शीतकाल के लिए बंद हुए रुद्रनाथ धाम के कपाट

संवाद सहयोगी गोपेश्वर पंचकेदारों में चतुर्थ भगवान रुद्रनाथ धाम के कपाट रविवार सुबह शीतकाल

JagranPublish:Sun, 17 Oct 2021 06:35 PM (IST) Updated:Sun, 17 Oct 2021 07:49 PM (IST)
शीतकाल के लिए बंद हुए रुद्रनाथ धाम के कपाट
शीतकाल के लिए बंद हुए रुद्रनाथ धाम के कपाट

संवाद सहयोगी, गोपेश्वर: पंचकेदारों में चतुर्थ भगवान रुद्रनाथ धाम के कपाट रविवार सुबह शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। इस दौरान 80 से अधिक श्रद्धालु रुद्रनाथ धाम में मौजूद रहे। कपाटबंदी के बाद बाबा रुद्रनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली को 19 किमी पैदल सगर गांव और फिर वहां से चार किमी गोपेश्वर तक लाया गया। इसके बाद बाबा अगले छह माह के लिए अपने शीतकालीन गद्दी स्थल प्राचीन गोपीनाथ मंदिर में विराजमान हो गए।

चमोली जिले में समुद्रतल से 11808 फीट की ऊंचाई पर स्थित रुद्रनाथ धाम के कपाट बंद की प्रक्रिया ब्रह्ममुहूर्त में चार बजे शुरू हो गई थी। इस साल के मुख्य पुजारी धर्मेंद्र प्रसाद तिवाड़ी ने नारद कुंड में स्नान के बाद बाबा की पूजा-अर्चना की और फिर श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन किए। पूजा-अर्चना के बाद बाबा की चल विग्रह उत्सव डोली का श्रृंगार कर ठीक 4.30 बजे मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए।

पांच बजे के आसपास उत्सव डोली शीतकालीन गद्दीस्थल के लिए रवाना हुई। डोली को पनार बुग्याल होते हुए सगर गांव लाया गया। इस दौरान सगर, गंगोलगांव, ग्वाड़ व देवलधार के श्रद्धालुओं ने रास्ते में बाबा की पूजा-अर्चना की। सगर गांव से गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर पहुंचने पर बाबा रुद्रनाथ के दर्शनों को श्रद्धालु उमड़ पड़े। शीतकाल के छह माह यहीं अपने भक्तों को दर्शन देंगे।

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बुगला के फूलों में ध्यानमग्न हुए बाबा

चतुर्थ केदार रुद्रनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद मान्यता के अनुसार बाबा हिमालयी क्षेत्र में उगने वाले बुगले के फूलों की शैय्या पर ध्यानमग्न हो गए हैं। बाबा को यह फूल अत्यंत प्रिय है, इसलिए कपाटबंदी की अवधि में वे इसी फूल पर विराजमान होकर ध्यान लगाते हैं। कपाट खुलने पर श्रद्धालुओं को प्रथम प्रसाद के रूप में यही पुष्प दिए जाते हैं।