अल्मोड़ा जिले में वनाग्नि सुरक्षा को वन विभाग की कसरत तेज

अल्मोड़ा जिले में वनाग्नि सुरक्षा को वन विभाग की कसरत तेज

अल्मोड़ा जिले में इस बार अक्टूबर से दिसंबर के मध्य बारिश नहीं होने से विभाग के विभिन्न वन रैंजों में 180 हेक्टेयर जंगल खाक हो गए।

Publish Date:Fri, 22 Jan 2021 10:48 PM (IST) Author: Jagran

संवाद सहयोगी, अल्मोड़ा : इस बार अक्टूबर से दिसंबर के मध्य बारिश नहीं होने से विभाग के विभिन्न वन रैंजों में करीब 180 हेक्टेअर क्षेत्रफल में वन संपदा को नुकसान पहुंचा। इसी के दृष्टिगत अब वन विभाग ने आगामी 15 फरवरी से शुरू होने वाले फायर सीजन के लिए तैयारी तेज कर दी है। इसके अल्मोड़ा वन प्रभाग व सिविल सोयम वन प्रभाग में क्रू स्टेशनों के निर्माण का कार्य शुरू कर दिया गया है। वहीं आग की घटनाओं पर ग्रामीण जनता की भूमिका को देखते हुए ग्राम पंचायतों में वनाग्नि सुरक्षा समितियों के गठन की भी प्रक्रिया भी तेजी से चल रही है। इसके लिए जल्द ही ग्रामीण क्षेत्रों में जन जागरूकता अभियान चलाए जाने की भी कार्ययोजना बनाई जा रही है।

वन विभाग 15 फरवरी से मानसून शुरू होने तक के समय को फायर सीजन मानता है। लेकिन इस बार अक्टूबर से दिसंबर के मध्य बारिश नहीं होने से अल्मोड़ा वन प्रभाग व सिविल सोयम वन प्रभाग में करीब 180 हेक्टेअर क्षेत्रफल की वन संपदा को नुकसान पहुंचा। इसी से सबक लेते हुए इस बार वन विभाग ने फायर सीजन शुरू होने से पहले ही तैयारियां शुरू कर दी है। इसके लिए वनों में फायर लाइन बनाने तथा कंट्रोल बर्निग का कार्य शुरू कर दिया गया है। आग की घटनाओं पर नियंत्रण के लिए सिविल सोयम वन प्रभाग में 60 तो अल्मोड़ा वन प्रभाग में 95 क्रू स्टेशन बनाए गए हैं। यह क्रू स्टेशन संबंधित क्षेत्रों में आग की घटनाएं होने पर इसकी सूचना तत्काल जिला मुख्यालय स्थित कंट्रोल रूम को देंगे। वहीं जिले की 1160 ग्राम पंचायतों में भी वनाग्नि सुरक्षा समिति के गठन का कार्य तेज कर दिया गया है। करीब 80 फीसद ग्राम पंचायतों में यह कार्य पूरा हो चुका है। सभी ग्राम पंचायतों में समितियों का गठन कर लिए जाने के बाद इन समितियों की बैठक में ग्रामीणों को वनाग्नि सुरक्षा की जानकारी दी जाएगी। वहीं सभी ग्रामीण क्षेत्रों में विभाग की ओर से विशेष जनजागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।

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फायर सीजन को देखते हुए वन प्रभागों में क्रू स्टेशन स्थापित कर दिए गए हैं। वनों में गिरे सूखे चीड़ के पत्तों को कंट्रोल र्बिनंग के तहत जलाया जा रहा है। वनाग्नि सुरक्षा के लिए ग्राम पंचायतों में समितियों का गठन किया जा रहा है। जिसे 15 फरवरी से पहले ही पूरा कर लिया जाएगा।

- आरसी कांडपाल, डीएफओ, सिविल सोयम वन प्रभाग

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