेयजल संकट का सामना
Publish Date:Sun, 20 Sep 2020 05:40 AM (IST) Author: Jagran

लोहाघाट, जेएनएन : छमनियां चौड़ स्थित रोडवेज वर्कशॉप में एक साल से पानी की बूंद नहीं टपकी है। पानी न आने से कर्मचारियों को काफी अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों को ड्यूटी छोड़कर आस-पास के नौलों से पानी लाकर प्यास बुझाने के साथ अन्य जरूरतें पूरी करनी पड़ रही है। पानी के अभाव में डिपो में खड़ी बसों की धुलाई भी नहीं हो पा रही है।

फोरमैन दीपक सिंह ज्याला ने बताया कि अप्रैल 2019 से डिपो कार्यशाला की लाइन में पानी की बूंद नहीं आई है। जल संस्थान को सूचित करने के बाद भी आपूर्ति नहीं की जा रही है। उन्होंने बताया कि गत वर्ष सड़क निर्माण के दौरान रोडवेज को जोड़ने वाली पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी। जलापूर्ति बाधित होने की जानकारी जल संस्थान के अधिकारियों को दे दी गई थी, लेकिन तब से अब तक लाइन की मरम्मत नहीं की गई है। फोरमैन ने बताया कि क्षतिग्रस्त लाइन के पाइप भी मौके से गायब हो गए हैं। कर्मचारियों की साफ सफाई आदि के लिए मोटर से पानी खींचा जा रहा था लेकिन मोटर खराब होने के बाद यह व्यवस्था भी जबाव दे गई है। उन्होंने बताया कि इन दिनों हल्द्वानी व नैनीताल के लिए बसों का संचालन किया जा रहा है, लेकिन पानी न होने से इनकी धुलाई नहीं हो पा रही है। उन्होंने बताया कि जल संस्थान के अधिकारियों से पत्राचार कर जल्द से जल्द लाइन की मरम्मत करने की मांग की गई है। ========= पानी को तरसे एक दर्जन परिवार

लोहाघाट : छमनियां के करीब एक दर्जन परिवारों को नियमित पेयजल की आपूर्ति नहीं हो रही है। क्षेत्र के लिए पेयजल की आपूर्ति सुई लिफ्ट योजना से आता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि विभाग तीन दिन में आपूर्ति कर रहा है जिसके कारण लोगों की आवश्यकता पूरी नहीं हो पा रही है। यहां रह रहे लोगों को नदी नालों और प्राकृतिक जल स्रोतों की शरण लेनी पड़ रही है। ======= सड़क निर्माण के दौरान मशीन लगने से पाइप लाइन टूट गई थी। क्षतिग्रस्त लाइन के चार पाइप भी गायब हो गए हैं। कई बार लाइन ठीक करने के प्रयास किए गए हैं, लेकिन तकनीकी दिक्कतों के कारण सफलता नहीं मिल पाई है। शीघ्र लाइन की मरम्मत कर दी जाएगी।

-पवन बिष्ट, जेई, जल संस्थान लोहाघाट

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