फूलों की घाटी में जमी है पांच फीट से अधिक बर्फ

संवाद सूत्र, जोशीमठ: विश्व धरोहर फूलों की घाटी में इस साल जबर्दस्त बर्फबारी हुई है। घाटी में कई स्थानों पर अभी भी पांच फीट से अधिक बर्फ जमी हुई है। भारी भरकम हिमखंड भी यहां बने हुए हैं।

इस साल फूलों की घाटी की सैर पर्यटक एक जून से करेंगे। फूलों की घाटी में बामणधौड़, नागताल, मैरी की कब्र, द्वारी पुल, स्यूचंद में भारी भरकम हिमखंड आए हुए हैं। वन विभाग की लंबी गश्त की दूरी पर गए कर्मचारियों ने यह सूचना दी है। नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के मुताबिक फूलों की घाटी में शीतकाल में भी नियमित गश्ती व 7 ट्रैप कैमरों से नजर रखी गई। घाटी में अभी पांच फीट से अधिक बर्फ जमी है। इस साल पैदल रास्ते एवं खीर गंगा, अन्य जगह लगे पुलों व पैदल मार्ग को बर्फबारी से नुकसान पहुंचा है। इसको देखते हुए इस साल पार्क प्रशासन एक मई से ही क्षतिग्रस्त रास्तों व पुलों का निर्माण कार्य शुरू करेगा। वन क्षेत्राधिकारी फूलों की घाटी वन प्रभाग के बृजमोहन भारती का कहना है कि इस साल भारी ब़र्फबारी के चलते पांच फीट बर्फ जमी हुई है। इससे पैदल रास्तों, पुलों को नुकसान पहुंचा है। रास्ते में बड़े बड़े हिमखंड बने हैं। पिछले साल फूलों की घाटी में रिकार्डतोड़ 13500 पर्यटक पहुंचे थे। पांच सौ प्रजातियों के फूल हैं यहां

विश्व धरोहर फूलों की घाटी दुनिया की इकलौती जगह है, जहां 500 से अधिक प्रजाति के प्राकृतिक फूल खिलते हैं। इसकी खोज 1931 में कामेट पर्वतारोहण के बाद ब्रिटिश पर्वतारोही फ्रेक स्मिथ ने की। वह पर्वतारोहण के दौरान भटककर यहां पहुंच गए थे। घाटी के सौंदर्य से बहुत प्रभावित हुए और कई दिन यहां गुजारे। अक्टूबर 2006 मे इसे विश्व धरोहर का दर्जा मिला। 87.5 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैली यह घाटी जैव विविधता का खजाना है। घाटी मे दुर्लभ प्रजाति के जीव जंतु, वन्य जीवों, फूलों, जड़ी बूटी का दुर्लभतम संसार है।

1952 से 2019 तक इन राज्यों के विधानसभा चुनाव की हर जानकारी के लिए क्लिक करें।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.