अल्मोड़ा जिले में राशन डीलरों की हड़ताल से बढ़ने लगी दुश्वारियां

पर्वतीय सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेता कल्याण समिति के तत्वावधान में सस्ता गल्ला विक्रेताओं की हड़ताल से अल्मोड़ा जिले में लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं।

JagranFri, 24 Sep 2021 02:56 PM (IST)
अल्मोड़ा जिले में राशन डीलरों की हड़ताल से बढ़ने लगी दुश्वारियां

संवाद सहयोगी, अल्मोड़ा : पर्वतीय सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेता कल्याण समिति के तत्वावधान में सस्ता गल्ला विक्रेताओं की हड़ताल 24वें रोज भी जारी रही। गल्ला विक्रेताओं ने कहा है कि जब तक उनकी मानदेय संबंधी समस्या का समाधान नहीं होता, हड़ताल जारी रहेगी। इधर, राशन कार्ड धारकों की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। वहीं, पर्वतीय सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेता समिति के जिलाध्यक्ष संजय साह ने मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है।

जैंती : शहरफाटक सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेता संघ की बैठक में बार-बार मांग के बाद भी अब तक समस्या का समाधान नहीं होने पर आक्रोश व्यक्त किया गया। बैठक में गोपाल सिंह, दीवान सिंह, मोहन सिंह कुंजवाल, विशन सिंह, यशवंत धौनी, महेंद्र सिंह, चंदन सिंह, जीवन सिंह व मोहन सिंह आदि मौजूद रहे।

सोमेश्वर : सस्ता गल्ला विक्रेताओं ने रोष व्यक्त कर समस्या के जल्द निराकरण को प्रदर्शन किया। बौरारो सस्ता गल्ला विक्रेता संघ के अध्यक्ष रमेश भाकुनी ने समस्या के समाधान के लिए कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या को मांग बाबत ज्ञापन सौंपा। इधर, क्षेत्र में लोगों को राशन वितरण नहीं होने से वह परेशान हैं।

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केरल व तमिलनाडु की भांति मिले मानदेय

अल्मोड़ा : पर्वतीय सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेता कल्याण समिति के कुमाऊं क्षेत्र के अध्यक्ष मनोज वर्मा ने कहा है कि उत्तराखंड के सस्ता गल्ला विक्रेताओं को भी केरल व तमिलनाडु की भांति मानदेय दिया जाना चाहिए। ताकि वे अपने परिवार का भरण-पोषण सही तरीके से कर सकें। यह बात उन्होंने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही। उन्होंने कहा कि केरल व तमिलनाडु राज्य ऐसे हैं, जहां सालों पूर्व सस्ता गल्ला विक्रेताओं को मानदेय दिया जा रहा है। उत्तराखंड में विक्रेताओं की ओर से अब तक सरकार को 500 ज्ञापन भेजने के बाद भी यह व्यवस्था लागू नहीं की जा सकी है। इससे विवश होकर सरकारी सस्ता विक्रेताओं को आंदोलन के लिए विवश होना पड़ा है। स्पष्ट तौर पर कहा कि हड़ताल के दौरान यदि किसी भी विक्रेता का उत्पीड़न किया गया तो वे सामूहिक इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने वर्षों पूर्व से चल रही दुकानों को ऑनलाइन व्यवस्था से मुक्त रखे जाने पर भी जोर दिया। इस दौरान दिनेश गोयल, अभय साह, केसर सिंह खनी, विपिन तिवारी आदि मौजूद रहे।

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