चमोली में एसपी ने सभी थानों से मांगी रिपोर्ट

चीन सीमा से सटा चमोली जिला सामारिक दृष्टि से संवेदनशील है। इसके अलावा हिदुओं की आस्था के केंद्र बदरीनाथ धाम के यहां स्थित होने से चमोली और भी खास हो जाता है। यही वजह है कि जनसांख्यकीय बदलाव (डेमोग्राफिक चेंज) को लेकर शासन के निर्देश के बाद जिला पुलिस भी सतर्क हो गई है।

JagranFri, 01 Oct 2021 11:01 PM (IST)
चमोली में एसपी ने सभी थानों से मांगी रिपोर्ट

जागरण टीम, गोपेश्वर (चमोली) : चीन सीमा से सटा चमोली जिला सामारिक दृष्टि से संवेदनशील है। इसके अलावा हिदुओं की आस्था के केंद्र बदरीनाथ धाम के यहां स्थित होने से चमोली और भी खास हो जाता है। यही वजह है कि जनसांख्यकीय बदलाव (डेमोग्राफिक चेंज) को लेकर शासन के निर्देश के बाद जिला पुलिस भी सतर्क हो गई है। चमोली के पुलिस अधीक्षक यशवंत सिंह चौहान ने बताया कि इस बारे में जानकारी एकत्र की जा रही है। इसके लिए सभी थानों से रिपोर्ट मांगी गई है।

यूं तो चमोली प्रदेश के सबसे शांत जिलों में शुमार है, लेकिन बीते 20 वर्ष में यहां जनसंख्या में आनुपातिक बदलाव महसूस किया जाने लगा है। यह बदलाव जिला मुख्यालय से लेकर सुदूर कस्बों तक में नजर आने लगा है। जिला मुख्यालय गोपेश्वर में एक मोहल्ले को बाकायदा 'मिनी सहारनपुर' के नाम से पुकारा जाने लगा है। पिछले कुछ वर्षो से जिले में मोटर मैकेनिक, नाई, मिस्त्री, मजदूर, बढ़ई, सब्जी, फड़ और फेरी वालों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इनमें ज्यादातर समुदाय विशेष से जुड़े लोग शामिल हैं। पुलिस की चिंता यह है कि इस आड़ में रोहिग्या अथवा बांग्लादेश से आए घुसपैठिए यहां पैठ न बना लें। आलम यह है कि गोपेश्वर, चमोली, गौचर, नंदप्रयाग और जोशीमठ जैसे कस्बों में समुदाय विशेष की आबादी में दो से तीन गुना वृद्धि हुई है।

पीपलकोटी के होटल व्यवसायी अतुल शाह कहते हैं कि ' पिछले बीस वर्षो में गोपेश्वर और चमोली सहित कई कस्बो में समुदाय विशेष से जुड़े लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है।' वह कहते हैं कि हम सर्वधर्म समभाव के हिमायती हैं, लेकिन तेजी से हो रहे इस बदलाव पर चिंतन और मनन की जरूरत है। विश्व हिदू परिषद के जिलाध्यक्ष राकेश मैठाणी भी कुछ इसी तरह की राय व्यक्त करते हैं। वह कहते हैं कि इस मामले में सतर्कता की आवश्यकता है।

रुद्रप्रयाग में भी स्थिति ज्यादा अलग नहीं है। बीते 20 वर्षो में जिला मुख्यालय के साथ ही अगस्त्यमुनि, जखोली, गुप्तकाशी, ऊखीमठ, तिलवाडा, मयाली, भीरी और चन्द्रापुरी जैसे इलाकों में समुदाय विशेष के लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी है। भाजपा के नेता अनूप सेमवाल बताते हैं कि वर्ष 2000 के आसपास रुद्रप्रयाग में गिने-चुने सब्जी वाले और श्रमिक इत्यादि थे, लेकिन अब यह संख्या बढ़ी है। इनमें ज्यादातर समुदाय विशेष से हैं और इनमें बड़ी संख्या में उत्तर प्रदेश के नजीबाबाद, बिजनौर, सहारनपुर और बिहार से आए लोगों की है। सामाजिक कार्यकर्ता वीर सिंह रावत कहते हैं कि पलायन से जूझ रहे पहाड़ों में विशेष सतर्कता रखनी होगी।

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